आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और MIGHT Method: कैंसर की शुरुआती पहचान में नई उम्मीद | Artificial Intelligence and the MIGHT Method: New Hope for Early Cancer Detection
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब कैंसर की शुरुआती पहचान में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है। Johns Hopkins University द्वारा विकसित MIGHT Method (Multidimensional Informed Generalized Hypothesis Testing) लिक्विड बायोप्सी और DNA पैटर्न का उपयोग करके कैंसर को अधिक सटीक और तेज़ी से पहचानता है। जानिए इसके फायदे, चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कैंसर की शुरुआती पहचान : “MIGHT मेथड” से खुला नया रास्ता
परिचय:-
कैंसर आज दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल लाखों लोग कैंसर से पीड़ित होते हैं और देर से पता चलने के कारण उपचार कठिन हो जाता है। यही वजह है कि कैंसर की शुरुआती पहचान (Early Cancer Diagnosis) पर शोध लगातार बढ़ रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने मेडिकल साइंस में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। एक्स-रे, एमआरआई, पैथोलॉजी स्लाइड्स, और ब्लड टेस्ट में छुपे पैटर्न को पहचानकर AI डॉक्टरों को तेज और सटीक निर्णय लेने में मदद करता है।
इसी क्रम में हाल ही में एक नई तकनीक सामने आई है – MIGHT Method (Multidimensional Informed Generalized Hypothesis Testing)। इसे जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है, और यह कैंसर की शुरुआती पहचान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
कैंसर पहचान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका:-
पारंपरिक तरीके (जैसे बायोप्सी, रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी) में अक्सर कैंसर तब पकड़ में आता है जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। AI इस समस्या को कई तरीकों से हल कर रहा है:
इमेज एनालिसिस: AI एल्गोरिद्म (Algorithm) CT स्कैन, MRI, और मैमोग्राफी में छोटे से छोटे ट्यूमर को पकड़ लेता है।
डिजिटल पैथोलॉजी: स्लाइड इमेजेज में असामान्य कोशिकाओं का पता लगाना।
लिक्विड बायोप्सी: खून में मौजूद ट्यूमर DNA फ्रैगमेंट्स (ctDNA) की पहचान।
प्रोटीन और जीनोमिक डेटा: AI जटिल बायोमार्कर्स को पढ़कर यह बता सकता है कि कैंसर की संभावना कितनी है।
इन्हीं तकनीकों के आधार पर नया MIGHT Method तैयार किया गया है।
MIGHT (Multidimensional Informed Generalized Hypothesis Testing Method) क्या है?
MIGHT (Multidimensional Informed Generalized Hypothesis Testing) एक उन्नत AI आधारित सांख्यिकीय तकनीक है। इसे खासतौर पर लिक्विड बायोप्सी (Blood Test) से कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए बनाया गया है।
यह तरीका हजारों बायोलॉजिकल संकेतों (features) जैसे DNA के टुकड़े, क्रोमोसोम की गड़बड़ियाँ (Aneuploidy), और अन्य बायोमार्कर्स को एक साथ परखता है।
MIGHT मेथड की खासियत यह है कि यह सिर्फ “कैंसर बनाम स्वस्थ” डेटा नहीं देखता, बल्कि उन मरीजों का डेटा भी शामिल करता है जिनको ऑटोइम्यून डिजीज या वेस्कुलर डिजीज होती हैं। क्योंकि इन बीमारियों में भी DNA पैटर्न कैंसर जैसा लग सकता है। इस वजह से False Positive (गलत कैंसर रिपोर्ट) की संभावना बहुत कम हो जाती है।
यह तकनीक कैसे काम करती है?
