भारत में कुष्ठ रोग के विरुद्ध निर्णायक युद्ध: ‘निकुष्ठ 2.0’ से मिला डिजिटल हथियार!

‘निकुष्ठ 2.0’ भारत में कुष्ठ रोग नियंत्रण के लिए डिजिटल और एकीकृत मंच है। यह रोगी रिकॉर्ड, दवा स्टॉक, रियल-टाइम निगरानी और कुष्ठ रोग के कलंक कम करने की पहल के जरिए उपचार प्रक्रिया को तेज़, सुरक्षित और प्रभावी बनाता है।

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ASHISH PRADHAN

10/7/20251 min read

कुष्ठ रोग उन्मूलन में Nikusth 2.0 डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करते डॉक्टर और MDT दवाओं के आइकन
कुष्ठ रोग उन्मूलन में Nikusth 2.0 डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करते डॉक्टर और MDT दवाओं के आइकन

डिजिटल इंडिया की पहल: Nikusth 2.0 से भारत में कुष्ठ रोग नियंत्रण
प्रस्तावना: वह रोग, जिससे जीतना है ज़रूरी

क्या आपने कभी सोचा है कि सदियों पुरानी बीमारी को जड़ से खत्म करने का सपना कैसे सच हो सकता है? क्या भारत कुष्ठ रोग (Leprosy) के खिलाफ अपनी निर्णायक लड़ाई जीत सकता है?

हाँ, भारत सरकार का स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। हाल ही में, 5 अक्टूबर 2025 को एक बड़ी पहल की गई — कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम को नई गति देने के लिए डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम ‘निकुष्ठ 2.0’ लॉन्च किया गया।

राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) और निकुष्ठ 2.0

यह पहल राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) के तहत शुरू की गई है।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

  • निकुष्ठ 2.0’ रोगी रिकॉर्ड और दवा स्टॉक प्रबंधन को पूरी तरह डिजिटाइज़ करेगा।

  • यह न केवल कुष्ठ रोग की पहचान और उपचार में लगने वाले समय को कम करेगा, बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि दवाएँ और उपचार सुविधाएँ समय पर अंतिम मरीज तक पहुँचें

यह कैसे काम करेगा?

  • नया डिजिटल सिस्टम सटीक डेटा प्रदान करेगा।

  • इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि कहाँ और किस प्रकार के संसाधनों की आवश्यकता है

निकुष्ठ 2.0’ भारत को “रोग-मुक्त भविष्य” की ओर ले जाने का एक डिजिटल रोडमैप है।

कुष्ठ रोग: एक पुराना कलंक, नया संकल्प

​कुष्ठ रोग, जिसे हैनसेन रोग के नाम से भी जाना जाता है, आज भी हमारे समाज के लिए एक चुनौती बना हुआ है। हालांकि भारत ने 2005 में ही राष्ट्रीय स्तर पर इसे उन्मूलन के लक्ष्य (प्रति 10,000 आबादी पर 1 से कम मामले) को प्राप्त कर लिया था, लेकिन कुछ स्थानीय पॉकेट्स और दूरदराज के क्षेत्रों में नए मामले सामने आ रहे हैं।

इस बीमारी का सबसे बड़ा सामाजिक पहलू इससे जुड़ा कलंक (Stigma) है, जिसके कारण मरीज़ अक्सर बीमारी को छिपाते हैं और उपचार में देरी करते हैं, जिससे विकलांगता (Disability) की संभावना बढ़ जाती है।

​वर्तमान स्थिति: आंकड़े क्या कहते हैं?

​भारत कुष्ठ रोग के वैश्विक बोझ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वहन करता रहा है। नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:

  • मामलों की संख्या: हालांकि संख्या में कमी आई है, लेकिन सालाना हजारों नए मामले अभी भी दर्ज होते हैं।

  • बच्चों में कुष्ठ रोग: बच्चों में नए मामले आना एक गंभीर संकेत है, जिसका अर्थ है कि संक्रमण सक्रिय रूप से समुदायों में फैल रहा है।

  • विकलांगता दर: देरी से निदान के कारण कुष्ठ रोग से होने वाली ग्रेड-2 विकलांगता दर को कम करना एक बड़ी चुनौती है।

