क्या CRISPR तकनीक से डाउन सिंड्रोम का इलाज संभव है? – ट्राइसॉमी 21 रिसर्च में नई उम्मीद

जापानी वैज्ञानिकों ने CRISPR–Cas9 तकनीक से डाउन सिंड्रोम (Trisomy 21) कोशिकाओं से अतिरिक्त क्रोमोसोम हटाने की कोशिश की। यह रिसर्च जीन एडिटिंग और भविष्य की संभावित थेरेपी के लिए नई उम्मीद जगाती है। जानें डाउन सिंड्रोम, इसके कारण, CRISPR तकनीक और इस अध्ययन की चुनौतियाँ।

INNOVATION

Ashish Pradhan

10/3/20251 min read

CRISPR तकनीक से डाउन सिंड्रोम (Trisomy 21) के अतिरिक्त क्रोमोसोम को हटाने की अवधारणा दर्शाता थंबनेल
CRISPR तकनीक से डाउन सिंड्रोम (Trisomy 21) के अतिरिक्त क्रोमोसोम को हटाने की अवधारणा दर्शाता थंबनेल
क्या CRISPR तकनीक से डाउन सिंड्रोम का इलाज संभव है? – ट्राइसॉमी 21 पर नई उम्मीद
परिचय

दुनिया भर में हर साल लाखों बच्चों का जन्म एक खास जेनेटिक स्थिति के साथ होता है, जिसे डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) कहा जाता है।

यह स्थिति तब होती है जब बच्चे के शरीर की कोशिकाओं में क्रोमोसोम 21 की एक अतिरिक्त कॉपी मौजूद होती है। आमतौर पर हमारे शरीर की हर कोशिका में 46 क्रोमोसोम होते हैं, लेकिन डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में यह संख्या 47 हो जाती है। यही अतिरिक्त क्रोमोसोम बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है।

अभी तक इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं था। लेकिन हाल ही में जापान के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक का इस्तेमाल करके उम्मीद जगाई है।

उन्होंने CRISPR–Cas9 जीन एडिटिंग के जरिए कोशिकाओं से अतिरिक्त क्रोमोसोम को हटाने की कोशिश की। इस तकनीक को कहते हैं – Trisomic Rescue।

इस लेख में हम समझेंगे कि डाउन सिंड्रोम क्या है, यह क्यों होता है, CRISPR तकनीक क्या है, और इस नई रिसर्च से भविष्य में क्या बदलाव आ सकते हैं।

डाउन सिंड्रोम क्या है?

डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक बीमारी है। इसका मतलब है कि यह बीमारी किसी संक्रमण या वायरस से नहीं होती, बल्कि हमारे DNA और क्रोमोसोम में गड़बड़ी के कारण होती है।

डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में:

चेहरे की बनावट थोड़ी अलग होती है।

आँखें थोड़ी तिरछी दिखाई देती हैं।

कद छोटा रहता है।

बोलने और सीखने में देर होती है।

कई बार दिल और अन्य अंगों में भी दिक्कतें होती हैं।

यह बीमारी क्यों होती है?

सामान्य इंसान के शरीर में 23 जोड़े क्रोमोसोम होते हैं (कुल 46)। लेकिन कभी-कभी कोशिका विभाजन (Cell Division) के दौरान गलती हो जाती है और क्रोमोसोम 21 की एक अतिरिक्त कॉपी जुड़ जाती है।

इस तरह बच्चे के पास 2 नहीं, बल्कि 3 कॉपी हो जाती हैं। इस स्थिति को कहते हैं ट्राइसॉमी 21 (Trisomy 21)। यही अतिरिक्त कॉपी डाउन सिंड्रोम की वजह बनती है।

ट्राइसॉमी 21 का क्या मतलब है?

