अमेरिका ने भारतीय दवाओं पर 100% आयात शुल्क लगाया: भारतीय फार्मा उद्योग पर असर
अमेरिका ने 1 अक्टूबर 2025 से भारत से आयातित ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। जानिए भारतीय सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया, फार्मा कंपनियों पर असर, उद्योग की चिंताएँ और भविष्य की रणनीतियाँ।
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अमेरिका द्वारा भारतीय दवाओं पर 100% आयात शुल्क: भारतीय फार्मा उद्योग की प्रतिक्रिया और संभावित प्रभाव
परिचय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 1 अक्टूबर 2025 से भारत सहित अन्य देशों से आयातित ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा की है। इस निर्णय का उद्देश्य अमेरिकी घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और विदेशी निर्भरता को कम करना है। हालांकि, भारतीय फार्मा उद्योग ने इस कदम की आलोचना की है, यह दावा करते हुए कि भारतीय जनरिक दवाएँ सुरक्षित हैं और इस तरह के टैरिफ अमेरिका की दवा सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं।
भारतीय सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने 26 सितंबर 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 1 अक्टूबर 2025 से भारतीय ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा के बाद अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयस्वाल ने एक साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "हमने सोशल मीडिया पर नई टैरिफ नीति के बारे में सूचना देखी है। संबंधित मंत्रालय और विभाग इस मामले की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और इसके प्रभाव का मूल्यांकन कर रहे हैं।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर संबंधित मंत्रालयों के साथ चर्चा की जाएगी।
Photo courtesy - DD INDIA NEWS
अमेरिकी टैरिफ नीति का विवरण
अमेरिका ने 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी होने वाले इस टैरिफ नीति के तहत, केवल ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% आयात शुल्क लगाया है। यह नीति भारतीय जनरिक दवाओं को प्रभावित नहीं करती है, क्योंकि अधिकांश भारतीय दवाओं का निर्यात अमेरिका में जनरिक दवाओं के रूप में होता है।
हालांकि, कुछ भारतीय कंपनियाँ ब्रांडेड जनरिक दवाओं का भी निर्माण करती हैं, जो इस नई नीति के दायरे में आ सकती हैं।
भारतीय फार्मा उद्योग की प्रतिक्रिया
भारतीय फार्मास्युटिकल एलायंस (IPA) ने अमेरिकी निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि भारतीय जनरिक दवाएँ उच्च गुणवत्ता वाली हैं और अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
IPA ने अमेरिकी सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है, यह चेतावनी देते हुए कि इससे अमेरिकी रोगियों के लिए दवाओं की उपलब्धता और लागत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अमेरिकी टैरिफ का भारतीय फार्मा कंपनियों पर प्रभाव
अमेरिका भारतीय फार्मा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात बाजार है, जिसमें FY 2025 में लगभग $10.5 बिलियन का निर्यात हुआ था। हालांकि, अधिकांश निर्यात जनरिक दवाओं का है, जो इस टैरिफ से सीधे प्रभावित नहीं होंगी, फिर भी कुछ कंपनियाँ प्रभावित हो सकती हैं।
प्रभावित कंपनियाँ:
सन फार्मा: HSBC के अनुसार, सन फार्मा को अपने अमेरिकी ब्रांडेड उत्पादों के कारण 8-10% तक मुनाफे में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।
नैटको फार्मा: नैटको फार्मा जैसे छोटे खिलाड़ी जिनका अमेरिकी बाजार में सीमित हिस्सा है, वे इस टैरिफ से अप्रभावित रह सकते हैं।
संभावित जोखिम और चिंताएँ
कॉम्प्लेक्स जनरिक्स और बायोसिमिलर्स: विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यदि इन उत्पादों पर भी टैरिफ लगाया जाता है, तो भारतीय कंपनियाँ प्रभावित हो सकती हैं।
अमेरिका में उत्पादन: अमेरिकी सरकार के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयासों के कारण भारतीय कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन सुविधाएँ स्थापित करने की आवश्यकता पड़ सकती है, जो वित्तीय दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
निष्कर्ष
अमेरिका द्वारा भारतीय दवाओं पर 100% आयात शुल्क लगाने का निर्णय भारतीय फार्मा उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, विशेषकर उन कंपनियों के लिए जो ब्रांडेड उत्पादों पर निर्भर हैं। हालांकि, जनरिक दवाओं का निर्यात इस टैरिफ से प्रभावित नहीं होगा, फिर भी भविष्य में अन्य उत्पादों पर टैरिफ लगाने की संभावना को देखते हुए भारतीय कंपनियों को अपनी रणनीतियाँ पुनः मूल्यांकन करनी चाहिए।
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

