भारत–स्विट्ज़रलैंड फार्मा साझेदारी तेज़: दवा निर्माण, बायोटेक R&D और निवेश पर बड़े फैसले

भारत और स्विट्ज़रलैंड ने फार्मा तथा बायोटेक सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत वार्ता की। निवेश, R&D, क्लिनिकल ट्रायल और दवा निर्माण में बड़ा विस्तार संभव।

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Ashish Pradhan

12/1/20251 min read

India–Switzerland officials discussing major pharma and biotech collaboration in a formal meeting.
India–Switzerland officials discussing major pharma and biotech collaboration in a formal meeting.

भारत और स्विट्जरलैंड ने मजबूत किया फार्मा साझेदारी: दवा निर्माण, बायोटेक अनुसंधान और निवेश पर फोकस

नई दिल्ली, 27 नवंबर 2025 — भारत और स्विट्जरलैंड ने अपने फार्मास्युटिकल और बायोटेक्नोलॉजी सहयोग को मजबूत किया। उच्च-स्तरीय चर्चा में दवा निर्माण क्षमताओं का विस्तार, बायोटेक अनुसंधान को आगे बढ़ाने और भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में स्विस निवेश को आकर्षित करने पर ध्यान केंद्रित किया।

प्रमुख बैठक का विवरण

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने स्विट्जरलैंड की आर्थिक मामलों की राज्य सचिव Helene Budliger Artieda से मुलाकात की और फार्मा तथा बायोटेक क्षेत्रों में सहयोग के नए आयामों पर चर्चा की। यह बैठक स्विट्जरलैंड की फार्मास्युटिकल इनोवेशन विशेषज्ञता और भारत की विनिर्माण क्षमताओं का लाभ उठाने की रणनीतिक पहल का संकेत है।

रणनीतिक रूपरेखा

चर्चा भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) पर केंद्रित रही, जो स्विस फार्मास्युटिकल और बायोटेक कंपनियों को भारत के तेजी से विस्तारित हो रहे स्वास्थ्य बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है।

मंत्री Piyush Goyal जी ने भारत के प्रतिस्पर्धी लाभों को रेखांकित किया, जिनमें शामिल हैं:

  • 1.4 अरब से अधिक आबादी की सेवा करने वाला मजबूत स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा

  • लागत प्रभावी विनिर्माण क्षमताएं

  • नवीन दवाओं के लिए बढ़ता घरेलू बाजार

  • कुशल कार्यबल और अनुसंधान प्रतिभा

स्विस प्रतिनिधियों ने विनिर्माण से परे साझेदारी स्थापित करने में गहरी रुचि व्यक्त की, विशेष रूप से अनुसंधान और विकास (R&D), क्लिनिकल परीक्षण और बायोटेक नवाचार में।

नियामक सुधार और बाजार पहुंच

भारत सरकार ने विदेशी निवेश को सुविधाजनक बनाने और दवा अनुमोदन में तेजी लाने के लिए नियामक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने की प्रतिबद्धता जताई है। अधिकारियों ने नियामक ढांचे को अधिक पारदर्शी, कुशल और अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की योजनाओं पर जोर दिया।

सहयोग का उद्देश्य है:

  • नई दवाओं और बायोलॉजिक्स के लिए अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाना

  • गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र को बढ़ाना

  • बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करना

  • पूरे भारत में विश्व स्तरीय दवाओं की पहुंच का विस्तार करना

भारतीय स्वास्थ्य सेवा के लिए संभावित लाभ

किफायती विश्व स्तरीय दवाएं

इस साझेदारी से भारतीय रोगियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली बायोलॉजिक्स और नवीन उपचार अधिक किफायती होने की उम्मीद है। बायोलॉजिक दवाएं, जो आमतौर पर उत्पादन के लिए महंगी होती हैं, स्थानीय विनिर्माण के माध्यम से कम कीमतों पर सुलभ हो सकती हैं।

बढ़ी हुई R&D क्षमताएं

स्विस फार्मास्युटिकल विशेषज्ञता भारत के दवा विकास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर सकती है, विशेष रूप से बायोलॉजिक्स और नवीन दवाओं के लिए। यह सहयोग भारत को वैश्विक बाजार के लिए नए उपचार विकसित करने में सक्षम बना सकता है।

बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंच

बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार होने की उम्मीद है, जो भारत की विविध चिकित्सा आवश्यकताओं को संबोधित करेगा।

वैश्विक फार्मा हब की महत्वाकांक्षाएं

इस साझेदारी में सफलता भारत को केवल एक विनिर्माण केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि बायोटेक नवाचार और फार्मास्युटिकल अनुसंधान के लिए एक वैश्विक हब के रूप में स्थापित कर सकती है, जिससे रोजगार सृजन और तकनीकी उन्नति होगी।

