WHO की चेतावनी: घर के अंदर बच्चों में बढ़ रही ज़हरखोरी की घटनाएँ — माता-पिता के लिए जरूरी सावधानियाँ
हर साल लाखों बच्चे घर में रखी दवाओं, क्लीनिंग लिक्विड्स या कीटनाशकों के कारण आकस्मिक ज़हरखोरी का शिकार हो रहे हैं। WHO की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यह लेख बताता है कि माता-पिता कैसे सरल सावधानियों—जैसे दवाओं का सुरक्षित भंडारण, बच्चों की निगरानी और आपातकालीन तैयारी—से इन खतरनाक घटनाओं को रोक सकते हैं। पढ़ें विशेषज्ञों की राय और जानें व्यावहारिक समाधान।
HEALTH TIPS


परिचय:
हर साल दुनिया भर में लाखों छोटे बच्चे अनजाने में घर के अंदर रखी दवाओं, कीटनाशकों, सफाई उत्पादों या सौंदर्य प्रसाधनों के संपर्क में आकर ज़हरखोरी (Poisoning) का शिकार हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में आकस्मिक विषाक्तता (accidental poisoning) एक प्रमुख कारण है अस्पताल में भर्ती होना और मृत्यु का।
भारत जैसे विकासशील देशों में यह समस्या और भी गंभीर है, क्योंकि घरों में सुरक्षा उपायों की कमी, दवाओं का असुरक्षित भंडारण और माता-पिता की जागरूकता की कमी इन घटनाओं को बढ़ा देती है।
बच्चे स्वभाव से जिज्ञासु होते हैं, और उनके लिए कोई भी रंगीन गोली या तरल पदार्थ खिलौने जैसा आकर्षक लगता है। ऐसे में माता-पिता की थोड़ी सी लापरवाही एक बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि कौन सी चीजें बच्चों के लिए विषैली हो सकती हैं, इनसे बचाव कैसे किया जा सकता है और आपात स्थिति में क्या कदम उठाए जाएं।
1. बच्चों में आकस्मिक ज़हरखोरी क्यों होती है?
छोटे बच्चों की उम्र 1 से 5 वर्ष के बीच होती है, जब वे अपने आसपास की हर चीज़ को छूना, चखना या सूंघना चाहते हैं। उनके इस स्वाभाविक व्यवहार के चलते कई बार वे अनजाने में खतरनाक पदार्थों का सेवन कर लेते हैं।
कुछ सामान्य कारण इस प्रकार हैं:
दवाइयाँ: दर्द निवारक, सर्दी-खांसी की सिरप, नींद की दवा या विटामिन टैबलेट्स बच्चों के लिए सबसे आम ज़हर का स्रोत होती हैं।
सफाई उत्पाद: फर्श क्लीनर, टॉयलेट क्लीनर, ब्लीच और डिटर्जेंट आदि केमिकल्स बच्चों के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं।
कीटनाशक और फिनायल: गांवों और छोटे कस्बों में घरों के अंदर रखे कीटनाशक या फिनायल ज़हरखोरी की प्रमुख वजह हैं।
कॉस्मेटिक और पेंट उत्पाद: नेल पॉलिश रिमूवर, परफ्यूम, हेयर डाई, या पेंट थिनर में मौजूद केमिकल्स भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
2. माता-पिता को किन संकेतों पर सतर्क होना चाहिए?
कभी-कभी बच्चें ज़हरखोरी के बाद डर या शर्म के कारण बताते नहीं कि उसने कुछ निगल लिया है। ऐसे में माता-पिता को लक्षणों पर ध्यान देना आवश्यक हो जाता है जैसे:
उल्टी, मिचली या पेट में दर्द
मुंह या होंठ के आसपास जलन या फफोले
सांस लेने में कठिनाई
बेहोशी या चक्कर आना
असामान्य व्यवहार या सुस्ती
यदि ये लक्षण किसी अनजान पदार्थ के सेवन के बाद दिखें, तो तुरंत डॉक्टर या ज़हर नियंत्रण केंद्र (Poison Control Center) से संपर्क करें।
3. घर में आकस्मिक ज़हरखोरी से बचाव के उपाय क्या हैं?
