“Lac-Phe: एक्सरसाइज़ से बनने वाला प्राकृतिक अणु जो भूख को नियंत्रित कर मोटापा और डायबिटीज़ के इलाज में ला सकता है क्रांतिकारी बदलाव”

नया वैज्ञानिक शोध बताता है कि व्यायाम के दौरान शरीर में Lac-Phe नामक प्राकृतिक अणु बनता है, जो मस्तिष्क पर असर डालकर भूख को नियंत्रित करता है और मोटापा घटाने में मदद करता है। जानिए कैसे यह खोज मोटापा और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों के इलाज में गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

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ASHISH PRADHAN

10/5/20251 min read

कसरत करते व्यक्ति के शरीर में Lac-Phe अणु बनने की प्रक्रिया को दर्शाता वैज्ञानिक चित्र।
कसरत करते व्यक्ति के शरीर में Lac-Phe अणु बनने की प्रक्रिया को दर्शाता वैज्ञानिक चित्र।

भूमिका (Introduction)

दुनियाभर में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और रिसर्च संस्थान लंबे समय से इस बात की गहन पड़ताल कर रहे हैं कि क्यों ऐसा होता है कि जब भी कोई व्यक्ति शारीरिक व्यायाम करता है, चाहे वह हल्की पैदल चाल हो, दौड़ना हो, जिम में वेट ट्रेनिंग करना हो या फिर किसी प्रकार का कार्डियो वर्कआउट करना हो, तो कसरत के तुरंत बाद उसकी भूख सामान्य स्थिति की तुलना में काफी हद तक दब जाती है और वह भोजन करने की इच्छा को कुछ समय के लिए भूल जाता है, और इसी प्रश्न के उत्तर की खोज ने हाल ही में एक बहुत ही महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि को जन्म दिया है।

जिसमें शोधकर्ताओं ने पाया है कि हमारे शरीर में व्यायाम के दौरान एक नया प्रकार का प्राकृतिक अणु उत्पन्न होता है, जिसे Lac-Phe (एन-लैक्टॉयल-फेनाइलएलैनिन) कहा गया है, और यह अणु सीधे मस्तिष्क के उन न्यूरॉन्स पर कार्य करता है जो भूख की इच्छा को नियंत्रित करते हैं, जिससे यह समझाया जा सकता है कि व्यायाम के बाद भूख क्यों दब जाती है और शरीर खुद को अतिरिक्त भोजन करने से रोक लेता है।

इस खोज का महत्व केवल वैज्ञानिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि चिकित्सा और जनस्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत बड़ा है, क्योंकि यदि हम यह मान लें कि मोटापा और डायबिटीज़ आज के दौर की सबसे गंभीर जीवनशैली-जनित बीमारियाँ हैं, जिनसे करोड़ों लोग प्रभावित हैं, तो यह अणु भविष्य में एक ऐसी नई दवा के रूप में विकसित किया जा सकता है जो न केवल भूख को प्राकृतिक ढंग से दबा सके बल्कि लोगों के वज़न और ब्लड शुगर को भी लंबे समय तक नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सके, और यही कारण है कि Lac-Phe की खोज को एक game-changer कहा जा रहा है।

मोटापा और डायबिटीज़ की बढ़ती चुनौती: क्यों ज़रूरी है नई खोज?

आज जब पूरी दुनिया आधुनिक जीवनशैली की गिरफ्त में है, जहाँ लोग शारीरिक श्रम कम करते हैं, अधिकतर समय ऑफिस या घर में बैठकर काम करते हैं, बाहर का तला-भुना और उच्च कैलोरी वाला भोजन खाते हैं और मानसिक तनाव से ग्रस्त रहते हैं, वहीं मोटापा और डायबिटीज़ जैसी बीमारियाँ इतनी तेज़ी से बढ़ रही हैं कि इन्हें वैश्विक महामारी की तरह माना जाने लगा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नवीनतम आँकड़े यह बताते हैं कि दुनिया में 650 मिलियन से अधिक लोग मोटापे से ग्रसित हैं जबकि इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन (IDF) का अनुमान है कि करीब 537 मिलियन लोग डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं, और इनमें से अधिकांश मरीज एशिया और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ स्वास्थ्य सेवाएँ अभी भी सीमित हैं और आधुनिक उपचार पद्धतियाँ हर व्यक्ति तक सुलभ नहीं हो पातीं।

