अहमदाबाद में फर्जी मेडिकल कॉल-सेंटर रैकेट का भंडाफोड़: 24 गिरफ्तार, NRI को लाखों की चपत कैसे लगाई गई?
अहमदाबाद पुलिस ने एक संगठित साइबर रैकेट का खुलासा किया है, जहाँ मेडिकल सपोर्ट के नाम पर NRI नागरिकों से लाखों की ठगी की जा रही थी। छापेमारी में 24 आरोपी पकड़े गए और नकली ‘मेडिकल कनेक्टिविटी सर्विस’ कॉल-सेंटर का पूरा नेटवर्क सामने आया। कैसे यह गिरोह काम करता था, किस तरह NRI को निशाना बनाया गया और पुलिस ने इसे कैसे पकड़ा—पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
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अहमदाबाद में फर्जी मेडिकल कॉल-सेंटर रैकेट का भंडाफोड़: 24 लोग गिरफ्तार, NRI को निशाना बनाने वाली हाई-टेक जालसाज़ी उजागर
अहमदाबाद में पुलिस ने एक ऐसे संगठित कॉल-सेंटर रैकेट का पर्दाफाश किया है, जो खुद को “इंटरनेशनल मेडिकल सपोर्ट एजेंसी” बताकर NRI समुदाय से लाखों रुपये की ठगी कर रहा था।
यह मामला सिर्फ एक कॉल-सेंटर पर छापा नहीं, बल्कि यह बताने वाला बड़ा संकेत है कि हेल्थ सर्विसेज के नाम पर साइबर-जालसाज़ी अब कितनी तेजी से फैल रही है।
शहर के व्यावसायिक इलाके में चल रहे इस “मेडिकल कनेक्टिविटी सर्विस कॉल-सेंटर” में पुलिस ने छापा मारकर 24 लोगों को गिरफ्तार किया। शुरुआती जांच में पता चला कि यह गिरोह विशेष रूप से विदेशों में बसे भारतीयों को निशाना बनाता था — खासकर वे लोग जो अपने परिवार की मेडिकल जिम्मेदारियाँ भारत से दूर बैठकर संभालते हैं।
कॉल-सेंटर में क्या चल रहा था? अंदर की तस्वीर चौंकाती है
जैसे ही SOG और क्राइम ब्रांच की टीम अंदर पहुंची, पूरा सेटअप किसी असली अंतरराष्ट्रीय BPO जैसा लग रहा था —
● दर्जनों कंप्यूटर
● हाई-स्पीड इंटरनेट
● VOIP कॉलिंग सिस्टम
● विदेशी नंबर
● कई देशों के NRI डाटाबेस
● प्रेशर बनाने वाली तैयार स्क्रिप्ट
कर्मचारी खुद को “International Medical Emergency Support Team” का सदस्य बताते थे और पीड़ितों को यह विश्वास दिलाते थे कि:
उनका मेडिकल रिकॉर्ड अपडेट नहीं है,
इंश्योरेंस ब्लॉक होने वाला है,
अस्पताल में कोई आपातकालीन प्रक्रिया रुकी है,
या कुछ भुगतान न करने पर उनके परिवार को नुकसान हो सकता है।
स्क्रिप्ट इस तरह बनाई गई थी कि कॉल सुनते ही व्यक्ति को लगे — ये मामला तुरंत हल न किया, तो कुछ गंभीर हो जाएगा।
NRI क्यों बन रहे थे आसान शिकार? पुलिस और विशेषज्ञ बताते हैं असली वजह
NRI समुदाय स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी बातों में पहले से संवेदनशील रहता है।
कई कारण सामने आए:
● वे अपने परिवार की मेडिकल स्थिति दूर से संभालते हैं।
● भारतीय अस्पताल/बीमा प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी नहीं होती।
● टाइम-डिफरेंस की वजह से तुरंत वेरिफिकेशन मुश्किल होता है।
● मेडिकल टर्म सुनकर लोग घबरा जाते हैं।
यही वजह है कि कॉल-सेंटर ऑपरेटर उन्हें मानसिक दबाव में ले आते थे।
कॉल पर कहा जाता था:
“आपके पिता का मेडिकल रिकॉर्ड मिसमैच में है…”
“इंश्योरेंस अभी तुरंत ब्लॉक हो जाएगा…”
“200 डॉलर का अपडेट चार्ज देना होगा…”
अधिकतर लोग डर और संदेह में बिना वेरिफिकेशन पैसा भेज देते थे।
यह ऑपरेशन कैसे पकड़ा गया? कार्रवाई का पूरा ब्लूप्रिंट
पिछले कुछ महीनों में कई NRI लोगों ने शिकायत की थी कि:
मेडिकल रिकॉर्ड अपडेट के नाम पर उनसे पैसे मांगे जा रहे हैं,
कॉल करने वाले खुद को अमेरिकी एजेंसी बताते हैं,
और लगातार पेमेंट लिंक भेजे जा रहे हैं।