(1) दवाइयों को सुरक्षित स्थान पर रखें
सभी दवाइयों को बच्चों की पहुंच से दूर, बंद अलमारी में रखें। उन्हें हमेशा मूल पैकेजिंग में ही रखें ताकि गलती से अन्य पदार्थों के साथ भ्रम न हो।
ध्यान रखें: “child-resistant cap” वाली बोतलें उपयोग करें।
(2) सफाई उत्पादों को कभी भी खाने-पीने के बर्तनों में न रखें
कई घरों में क्लीनिंग लिक्विड या फिनायल बोतल में डालकर रखा जाता है, जो बाद में भ्रम का कारण बन सकता है। यह सबसे खतरनाक गलती है।
(3) दवाइयों को बच्चों के सामने न खाएं
बच्चे अनुकरण करते हैं। यदि वे आपको गोली खाते देखते हैं, तो वे भी वैसा करने की कोशिश करेंगे।
(4) मोबाइल नंबर हाथ में रखें
अपने नजदीकी अस्पताल, आपात सेवा (108), और राष्ट्रीय विष नियंत्रण केंद्र (National Poisons Information Centre) का नंबर अपने मोबाइल में सेव रखें।
(5) बच्चों को शिक्षित करें
जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसे यह सिखाएं कि घर में रखी दवाइयाँ, क्लीनर या पेंट कभी नहीं खाने चाहिए, चाहे वे कितने भी आकर्षक दिखें।
4. आपात स्थिति में क्या करें?
शांत रहें, लेकिन तुरंत कार्रवाई करें।
बच्चे के मुंह में कोई पदार्थ हो तो उसे साफ पानी से धोएं।
यदि बच्चा बेहोश है या सांस नहीं ले रहा, तो तुरंत आपात चिकित्सा सहायता (Emergency Medical Help) बुलाएं।
किसी भी हालत में बच्चे को जबरदस्ती उल्टी कराने की कोशिश न करें, क्योंकि कई रसायन दोबारा गले में आने से और जलन कर सकते हैं।
डॉक्टर को बताएँ कि बच्चे ने क्या निगला, कितनी मात्रा में और कब।
5. विशेषज्ञों की राय:
डॉ. शिल्पा मेहता, बाल रोग विशेषज्ञ, एम्स दिल्ली कहती हैं –
“भारत में अधिकांश विषाक्तता के मामले घर के भीतर ही होते हैं और इनमें 70% बच्चे पाँच वर्ष से कम उम्र के होते हैं। इस समस्या से बचने का सबसे बड़ा उपाय है — माता-पिता की जागरूकता और घरेलू सुरक्षा उपाय।”
डॉ. राकेश शर्मा, क्लिनिकल टॉक्सिकोलॉजिस्ट, का कहना है –
“Poisoning को रोकने के लिए यह जरूरी है कि घर में हर केमिकल या दवा पर लेबल स्पष्ट रूप से चिपका हो। कई बार बिना लेबल वाले बोतलें या घरेलू उपाय जानलेवा साबित हो जाते हैं।”
6. डिजिटल और तकनीकी सुरक्षा उपाय
अब कई देशों में स्मार्ट “Poison Alert” ऐप विकसित किए गए हैं जो माता-पिता को यह जानकारी देते हैं कि कौन सा पदार्थ बच्चे के लिए खतरनाक है और आपात स्थिति में तुरंत क्या करें।
भारत में भी AIIMS Poisons Information Centre और National Health Portal पर ऐसे संसाधन उपलब्ध हैं, जिनसे माता-पिता घर बैठे सलाह प्राप्त कर सकते हैं।
7. क्या हो सकती है नीति-स्तर पर पहल?
सरकारी स्तर पर यदि दवाओं और रासायनिक उत्पादों की पैकेजिंग में “child-proof” कैप्स को अनिवार्य किया जाए, तो हजारों बच्चों की जान बच सकती है।
इसके अलावा स्कूल स्तर पर भी “Safety Awareness” पाठ्यक्रम में घर की सुरक्षा पर आधारित विषय जोड़े जाने चाहिए ताकि बच्चों को शुरुआत से ही खतरे की पहचान करना सिखाया जा सके।
निष्कर्ष:
बच्चों में आकस्मिक ज़हरखोरी एक रोकी जा सकने वाली त्रासदी है। सिर्फ कुछ साधारण आदतें—जैसे दवाओं को ऊंचे स्थान पर रखना, केमिकल्स पर लेबल लगाना, और बच्चे को समझाना—इस समस्या से निपटने में अत्यंत प्रभावी साबित हो सकती हैं।
हर माता-पिता का कर्तव्य है कि वे न केवल अपने बच्चों की देखभाल करें बल्कि घर को भी सुरक्षित वातावरण में बदलें। थोड़ी सी सजगता, और बहुत सी जानें बचाई जा सकती हैं।
संदर्भ:
World Health Organization (WHO) – Preventing childhood poisoning report, 2024
AIIMS National Poisons Information Centre – Safety Guidelines for Households, 2025
UNICEF India – Child Safety & Health Data, 2023
Centers for Disease Control and Prevention (CDC) – Childhood Injury Prevention Report, 2024
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।
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