योग और श्वसन स्वास्थ्य: ICMR व Ministry of AYUSH की रिपोर्ट से वैज्ञानिक प्रमाणित लाभ | Yoga and Respiratory Health
ICMR और Ministry of AYUSH की रिपोर्ट के आधार पर जानें योग और प्राणायाम के वैज्ञानिक लाभ। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस व फेफड़ों की सेहत के लिए असरदार उपाय।
HEALTH TIPS


शीर्षक: योग और श्वसन स्वास्थ्य: ICMR एवं Ministry of AYUSH की वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर सम्पूर्ण मार्गदर्शन
परिचय:-
आधुनिक व्यस्त जीवनशैली, प्रदूषण और मानसिक तनाव शरीर की श्वसन प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं। इससे श्वसन संबंधी बीमारियां जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, और कोविड-19 जैसी महामारी के दौरान दिक्कतें काफी बढ़ गई हैं।
ऐसे समय में योग और प्राणायाम को प्राकृतिक उपचार के रूप में अपनाने की सलाह ICMR (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद) और Ministry of AYUSH ने दी है। ये दोनों संस्थाएं योग को फेफड़ों और सांस की नलियों की सेहत सुधारने में वैज्ञानिक रूप से प्रभावी मानती हैं।
योग क्या है?
योग भारतीय संस्कृति की प्राचीन चिकित्सा और जीवन प्रणाली है, जिसमें आसन, प्राणायाम, ध्यान, संयम जैसे आठ अंग शामिल हैं[1]। योग का अभ्यास शारीरिक लचीलापन, मानसिक शांति और ऊर्जा संतुलन के साथ श्वसन क्रिया को सुदृढ़ करता है।
प्राणायाम विशेष रूप से सांसों के नियंत्रण के माध्यम से फेफड़ों की क्षमता और सांस लेने की गहराई (डिप्थ) बढ़ाने में कारगर है। पूरे विश्व में 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाता है।
ICMR की रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:-
ICMR ने किए गए अध्ययन के अनुसार, नियमित योगाभ्यास विशेषकर प्राणायाम से फेफड़ों की कार्यक्षमता (pulmonary function) में सुधार होता है, सांस की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और सांस लेने की क्षमता बढ़ती है।:
- नियमित 8 सप्ताह तक योग करने पर फेफड़ों की ज़्यादा हवा लेने की क्षमता (Vital Capacity) में लगभग 15 प्रतिशत तक सुधार देखा गया।
- सांस की लहर और आवृत्ति नियंत्रण में आती है, जिससे सांस लेना सुगम होता है।
- अस्थमा और अन्य श्वसन रोगों के लक्षणों में कमी देखने को मिली।
- बुजुर्गों में योग से सांस संबंधी रोगों का खतरा कम होने के साथ उपचार की प्रक्रिया तेज़ होती है।
Ministry of AYUSH की रिपोर्ट और प्रोटोकॉल :-
Ministry of AYUSH ने कोविड-19 महामारी के दौरान और सामान्य श्वसन रोगों के प्रबंधन में योग और आयुर्वेद को समर्थित किया है। मंत्रालय की तैयार की गई राष्ट्रीय क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल में योग एवं प्राणायाम के अभ्यास को रोगियों की बेहतर रिकवरी और रोग नियंत्रण के लिए प्रभावी माना गया है।
विभिन्न आसनों और प्राणायामों को अपनाने की सलाह दी गई है, जिनमें प्रमुख हैं :
- भुजंगासन, शशांकासन, मकरासन जैसे योगासनों का नियमित अभ्यास
- अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका, नाड़ी शोधन प्राणायाम
- इनसे सांस की नलिकाओं की सफाई, शरीर में ऑक्सीजन का आदान-प्रदान बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है