"ट्राइसॉमी" का अर्थ है – तीन कॉपी।

"21" का मतलब है – 21वें नंबर का क्रोमोसोम।

यानी ट्राइसॉमी 21 का मतलब है – क्रोमोसोम 21 की 3 कॉपी।

यही वजह है कि डाउन सिंड्रोम को कई बार ट्राइसॉमी 21 सिंड्रोम भी कहा जाता है।

डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में क्या लक्षण दिखते हैं?

डाउन सिंड्रोम के लक्षण अलग-अलग बच्चों में अलग हो सकते हैं। लेकिन कुछ आम संकेत इस प्रकार हैं:

  1. जन्म के समय छोटा सिर और चपटा चेहरा।

  2. छोटी गर्दन और छोटा कद।

  3. सीखने और बोलने में परेशानी।

  4. दिल की बीमारियों का खतरा।

  5. कानों में सुनने की दिक्कत।

  6. आँखों में मोतियाबिंद या अन्य समस्या।

  7. संक्रमण जल्दी लगना।

अभी तक इसका इलाज कैसे किया जाता है?

डाउन सिंड्रोम का कोई स्थायी इलाज अभी तक नहीं है।

बच्चों को स्पीच थैरेपी, फिजियोथैरेपी और खास शिक्षा दी जाती है।

डॉक्टर दिल की सर्जरी या दवाइयों से जटिल समस्याओं का इलाज करते हैं।

परिवार और समाज का सहयोग बच्चे के विकास के लिए सबसे जरूरी होता है।

लेकिन अब वैज्ञानिक कोशिकाओं से सीधे अतिरिक्त क्रोमोसोम हटाने की कोशिश कर रहे हैं।

CRISPR–Cas9 तकनीक क्या होती है?

CRISPR–Cas9 एक आधुनिक जीन एडिटिंग तकनीक है। इसे आप ऐसे समझिए:

जैसे कैंची से हम कागज़ को काटते हैं, वैसे ही CRISPR तकनीक DNA को काट सकती है।

इसमें Cas9 नाम का एक प्रोटीन और एक गाइड RNA होता है।

गाइड RNA DNA के उस हिस्से को पहचानता है जिसे काटना है।

Cas9 प्रोटीन उस हिस्से को काट देता है।

इस तरह वैज्ञानिक DNA के गलत हिस्से को हटाकर सही जीन डाल सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने इस शोध में क्या नया किया?

जापान की शोध टीम (Hashizume और सहयोगी, 2025) ने CRISPR–Cas9 का उपयोग करके डाउन सिंड्रोम वाली कोशिकाओं से अतिरिक्त क्रोमोसोम 21 हटाने की कोशिश की।

उन्होंने CRISPR को इस तरह डिज़ाइन किया कि वह केवल तीसरी कॉपी को काटे, बाकी दो सामान्य कॉपियाँ बची रहें। इस प्रक्रिया को कहते हैं – Allele-Specific Cleavage।

"Trisomic Rescue" को आसान भाषा में कैसे समझें?

मान लीजिए आपके पास एक किताब है। हर अध्याय दो बार छपा है। लेकिन गलती से 21वां अध्याय तीन बार छप गया। किताब का संतुलन बिगड़ गया।

वैज्ञानिकों ने CRISPR तकनीक का इस्तेमाल करके उस अतिरिक्त अध्याय (क्रोमोसोम 21) को काट दिया। अब किताब फिर से सामान्य हो गई। यही है Trisomic Rescue।

क्या सच में अतिरिक्त क्रोमोसोम हटाया जा सकता है?

हाँ। प्रयोग में जब कोशिकाओं पर CRISPR तकनीक का इस्तेमाल किया गया, तो लगभग 13% कोशिकाओं में अतिरिक्त क्रोमोसोम गायब हो गया।

यानी कुछ कोशिकाएँ फिर से सामान्य बन गईं।

इस रिसर्च में कितनी सफलता मिली?

जब केवल 1-2 कट लगाए गए, तो सफलता बहुत कम रही।

लेकिन जब 10-13 कट लगाए गए, तो सफलता दर बढ़कर लगभग 13% हो गई।

यानी जितने ज्यादा कट लगाए गए, उतनी ज्यादा कोशिकाएँ सुधरीं।

कोशिकाओं में क्या बदलाव देखने को मिले?