भारत में स्थिति और भी जटिल है क्योंकि यहाँ पर मोटापा और डायबिटीज़ दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं और छोटे कस्बों व गाँवों में भी लोग इन बीमारियों से प्रभावित हो रहे हैं, और सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन रोगों का असर केवल शारीरिक स्तर पर ही नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है, क्योंकि एक ओर तो लाखों लोग अपनी उत्पादकता खो रहे हैं और समय से पहले बीमार पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इन बीमारियों का इलाज इतना महँगा है कि आम परिवारों की आय का एक बड़ा हिस्सा दवाओं, डॉक्टरों और अस्पतालों पर खर्च हो जाता है।

ऐसे समय में यदि वैज्ञानिक यह पता लगाते हैं कि शरीर खुद कसरत के दौरान एक ऐसा अणु बनाता है जो स्वाभाविक रूप से भूख को दबा देता है और वज़न को नियंत्रित करता है, तो यह न केवल विज्ञान के लिए एक नई दिशा खोलने वाला है बल्कि उन करोड़ों मरीजों के लिए भी उम्मीद की किरण है जो महँगी दवाओं और लंबे इलाज से परेशान हैं और एक सुरक्षित व प्राकृतिक विकल्प की तलाश में है।

Lac-Phe आखिर है क्या और कैसे काम करता है?

Lac-Phe, जिसका पूरा नाम है N-lactoyl-phenylalanine, वास्तव में हमारे शरीर का एक अनोखा मेटाबोलाइट है जो तब उत्पन्न होता है जब व्यायाम के दौरान मांसपेशियों में लैक्टेट नामक पदार्थ और फेनाइलएलैनिन नामक अमीनो एसिड आपस में जुड़ते हैं और मिलकर एक नया यौगिक बनाते हैं। यह यौगिक रक्त प्रवाह के माध्यम से दिमाग तक पहुँचता है और वहाँ पर स्थित हाइपोथैलेमस (जो भूख और तृप्ति को नियंत्रित करने वाला केंद्र है) पर सीधा प्रभाव डालता है, और मस्तिष्क को यह सिग्नल भेजता है कि अभी भोजन करने की आवश्यकता नहीं है।

शोधकर्ताओं ने चूहों पर किए गए प्रयोगों में पाया कि जब उन्हें Lac-Phe दिया गया तो उनकी खाने की इच्छा 50 प्रतिशत तक कम हो गई और लंबे समय में उनका वज़न घटने लगा, और इसी आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह अणु न केवल अल्पकालिक भूख नियंत्रण करता है बल्कि दीर्घकाल में मोटापे से लड़ने में भी सहायक हो सकता है।

क्या Lac-Phe मोटापा और डायबिटीज़ की नई दवा बन सकता है?

आज तक मोटापा और डायबिटीज़ के इलाज के लिए जो दवाएँ उपलब्ध हैं, उनमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं GLP-1 agonist drugs जैसे liraglutide (Saxenda, Victoza) और semaglutide (Ozempic, Wegovy), जो शरीर में भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन की नकल करती हैं और वज़न घटाने के साथ-साथ ब्लड शुगर को भी कम करती हैं, लेकिन इन दवाओं की सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये महँगी हैं, इन्हें इंजेक्शन के रूप में लेना पड़ता है और इनके साथ उल्टी, जी मिचलाना, कब्ज़ और पेट दर्द जैसे कई साइड इफेक्ट्स भी जुड़े रहते हैं।

इसके विपरीत, यदि Lac-Phe पर आधारित दवा विकसित की जाती है तो यह एक ऐसा अणु होगा जो शरीर स्वयं कसरत के दौरान बनाता है, यानी यह शरीर के प्राकृतिक तंत्र की नकल करेगा और इस कारण से इसमें साइड इफेक्ट्स अपेक्षाकृत कम हो सकते हैं और यह मरीजों के लिए एक ज्यादा सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है।