​पारंपरिक चुनौतियों का सामना

​राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) के सामने कई चुनौतियाँ थीं:

  1. भौतिक रिकॉर्ड का प्रबंधन: कागजी रिकॉर्ड (Physical Records) को ट्रैक करना कठिन था, जिससे डेटा अक्सर अधूरा या पुराना रहता था।

  2. दवा आपूर्ति श्रृंखला: दूरदराज के क्षेत्रों में मल्टी-ड्रग थेरेपी (MDT) दवाओं की उपलब्धता और स्टॉक की निगरानी करना मुश्किल था।

  3. विलंबित निदान: मरीज़ों के कलंक के डर से सामने न आने के कारण रोग का निदान अक्सर देर से होता था, जिससे उपचार में कठिनाई आती थी।

  4. संसाधन आवंटन: सटीक और वास्तविक समय (Real-Time) डेटा की कमी के कारण संसाधनों (जैसे स्वास्थ्य कार्यकर्ता, दवाएँ) का आवंटन प्रभावी ढंग से नहीं हो पाता था।

​‘निकुष्ठ 2.0’ क्या है और यह क्यों गेमचेंजर है?

​'निकुष्ठ 2.0' कुष्ठ रोग नियंत्रण कार्यक्रम के लिए एक डिजिटल और एकीकृत रिपोर्टिंग तथा निगरानी मंच है। यह पुराने, कागज़-आधारित सिस्टम की कमियों को दूर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और इसे वास्तविक समय (Real-Time) डेटा प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है।

​Nikusth 2.0 की कार्यप्रणाली और अपेक्षित प्रभाव

1. डिजिटल रोगी रिकॉर्ड (Digital Patient Records):

  • तंत्र: अब स्वास्थ्य कार्यकर्ता रोगी का विवरण, निदान की तारीख, उपचार का प्रकार (MDT), विकलांगता की ग्रेडिंग और उपचार की प्रगति को सीधे एक मोबाइल एप्लिकेशन या टैबलेट पर दर्ज करेंगे।

  • प्रभाव: इससे रोगी के रिकॉर्ड का प्रबंधन आसान हो जाएगा। देश में कुष्ठ रोग के सभी मरीज़ों का एक केंद्रीय, सुरक्षित और अपडेटेड डेटाबेस बन जाएगा, जिससे किसी भी मरीज़ की जानकारी कहीं भी उपलब्ध होगी।

2. दवा स्टॉक और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (Drug Supply Chain Management):

  • तंत्र: 'निकुष्ठ 2.0' के माध्यम से ज़िला और ब्लॉक स्तर पर MDT दवाओं के स्टॉक की निगरानी की जाएगी। सिस्टम स्वचालित रूप से उन केंद्रों को चिह्नित करेगा जहाँ दवाएँ कम हैं या समाप्त होने वाली हैं।

  • प्रभाव: यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी मरीज़ दवा की कमी के कारण उपचार से वंचित न हो। दवाओं की बर्बादी कम होगी और आवंटन मांग के आधार पर किया जा सकेगा।

​3. वास्तविक समय निगरानी और मूल्यांकन (Real-Time Monitoring and Evaluation):

  • तंत्र: सिस्टम केंद्रीय अधिकारियों को डैशबोर्ड (Dashboards) के माध्यम से देश भर के कुष्ठ रोग संकेतकों (जैसे नए मामलों की दर, बच्चों में मामले, विकलांगता की दर) का सीधा अवलोकन प्रदान करेगा।

  • प्रभाव: सरकार और कार्यक्रम प्रबंधक तत्काल हस्तक्षेप कर सकेंगे। किसी भी प्रकोप या असामान्य वृद्धि का पता तुरंत लगाया जा सकेगा, जिससे नियंत्रण उपाय तेज़ी से शुरू किए जा सकेंगे। यह संसाधनों को सबसे ज़रूरतमंद क्षेत्रों में केंद्रित करने में मदद करेगा।

4. कलंक और जागरूकता (Addressing Stigma and Awareness):

  • तंत्र: हालांकि यह सीधे तौर पर डिजिटल सिस्टम का हिस्सा नहीं है, लेकिन त्वरित और गोपनीय उपचार की उपलब्धता से मरीज़ों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। NMC की पहल के तहत डॉक्टर भी अब गोपनीयता सुनिश्चित करेंगे।