जीन का एक्सप्रेशन (Expression) सामान्य स्तर पर आ गया।

कोशिकाएँ तेजी से बढ़ने लगीं।

उनमें तनाव से जुड़े हानिकारक अणु (Reactive Oxygen Species) कम हो गए।

क्या यह तरीका पूरी तरह सुरक्षित है?

अभी नहीं।

कभी-कभी CRISPR गलत जगह भी कट लगा देता है, जिसे ऑफ-टारगेट इफेक्ट कहते हैं।

यह कोशिकाओं के लिए खतरनाक हो सकता है।

इसलिए इसे अभी इंसानों पर लागू करना सुरक्षित नहीं है।

क्या इसे मरीजों पर भी आज़माया जा सकता है?

फिलहाल यह प्रयोग केवल कोशिकाओं (iPS cells और Fibroblasts) पर हुआ है।

सीधे इंसानों के शरीर में यह करना बहुत मुश्किल और जोखिम भरा है।

लेकिन भविष्य में यह तकनीक डाउन सिंड्रोम और अन्य ट्राइसॉमी बीमारियों का इलाज कर सकती है।

आम लोगों के लिए यह खोज क्यों जरूरी है?

क्योंकि अभी तक डाउन सिंड्रोम का कोई इलाज नहीं है।

अगर यह तकनीक सफल हो गई, तो लाखों बच्चों की जिंदगी बेहतर हो सकती है।

इस तकनीक से भविष्य में क्या-क्या फायदे हो सकते हैं?
  1. डाउन सिंड्रोम का इलाज।

  2. ट्राइसॉमी 13 (Patau syndrome) और ट्राइसॉमी 18 (Edwards syndrome) जैसी बीमारियों का इलाज।

  3. जेनेटिक बीमारियों के लिए नई जीन थेरेपी।

  4. रीजेनेरेटिव मेडिसिन यानी नई कोशिकाएँ बनाकर बीमारियों का इलाज।

इस रिसर्च में अभी क्या चुनौतियाँ हैं?

दक्षता (Efficiency) कम है।

ऑफ-टारगेट इफेक्ट का खतरा है।

सभी कोशिकाएँ ठीक नहीं होतीं, कुछ में बीमारी बनी रहती है।

नैतिक सवाल (Ethical Issues) भी हैं, खासकर भ्रूण पर प्रयोग के मामले में।

अगर इसे आसान भाषा में समझाएँ तो यह कैसा है?

यह ऐसे है जैसे आपके पास एक मोबाइल फोन है, जिसमें एक ऐप तीन बार इंस्टॉल हो गया है। अब फोन स्लो हो रहा है।

वैज्ञानिकों ने एक "स्मार्ट टूल" (CRISPR) से उस अतिरिक्त ऐप को डिलीट कर दिया। अब फोन सामान्य हो गया।

आने वाले समय में वैज्ञानिक क्या करेंगे?

कोशिकाओं पर और ज्यादा प्रयोग करेंगे।

जानवरों पर टेस्ट करेंगे।

सुरक्षा और दक्षता को बेहतर बनाएंगे।

फिर ही इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल की कोशिश होगी।

निष्कर्ष –

डाउन सिंड्रोम पर नई उम्मीद

यह रिसर्च साबित करती है कि विज्ञान अब इतनी प्रगति कर चुका है कि पूरे क्रोमोसोम को हटाना भी संभव हो सकता है।

भले ही यह अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन भविष्य में यह तकनीक लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन सकती है।

संदर्भ (References)

1. Hashizume, R., et al. (2025). Trisomic rescue via allele-specific multiple chromosome cleavage using CRISPR–Cas9 in trisomy 21 cells. PNAS Nexus.

2. NCBI – PMC Article on Trisomy 21 rescue (2025).

3. मुख्य शोधकर्ता: Ryohei Hashizume और टीम, Japan

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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