प्रमुख चुनौतियों का समाधान

सहयोग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जिन्हें सावधानीपूर्वक नेविगेट करने की आवश्यकता है:

बौद्धिक संपदा संरक्षण: पेटेंट अधिकारों को किफायती जेनेरिक दवाओं की आवश्यकता के साथ संतुलित करना एक महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है। सरकार ने स्विस कंपनियों को मजबूत आईपी संरक्षण का आश्वासन दिया है जबकि सुलभ स्वास्थ्य सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी है।

नियामक ढांचा: गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करना और पारदर्शी अनुमोदन प्रक्रियाओं को बनाए रखना निरंतर विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए आवश्यक होगा।

स्थानीय उद्योग हित: विदेशी साझेदारी को प्रोत्साहित करते हुए घरेलू फार्मास्युटिकल कंपनियों की रक्षा और प्रोत्साहन के लिए सावधानीपूर्वक नीति डिजाइन की आवश्यकता है।

वितरण बुनियादी ढांचा: भारत के विशाल भूगोल में किफायती दवाओं को उपलब्ध कराने के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स और स्वास्थ्य सेवा वितरण नेटवर्क की आवश्यकता है।

सरकार की दृष्टि

मंत्री पीयूष गोयल जी ने बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति भारत के सम्मान और केवल जेनेरिक दवाओं के उत्पादन के बजाय नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने पेटेंट एवरग्रीनिंग या प्रौद्योगिकी चोरी के बारे में चिंताओं को खारिज करते हुए भारत को फार्मास्युटिकल नवाचार के लिए एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित किया।

गोयल ने इस बात पर जोर देते हुए कहा, कि "फार्मा उद्योग की सफलता नवाचार पर निर्भर करती है," भारत वैश्विक मानकों के साथ नई दवाओं और बायोटेक समाधानों को विकसित करने के लिए एक केंद्र बनाना चाहता है।

स्विस फार्मास्युटिकल प्रतिनिधियों ने भी यह भरोसा जताया कि वे इस साझेदारी में हिस्सेदारी लेने के इच्छुक हैं, बशर्ते नियामक व निवेश माहौल अनुकूल हो।

निष्कर्ष और आगे की दिशा: इस पहल का क्या मतलब हो सकता है

यह स्विट्ज़रलैंड–भारत फार्मा व बायोटेक सहयोग, यदि सफलतापूर्वक आगे बढ़ता है, तो भारत में स्वास्थ्य सेवा, दवाई उत्पादन, बायोटेक अनुसंधान और नवाचार के लिए एक नए युग की शुरुआत हो सकती है।

  • मरीजों को सस्ती, सुरक्षित और विश्व-स्तरीय दवाइयाँ मिलेंगी।

  • क्लिनिकल ट्रायल्स और बायोटेक विकास घरेलू स्तर पर होंगे — जिससे भारत को वैश्विक दवाई व नवाचार हब बनने में मदद मिलेगी।

  • दवाई उद्योग में निवेश, रोजगार, तकनीकी महारत व गुणवत्ता नियंत्रण बेहतर होंगे।

  • स्वास्थ्य-सेवा की पहुँच व गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा, जिससे मधुमेह, मोटापा व अन्य रोगों से लड़ने में मदद मिलेगी।

लेकिन यह तभी संभव है, जब यह सहयोग केवल कागज़ों तक सीमित न रहे, बल्कि नीति-निर्माण, विनियामक सुधार, निवेश, पारदर्शिता व भारतीय उद्योग के विकास के साथ आगे बढ़े। मरीजों और आम जनता के हितों की रक्षा, दवाई की किफायत, और स्वास्थ्य-सेवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना सरकार व कंपनियों दोनों का कर्तव्य होगा।

इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, विशेषकर ऐसे देश के साथ जो स्वास्थ्य व बायोटेक में अग्रणी हो — भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है। लेकिन हमें पूरी सतर्कता, जवाबदेही, और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ इस अवसर को आकार देना होगा, ताकि देशवासियों को असली लाभ मिले जैसे सस्ती दवाई, बेहतर स्वास्थ्य, और विश्व-स्तरीय चिकित्सा सुविधाएँ।

स्रोत: द इकोनॉमिक टाइम्स, एएनआई, बिजनेस स्टैंडर्ड, फाइनेंशियल एक्सप्रेस, भारत-ईएफटीए टीईपीए रिपोर्ट्स

भारत-ईएफटीए टीईपीए के बारे में: भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) सदस्य राज्यों—स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन के बीच व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता कई क्षेत्रों में व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स और बायोटेक को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया है।

showing India-Switzerland trade partnership in pharmaceuticals, icons of medicine bottles.
showing India-Switzerland trade partnership in pharmaceuticals, icons of medicine bottles.

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