अस्थमा: जेनेटिक और पर्यावरणीय कारण, लक्षण और रोकथाम के उपाय | Asthma Causes & Prevention

अस्थमा (दमा) एक गंभीर श्वसन रोग है जो जेनेटिक और पर्यावरणीय कारणों से होता है। जानें अस्थमा के लक्षण, आनुवंशिक कारण, वायु प्रदूषण और धूम्रपान जैसे पर्यावरणीय कारक, बच्चों और बड़ों में अस्थमा का फर्क और रोकथाम के उपाय। सही जीवनशैली और समय पर इलाज से अस्थमा को नियंत्रित किया जा सकता है।

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Ashish Pradhan

10/1/20251 min read

अस्थमा के जेनेटिक और पर्यावरणीय कारण – फेफड़ों की सूजी हुई नलियों का चित्र, साथ में DNA, धुआं, धूल
अस्थमा के जेनेटिक और पर्यावरणीय कारण – फेफड़ों की सूजी हुई नलियों का चित्र, साथ में DNA, धुआं, धूल

अस्थमा: जेनेटिक और पर्यावरणीय कारण – रोकथाम की ओर
अस्थमा क्या है और यह क्यों चिंता का विषय है?

अस्थमा, जिसे आम भाषा में दमा भी कहा जाता है, एक ऐसी बीमारी है जिसमें सांस लेने में तकलीफ़ होती है। यह बीमारी तब होती है जब फेफड़ों की नलियों (Airways) में सूजन आ जाती है और वे सिकुड़ जाती हैं। इसके कारण हवा का प्रवाह रुक जाता है और व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।

दुनियाभर में करोड़ों लोग अस्थमा से प्रभावित हैं।

यह बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक किसी को भी हो सकता है।

यह बीमारी लंबे समय तक रह सकती है और कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकती है।

अस्थमा क्यों होता है – इसके पीछे असली वजह क्या हैं?

अस्थमा एक जटिल बीमारी है जिसके पीछे कई कारण मिलकर काम करते हैं। इसे हम दो मुख्य हिस्सों में समझ सकते हैं:

  1. जेनेटिक कारण (Genetic Factors)

  2. पर्यावरणीय कारण (Environmental Factors)

जेनेटिक कारण क्या हैं – क्या अस्थमा हमारे खून में छिपा है?

वैज्ञानिकों ने पाया है कि अस्थमा का एक बड़ा कारण आनुवंशिकता (Genetics) है।

अगर परिवार में किसी को अस्थमा है, तो बच्चों में यह बीमारी होने का खतरा दो गुना बढ़ जाता है।

हमारे शरीर में मौजूद जीन (Genes) फेफड़ों के विकास और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करते हैं।

कुछ जीन ऐसे पाए गए हैं जो शरीर को एलर्जी और धूल-धुएं के प्रति अधिक संवेदनशील बना देते हैं।

इसका मतलब यह है कि अस्थमा केवल पर्यावरण की वजह से नहीं, बल्कि हमारे DNA में भी इसके बीज छिपे हो सकते हैं।

पर्यावरणीय कारण कैसे अस्थमा को बढ़ावा देते हैं?

पर्यावरण का असर अस्थमा पर बहुत गहरा होता है।

1. वायु प्रदूषण (Air Pollution)

  • गाड़ियों का धुआं, फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और धूल अस्थमा के बड़े कारण हैं।

  • प्रदूषित हवा फेफड़ों में सूजन पैदा करती है।

2. धूम्रपान (Smoking)

  • धूम्रपान करने वालों में अस्थमा का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

  • गर्भावस्था में धूम्रपान करने से बच्चे में अस्थमा का खतरा और ज़्यादा होता है।

3. एलर्जी (Allergy)

  • धूल, परागकण (Pollen), फफूंद (Mold) और पालतू जानवरों के बाल एलर्जी पैदा करते हैं।

  • लंबे समय तक एलर्जी रहने से अस्थमा शुरू हो सकता है।

4. संक्रमण (Infections)

  • बचपन में बार-बार श्वसन संक्रमण (Respiratory infections) फेफड़ों को कमजोर कर देते हैं।

  • इससे बड़े होकर अस्थमा होने की संभावना बढ़ जाती है।

5. मोटापा और गलत खानपान

  • मोटापा शरीर में सूजन बढ़ाता है, जिससे अस्थमा का खतरा बढ़ता है।

  • जंक फूड और मीठे पेय पदार्थ फेफड़ों की सेहत पर बुरा असर डालते हैं।

बच्चों और बड़ों में अस्थमा का फर्क क्यों होता है?