तकनीकी सर्विलांस, VOIP ट्रैकिंग, बैंक लेन-देन और डेटा मिररिंग से पुलिस ने लोकेशन ट्रेस की और छापा मारा।
छापे में मिला:
✔ विदेशी डाटाबेस
✔ नकली हेल्थ एजेंसी के लेटरहेड
✔ तैयार स्क्रिप्ट
✔ पेमेंट गेटवे रिकॉर्ड
✔ कई विदेशी IP-बेस्ड नंबर
अधिकारियों के अनुसार यह पूरा मॉडल क्लिनिकल-फ्रॉड + साइबर-फ्रॉड का मिश्रित स्वरूप था — जो भारत में पहली बार इतने संगठित रूप में पकड़ा गया है।
मेडिकल फ्रॉड क्यों बढ़ रहे हैं? डिजिटल हेल्थ के बढ़ते खतरे
COVID के बाद भारत सहित पूरी दुनिया में स्वास्थ्य सेवाएं तेजी से डिजिटल हुईं:
ऑनलाइन रिपोर्ट
डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड
टेलीमेडिसिन
मोबाइल हेल्थ मॉनिटरिंग
इन नई सुविधाओं के साथ एक समानांतर दुनिया पैदा हुई —
“unregulated digital health ecosystem”
जहां फर्जी कॉल-सेंटर, नकली हेल्थ एजेंसियां और रियल-टाइम फ्रॉड तेजी से बढ़े।
यानी, जितनी तेज़ी से डिजिटल हेल्थ सिस्टम बढ़ रहा है, उतने ही तेज़ अपराधी भी।
साइबर विशेषज्ञ: “हेल्थ-आधारित फ्रॉड सबसे खतरनाक”
एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ के मुताबिक:
“जब ठग मेडिकल शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, पीड़ित तुरंत भावनात्मक दबाव में आ जाता है।
स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी पर लोग सेकंडों में निर्णय लेते हैं — और यही अपराधी चाहते हैं।”
हेल्थ फ्रॉड सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि:
● मेडिकल सिस्टम पर विश्वास खत्म करता है
● मरीजों और परिवारों में असुरक्षा बढ़ाता है
● NRI समुदाय के लिए अतिरिक्त तनाव पैदा करता है
समुदाय पर क्या असर पड़ा? NRI अब हर कॉल पर संदेह कर रहे हैं
इस घटना के बाद कई NRI भारतीय हेल्थ कॉल्स से डर रहे हैं।
अधिकतर लोग किसी भी मेडिकल-संबंधित फोन, ईमेल या मैसेज को दोबारा जांच रहे हैं।
यह अविश्वास धीरे-धीरे स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचा रहा है —
खासतौर पर उन परिवारों के लिए जो बुजुर्ग माता-पिता का इलाज दूर से मैनेज करते हैं।
पुलिस की चेतावनी: ऐसे कॉल से तुरंत बचें
साइबर सेल के अनुसार:
● कोई मेडिकल संस्था फोन पर पेमेंट नहीं मांगती।
● हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियाँ ईमेल पर आधिकारिक सूचना देती हैं।
● किसी भी पेमेंट लिंक पर क्लिक न करें।
● परिवार/डॉक्टर/हॉस्पिटल से स्वयं सत्यापन करें।
● फर्जी कॉल की शिकायत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर करें।
समापन: यह मामला एक चेतावनी है — भारत में हेल्थ फ्रॉड की नई दिशा
अहमदाबाद में पकड़े गए इस फर्जी मेडिकल कॉल-सेंटर ने साफ संकेत दे दिया है कि भारत में साइबर अपराधियों ने अब स्वास्थ्य सेवाओं को भी ठगी का साधन बना लिया है।
इस केस ने तीन बातें साबित की:
डिजिटल हेल्थ सिस्टम जितना बड़ा होगा, फ्रॉड की संभावना भी उतनी बढ़ेगी।
एनआरआई समुदाय डिजिटल मेडिकल ठगी का आसान लक्ष्य है।
लोगों को मेडिकल कॉल्स को लेकर और सचेत रहने की जरूरत है।
जब तक:
बेहतर डिजिटल नियमन
मरीजों की डेटा सुरक्षा
और हेल्थ फ्रॉड पर सख्त निगरानी
नहीं होती, ऐसे कॉल-सेंटर फिर से सामने आते रहेंगे।
References / स्रोत
● Ahmedabad Police Cyber Cell Report
● SOG Crime Branch Investigation Notes
● Cyber Fraud Awareness Guidelines, Govt. of India
● Inputs from Cybersecurity Experts (2025)
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।