कॉम्बिनेशन इनहेलर से अस्थमा अटैक आधे हो सकते हैं – न्यूज़ीलैंड अध्ययन 2025 | Combination inhalers may cut asthma attacks in half – New Zealand study 2025
न्यूज़ीलैंड के MRINZ CARE Trial 2025 में पाया गया कि कॉम्बिनेशन इनहेलर से बच्चों और बड़ों में अस्थमा अटैक लगभग 50% तक कम हो सकते हैं।
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क्या एक ही इनहेलर से अस्थमा अटैक कम हो सकता है? न्यूज़ीलैंड के नए अध्ययन ने उम्मीद बढ़ाई
Ashish Pradhan – Health Journalist
परिचय
अस्थमा एक ऐसी दीर्घकालिक बीमारी है जिसमें सांस की नली में सूजन और संकुचन हो जाता है। जिसके कारण अचानक अटैक आने पर कई मरीजों को अस्पताल तक जाना पड़ता है। इसी समस्या के अन्तर्गत न्यूज़ीलैंड में किए गए MRINZ CARE Trial 2025 में एक अहम बात सामने आई है कि कॉम्बिनेशन इनहेलर नाम की नई पद्धति से बच्चों में अस्थमा अटैक लगभग आधे तक कम देखने को मिली। इसलिए यह खोज बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अस्थमा क्या है?
अस्थमा में:
सांस की नली (airways) सूज जाती है
हवा का प्रवाह कम हो जाता है
बार-बार खाँसी, सीने में जकड़न, सीटी जैसी आवाज़ और सांस फूलना होता है
यह बीमारी बच्चों और बड़ों दोनों में आम है।
अब तक इलाज कैसे होता था?
अभी तक अस्थमा नियंत्रण के लिए दो तरह के इनहेलर दिए जाते थे:
1. रिलीवर इनहेलर (Salbutamol)
अटैक आने पर तुरंत राहत देता है
सिर्फ अस्थायी आराम
2. प्रिवेंटर इनहेलर (Steroid)
रोज़ाना लेने से सूजन कम करता है
बीमारी को लंबे समय तक नियंत्रित रखने में मदद
समस्या कहाँ है?
बहुत से मरीज सिर्फ रिलीवर इनहेलर पर निर्भर रहते हैं, जिससे बीमारी नियंत्रित नहीं रहती और अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
कॉम्बिनेशन इनहेलर क्या है?
यह नया इनहेलर दो दवाइयों का संयोजन है:
स्टेरॉयड: सूजन कम करने के लिए
ब्रॉन्कोडायलेटर: सांस की नली खोलने के लिए
क्यों खास है?
यह एक ही इनहेलर के माध्यम से:
✓ तुरंत राहत भी देता है
✓ और बीमारी की जड़ पर भी काम करता है
MRINZ CARE Trial 2025 – बच्चों पर असर
यह अध्ययन न्यूज़ीलैंड में 5–15 वर्ष के बच्चों पर किया गया।
मुख्य परिणाम:
कॉम्बिनेशन इनहेलर लेने वाले बच्चों में अस्थमा अटैक लगभग 50% तक कम देखे गए
स्कूल उपस्थिति बढ़ी
खेल गतिविधियों में सुधार
दवा सुरक्षित पाई गई
लंबा इलाज आसान और सुसंगत हुआ
(Source: MRINZ CARE Trial, 2025)
वयस्कों पर भी बड़े परिणाम – MANDALA & BATURA Trials
यह तरीका सिर्फ बच्चों पर ही नहीं, बल्कि वयस्कों पर भी प्रभावी पाया गया।
MANDALA Trial (NEJM)
वयस्कों में अस्थमा अटैक में लगभग 30% तक कमी
Emergency visits में गिरावट
BATURA Trial (2024)
मरीजों को बार-बार स्टेरॉयड गोलियों की आवश्यकता कम हुई
लंबे समय तक बीमारी नियंत्रण में रही
यह बदलाव क्यों ज़रूरी है?
सिर्फ Salbutamol पर निर्भर रहने से:
बार-बार अटैक होते हैं
WHO के अनुसार मौत का खतरा 2–3 गुना बढ़ सकता है
लंबे समय में फेफड़ों की क्षमता घट सकती है
कॉम्बिनेशन इनहेलर अस्थमा को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं।
भारत जैसे देशों में इसकी अहमियत क्यों बढ़ती है?
भारत में:
प्रदूषण
धूल
धुआँ
मौसम में बदलाव
अस्थमा को और गंभीर बनाते हैं।
क्यों जरूरी?
बच्चों और बुजुर्गों में खतरा ज्यादा
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कम
अस्पताल पहुँचने में देर हो सकती है
कॉम्बिनेशन इनहेलर से अस्पताल जाने की जरूरत काफी कम हो सकती है।
मरीज और परिवार क्या करें? (Practical Tips)
इनहेलर बदलने से पहले डॉक्टर से सलाह लें
इनहेलर का सही तरीका सीखें
बच्चों के लिए स्पेसर का उपयोग करें
धूल, धुआँ और परागकण से बचें
नियमित जांच कराते रहें
चेतावनी (Safety Note)
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। क्याेंेंकि हर मरीज की दवा अलग-अलग हो सकती है। इसलिए अपने डॉक्टर की सलाह के बिना इनहेलर न बदलें।
भविष्य की दिशा
डॉक्टरों का मानना है कि आने वाले समय में कॉम्बिनेशन इनहेलर अस्थमा इलाज का प्रमुख विकल्प बन सकते हैं। इससे अटैक कम होने के साथ-साथ मरीजों का जीवन भी अधिक सुरक्षित और सामान्य हो सकता है।
संदर्भ (References)
CARE Trial 2025 — Medical Research Institute of New Zealand
MANDALA Trial — Published in New England Journal of Medicine
BATURA Trial 2024 — International Collaboration Report
WHO – Asthma Management Guidelines
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