बच्चों में:

  • फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते।

  • माता-पिता को अस्थमा होने पर बच्चों में खतरा ज्यादा रहता है।

बड़ों में:

  • प्रदूषण, धूम्रपान और जीवनशैली अस्थमा को बढ़ाते हैं।

  • मोटापा और तनाव भी भूमिका निभाते हैं।

अस्थमा के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
  1. क्या आपको सांस लेने में कठिनाई होती है?

  2. क्या आपके सीने में बार-बार जकड़न होती है?

  3. क्या रात को खांसी आती है?

  4. क्या दौड़ने पर तुरंत सांस फूल जाती है?

  5. क्या सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज़ आती है?

  6. अगर इन सवालों का जवाब “हाँ” है तो यह अस्थमा का संकेत हो सकता है।

अस्थमा से बचाव कैसे किया जा सकता है?
  1. प्रदूषण से बचाव

  2. बाहर जाते समय मास्क पहनें।

  3. धुएं और ट्रैफिक वाली जगहों से दूरी बनाएं।

  4. धूम्रपान छोड़ें

  5. धूम्रपान न करें और दूसरों के धुएं से भी बचें।

  6. घर की सफाई

  7. घर की नियमित सफाई करें।

  8. पालतू जानवरों को साफ रखें।

  9. खानपान और व्यायाम

  10. हरी सब्ज़ियां और फल खाएँ।

  11. जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक से बचें।

  12. नियमित व्यायाम करें।

  13. डॉक्टर की सलाह

  14. अस्थमा की दवाएं और इनहेलर समय पर लें।

  15. बच्चों की सांस की समस्या को हल्के में न लें।

क्या अस्थमा और एलर्जी आपस में जुड़े हैं?

हाँ, बिल्कुल।

जिन लोगों को एलर्जी होती है, उनमें अस्थमा का खतरा ज़्यादा होता है। धूल, धुआं, परागकण और पालतू जानवर एलर्जी बढ़ाते हैं।

क्या जीवनशैली में बदलाव से अस्थमा रोका जा सकता है?

हाँ।

  • स्वस्थ खानपान अपनाकर।

  • धूम्रपान छोड़कर।

  • मोटापा नियंत्रित रखकर।

  • तनाव कम करके।

रिसर्च क्या कहती है – अस्थमा रोकथाम संभव है?
  1. 2025 में The Lancet Respiratory Medicine में प्रकाशित रिसर्च बताती है:

  2. अस्थमा केवल पर्यावरण की वजह से नहीं, बल्कि जेनेटिक कारणों से भी जुड़ा है।

  3. परिवार में इतिहास होने पर बच्चों में बचपन से ही रोकथाम ज़रूरी है।

  4. वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना जरूरी है।

  5. समाज और सरकार को मिलकर जागरूकता फैलानी होगी।

क्या भारत जैसे देशों में अस्थमा ज्यादा खतरनाक है?

हाँ।

  • भारत जैसे देशों में वायु प्रदूषण बहुत अधिक है।

  • स्मॉग और धूल लोगों के फेफड़ों पर बुरा असर डालते हैं।

  • यहां धूम्रपान भी बड़ी समस्या है।

भविष्य में अस्थमा की रोकथाम कैसे संभव है?
  • बेहतर दवाइयां और इनहेलर।

  • व्यक्तिगत जेनेटिक जांच।

  • प्रदूषण नियंत्रण नीतियां।

  • स्कूल और परिवारों में जागरूकता कार्यक्रम।

निष्कर्ष: हमें क्या सीख लेनी चाहिए?

अस्थमा एक गंभीर लेकिन काबू में रखने योग्य बीमारी है। हमें चाहिए कि हम:

  • प्रदूषण से बचें।

  • धूम्रपान से दूरी बनाएं।

  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।

  • बच्चों में शुरुआती लक्षण पहचानें।

  • बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है।

Reference (संदर्भ)

Source: The Lancet Respiratory Medicine (2025)

Researchers: Gerard H Koppelman, Maria Pino-Yanes, Erik Melén, Pippa Powell, Ken R Bracke, Juan C Celedón

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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