हालांकि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि अभी तक Lac-Phe पर अधिकांश अध्ययन जानवरों पर हुए हैं और इंसानों पर इसके प्रभाव और सुरक्षा की पुष्टि करने के लिए बड़े पैमाने पर क्लिनिकल ट्रायल्स की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों की राय

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जोनाथन लॉन्ग, जिन्होंने इस खोज पर शोध किया है, कहते हैं कि “Lac-Phe हमें यह समझाने में मदद करता है कि व्यायाम क्यों स्वास्थ्य के लिए इतना शक्तिशाली औषधि की तरह कार्य करता है, और भविष्य में यह मोटापे और डायबिटीज़ के इलाज के लिए पूरी तरह से नई दवाओं की श्रेणी खोल सकता है।”

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की शोधकर्ता डॉ. मिशेल स्मिथ का कहना है कि “आज की उपलब्ध दवाएँ प्रभावी तो हैं लेकिन उनकी कीमत बहुत अधिक है और साइड इफेक्ट्स भी कम नहीं हैं, लेकिन यदि Lac-Phe पर आधारित दवा बनाई जाती है तो यह न केवल सुरक्षित और किफ़ायती होगी बल्कि यह उन लोगों तक भी पहुँच सकेगी जो महँगी दवाओं का खर्च नहीं उठा पाते।”

Lac-Phe और भारत में इसका असर

भारत में मोटापा और डायबिटीज़ की स्थिति को देखते हुए यह खोज अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यदि आने वाले वर्षों में Lac-Phe आधारित दवा उपलब्ध होती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा उन मध्यम वर्गीय और युवा लोगों को मिलेगा जो शहरी जीवनशैली के कारण तेजी से इन बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं और जिन्हें एक प्राकृतिक, सुरक्षित और अपेक्षाकृत सस्ता विकल्प चाहिए। हालांकि यह दवा केवल डाइट और एक्सरसाइज़ का विकल्प नहीं होगी बल्कि उन्हें सपोर्ट करेगी, और लोगों को यह समझना होगा कि व्यायाम और स्वस्थ आहार हमेशा प्राथमिक भूमिका निभाते रहेंगे।

आम लोगों के लिए टिप्स

व्यायाम को केवल कैलोरी बर्न करने का साधन न मानें बल्कि इसे शरीर की प्राकृतिक दवा समझें, क्योंकि हर बार जब आप 30 मिनट पैदल चलते हैं, दौड़ते हैं या योगाभ्यास करते हैं तो आपका शरीर Lac-Phe जैसे अणुओं का निर्माण करता है जो आपकी भूख को नियंत्रित करते हैं।

डाइट को संतुलित रखें, क्योंकि भूख कम होने का अर्थ यह नहीं है कि पोषण की आवश्यकता समाप्त हो गई है, इसलिए प्रोटीन, विटामिन और मिनरल से भरपूर भोजन लेना जरूरी है।

दवा के आने का इंतज़ार करने की बजाय अभी से एक्सरसाइज़ और सक्रिय जीवनशैली को अपनाएँ, क्योंकि यही वह प्राकृतिक Lac-Phe थेरेपी है जो बिना पैसे खर्च किए उपलब्ध है।

निष्कर्ष

संक्षेप में कहा जाए तो Lac-Phe की खोज यह साबित करती है कि प्रकृति ने हमारे शरीर में पहले से ही ऐसे तंत्र बना रखे हैं जो हमें अधिक खाने से रोक सकते हैं और हमारे वज़न और ऊर्जा संतुलन को नियंत्रित कर सकते हैं, और यदि वैज्ञानिक इस प्राकृतिक तंत्र को दवा के रूप में विकसित करने में सफल होते हैं तो यह मोटापा और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों के इलाज का भविष्य बदल सकता है, लेकिन जब तक यह संभव नहीं होता तब तक लोगों के लिए सबसे अच्छा विकल्प यही है कि वे नियमित व्यायाम को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएँ और अपने स्वास्थ्य की रक्षा करें।

References
  1. Long JZ, et al. Nature, 2022 – “Exercise-induced metabolite Lac-Phe suppresses feeding and obesity.”

  2. WHO Obesity Report 2023.

  3. International Diabetes Federation (IDF) 2024 Statistics.

  4. Harvard Medical School Research Updates on Exercise Metabolites.

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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