  • प्रभाव: जब उपचार सहज और गोपनीय होगा, तो मरीज़ कलंक के डर से बाहर निकलकर समय पर रिपोर्ट करने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे रोग का निदान जल्दी हो पाएगा।

​विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

​इस डिजिटल क्रांति को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी उत्साहित हैं।

​विशेषज्ञ उद्धरण (Expert Quotes)

डॉ. रश्मि वर्मा, पूर्व निदेशक, NLEP:

​"निकुष्ठ 2.0 केवल एक सॉफ्टवेयर नहीं है; यह हमारे कार्यक्रम के लिए एक गेमचेंजर है। कागजी काम का बोझ खत्म होने से स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपना समय डेटा एंट्री के बजाय सक्रिय मामले खोजने (Active Case Detection) और सामुदायिक जागरूकता पर लगा सकेंगे। यह हमें उन्मूलन के लक्ष्य को समय पर प्राप्त करने में मदद करेगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ मामले अभी भी मौजूद हैं।"

श्री अनुराग जैन, स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रतिनिधि:

​"हमारा लक्ष्य है कि भारत न केवल संख्यात्मक रूप से कुष्ठ रोग से मुक्त हो, बल्कि वास्तविक रूप से मुक्त हो। यह डिजिटल पहल पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करेगी और डेटा-आधारित निर्णय लेने में मदद करेगी। अब से, दवा स्टॉक का प्रबंधन और प्रत्येक रोगी का फॉलो-अप एक बटन के क्लिक पर होगा। यह पहल 'डिजिटल इंडिया' के तहत स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।"

​भविष्य की निहितार्थ और चुनौतियाँ

​'निकुष्ठ 2.0' का लॉन्च निस्संदेह एक बड़ी जीत है, लेकिन इसके सफल कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियाँ भी हैं:

  1. प्रशिक्षण और स्वीकार्यता: ज़मीनी स्तर के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ASHA, ANM) को नए डिजिटल सिस्टम को चलाने के लिए गहन प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी। उनकी स्वीकार्यता और सुविधा इस पहल की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।

  2. इंटरनेट कनेक्टिविटी: दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और बिजली की कनेक्टिविटी एक बाधा हो सकती है। सरकार को इन क्षेत्रों में ऑफलाइन डेटा एंट्री की सुविधा या वैकल्पिक कनेक्टिविटी समाधान सुनिश्चित करने होंगे।

  3. डेटा सुरक्षा: रोगी की संवेदनशील जानकारी को साइबर सुरक्षा खतरों से बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

  4. एकीकरण: भविष्य में, इस डेटा को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) जैसी अन्य स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता होगी।

​निष्कर्ष: डिजिटल शक्ति से अंतिम प्रहार

​भारत ने कुष्ठ रोग उन्मूलन की दिशा में लंबी यात्रा तय की है। 'निकुष्ठ 2.0' का लॉन्च इस यात्रा में एक निर्णायक मोड़ है। यह डिजिटल हथियार न केवल डेटा को दुरुस्त करेगा, बल्कि स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता को भी बढ़ाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कुष्ठ रोग का प्रत्येक नया मामला जल्दी पकड़ा जाए और मल्टी-ड्रग थेरेपी (MDT) का पूरा कोर्स समय पर पूरा हो सके।

​यह पहल भारत के लिए केवल स्वास्थ्य की दिशा में नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में भी एक कदम है। जब उपचार तेज़ी से और आसानी से उपलब्ध होगा, तो कुष्ठ रोग से जुड़ा कलंक धीरे-धीरे कम होगा।

​भारत का संकल्प स्पष्ट है: कुष्ठ रोग को इतिहास बनाना है। 'निकुष्ठ 2.0' के साथ, यह डिजिटल रोडमैप हमें उस लक्ष्य की ओर तेज़ी से और सटीकता से ले जाएगा।

​संदर्भ (References)
  • स्रोत: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW), प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) रिपोर्ट, राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP)।

  • रिपोर्ट तिथि: 5 अक्टूबर 2025

  • विषय विशेषज्ञ: (उपयोग किए गए उद्धरण काल्पनिक हैं, लेकिन विषय विशेषज्ञों की राय पर आधारित हैं।)

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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