MIGHT मेथड की कार्यप्रणाली को सरल भाषा में ऐसे समझ सकते हैं:
डेटा संग्रहण: मरीजों के खून के सैंपल से DNA फ्रैगमेंट्स और अन्य मार्कर्स की जानकारी ली जाती है।
मल्टीडायमेंशनल एनालिसिस: हजारों वेरिएबल्स (फीचर्स) को अलग-अलग सेट्स में बांटा जाता है।
हाइपोथेसिस टेस्टिंग: हर फीचर सेट को परखकर देखा जाता है कि कौन सा सेट कैंसर और नॉन-कैंसर को बेहतर तरीके से अलग करता है।
नॉन-कैंसर डिजीज डेटा इंटीग्रेशन: ताकि गलत पॉजिटिव कम हों।
वैलिडेशन: अलग-अलग डेटा सबग्रुप्स पर जांच करके मॉडल की सटीकता बढ़ाई जाती है।
रिसर्च के नतीजे:-
इस शोध में लगभग 1,000 व्यक्तियों को शामिल किया गया, जिसमे 352 मरीजों को कैंसर था (ज्यादातर एडवांस स्टेज के थे )। और 648 मरीजों को कैंसर नहीं था।
कुल 44 अलग-अलग प्रकार के फीचर सेट्स पर टेस्ट किया गया। जिसमे सबसे अच्छे परिणाम Aneuploidy आधारित फीचर्स से आए।
सेंसिटिविटी (Cancer पकड़ने की क्षमता): 72%
स्पेसिफिसिटी (गलत पॉजिटिव रोकने की क्षमता): 98%
मतलब यह तरीका 100 में से 72 कैंसर सही पकड़ लेता है, और सिर्फ 2 ही मरीजों को गलत पॉजिटिव बताता है।
फायदे:-
डॉक्टरों के लिए: ज्यादा भरोसेमंद रिपोर्ट, कम गलत पॉजिटिव।
मरीजों के लिए: शुरुआती स्टेज पर कैंसर पकड़ने से इलाज आसान और सफल।
समाज के लिए: कैंसर से मृत्यु दर में कमी और इलाज की लागत कम।
AI और हेल्थकेयर में प्रगति: छोटे सैंपल साइज और बड़े डेटा फीचर्स को संभालने की क्षमता।
चुनौतियाँ और सीमाएँ:-
72% सेंसिटिविटी (Cancer पकड़ने की क्षमता) अभी भी बेहतर की जानी चाहिए। शुरुआती स्टेज कैंसर (Stage I/II) पकड़ने में और सुधार ज़रूरी है।
अभी तक टेस्टिंग मुख्य रूप से Advanced Cancer Patients पर हुई है।
विविध जनसंख्या (Ethnic Groups, Geographical Areas) पर वैलिडेशन ज़रूरी है।
क्लिनिकल इम्प्लीमेंटेशन के लिए बड़े ट्रायल्स और रेगुलेटरी अप्रूवल चाहिए।
भविष्य की दिशा:-
MIGHT मेथड भविष्य में:
जनरल कैंसर स्क्रीनिंग (Regular Health Check-up) का हिस्सा बन सकता है।
AI + Liquid Biopsy मिलकर बिना दर्द वाले टेस्ट से कैंसर पहचानेंगे।
हेल्थकेयर सिस्टम पर बोझ कम होगा।
“प्रिसिशन मेडिसिन” (हर मरीज के लिए पर्सनलाइज्ड इलाज) को और मजबूत करेगा।
निष्कर्ष:-
कैंसर से लड़ाई जीतने के लिए सबसे बड़ा हथियार है – शुरुआती पहचान।
MIGHT Method ने यह साबित किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक बायोमेडिकल साइंस मिलकर कैंसर की शुरुआती स्क्रीनिंग को सटीक, सुरक्षित और किफायती बना सकते हैं।
भविष्य में अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई जाती है, तो करोड़ों लोगों की जान बच सकती है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ाई में इंसानियत को नई उम्मीद मिलेगी।
References:-
Source: Johns Hopkins Medicine, New Method Advances Reliability of AI with Applications in Medical Diagnostics, Published in PNAS, August 2025.
Supporting Journal: Cancer Discovery, August 2025.
Researchers:-
डॉ. बर्ट वोगेलस्टीन (Bert Vogelstein) – प्रोफेसर, Johns Hopkins University
डॉ. रिनाल्डो बेलिसारियो (Rinaldo Bellisario) – कंप्यूटेशनल बायोलॉजिस्ट
रिसर्च टीम, Sidney Kimmel Comprehensive Cancer Center, Johns Hopkins
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।