श्वसन स्वास्थ्य पर योग के वैज्ञानिक प्रभाव :-
योगिक अभ्यास से शरीर के फेफड़ों की मांसपेशियों में ताकत आती है, जो सांस लेने और छोड़ने की क्रिया को नियंत्रित करती हैं। श्वसन तंत्र की सूजन और जलन कम होकर, रोगप्रतिरोधक क्षमता (Immune System) मजबूत होती है। कुछ अध्ययन बताते हैं कि,
- आठ सप्ताह के योगाभ्यास से फेफड़ों की श्रेष्ठ कार्यक्षमता और ब्लड ऑक्सीजन लेवल बेहतर होता है।
- सांस लेने की औसत दर सामान्य होती है, जिससे थकावट कम होती है।
- अस्थमा, COPD, ब्रोंकाइटिस जैसे रोगों के लक्षणों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।
कोविड-19 और अन्य श्वसन रोगों में योग की भूमिका :-
कोविड-19 के इलाज में भी योगिक प्राणायाम और ध्यान को सहायक उपचार माना गया है। अस्पतालों में किये गए क्लीनिकल ट्रायल्स में पाया गया कि योग से फेफड़ों का प्रेशर नियंत्रण में रहता है और रिकवरी शीघ्र होती है। इसके साथ ही, योग दिमाग को तनाव मुक्त कर रोग-सहनशक्ति बढ़ाता है।
योग के प्रमुख प्राणायाम और उनके लाभ:-
अनुलोम-विलोम: शरीर में ऑक्सीजन संचार बढ़ाता है, दिमाग को शांत करता है, और श्वसन मार्ग की सफाई करता है।
कपालभाति: श्वसन तंत्र को सक्रिय कर फेफड़ों को मजबूत करता है।
भस्त्रिका: सांस लेने की क्रिया को तेज़ और गहरा बनाता है, शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ाता है।
नाड़ी शोधन: नाड़ियों का संतुलन स्थापित करता है, जिससे रक्तचाप नियंत्रित रहता है।
योग के अभ्यास के लिए सुझाव:-
- योगाभ्यास हमेशा स्वच्छ और खुले वातावरण में करें।
- योग शिक्षक की देखरेख में शुरुआत करें, खासतौर पर यदि पुरानी बीमारी हो।
- रोजाना कम से कम 20-30 मिनट योग और प्राणायाम करने का प्रयास करें।
- मानसिक तनाव कम करने के लिए ध्यान और योग की अन्य विधियां भी अपनाएं।
बच्चों, युवाओं और वृद्धों के लिए योग :-
योग हर आयु वर्ग के लिए फायदेमंद है। बच्चों में प्रतिरक्षा प्रणाली सुधारने में, युवाओं में तनाव कम करने और वृद्धों में श्वसन तंत्र को मजबूत बनाने में योग सहायक होता है। नियमित अभ्यास से जीवनशैली स्वस्थ और सक्रिय बनी रहती है।
निष्कर्ष :-
ICMR और Ministry of AYUSH की वैज्ञानिक रिपोर्ट और अनुसंधान यह स्पष्ट करते हैं कि योग न केवल बीमारी से लड़ने का माध्यम है, बल्कि यह पहले से स्वस्थ रहने के लिए भी कारगर है।
श्वसन स्वास्थ्य सुधारने हेतु योग कुछ सबसे प्रभावशाली और प्राकृतिक उपायों में से एक है, जो शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य सभी को बेहतर बनाता है।
नियमित योग अभ्यास से हमारा शरीर, विशेष रूप से श्वसन तंत्र, अधिक सुदृढ़ और संक्रमण-रहित बना रहता है।
संदर्भ स्रोत और प्रमुख शोधकर्ता
स्रोत:
ICMR (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद)
Ministry of AYUSH
PMC Journals
Indian Journal of Medical Research Health Sciences
Central Council for Research in Yoga & Naturopathy
ResearchGate
PIB Press Releases
प्रमुख शोधकर्ता:
डॉ. मीनाक्षी श्रीनिवास (ICMR)
डॉ. KK दीपक (AIIMS)
डॉ. सुषमा अग्रिहोत्री (Central Council for Research in Yoga & Naturopathy)
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।



