जानलेवा कफ सिरप पर बड़ा एक्शन: मध्य प्रदेश में DEG की खतरनाक मात्रा वाले दो और सिरप प्रतिबंधित, क्या है बच्चों की मौत का सच?

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सिरप से हुई बच्चों की मौत के बाद, राज्य MP FDA ने Diethylene Glycol DEG की खतरनाक मात्रा पाए जाने पर दो और सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह संकट न केवल दवा प्रतिबंध की खबर है, बल्कि यह DEG जैसे ज़हरीले रसायन के दवा आपूर्ति श्रृंखला में आने के कारणों और देश की स्वास्थ्य सुरक्षा तथा दवा नियामक प्रणाली की गहन समीक्षा की आवश्यकता को भी उजागर करता है।

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Ashish Pradhan

10/8/20251 min read

Toxic cough syrups banned by MP FDA due to dangerous DEG levels.
Toxic cough syrups banned by MP FDA due to dangerous DEG levels.

परिचय : FDA की बड़ी कार्रवाई और DEG का घातक जाल
क्या हुआ?

मध्य प्रदेश खाद्य एवं औषधि प्रशासन MP FDA ने एक चौंकाने वाली जांच के बाद दो और कफ सिरप के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। ये दोनों दवाएँ हैं – 'ReLife' (रिलाइफ) और 'Respifresh TR' (रेस्पिफ्रेश टीआर)।

क्यों हुआ?

इन कफ सिरपों के नमूनों की सरकारी प्रयोगशालाओं में हुई गहन रासायनिक जाँच में यह पाया गया है कि इनमें औद्योगिक विषैला रसायन डायथिलीन ग्लाइकॉल DEGकी मात्रा निर्धारित सुरक्षित सीमा से बहुत अधिक है। अधिकारियों के अनुसार, जहाँ दवा में DEG की अधिकतम अनुमेय सीमा केवल 0.1 प्रतिशत होनी चाहिए, वहीं 'ReLife' में यह 0.616 प्रतिशत और 'Respifresh TR' में 1.342 प्रतिशत तक पाई गई है—जो जानलेवा है।

कहाँ और कब?

यह नवीनतम प्रतिबंध राजधानी भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश राज्य में तुरंत प्रभाव से लागू किया गया है, और यह कार्रवाई छिंदवाड़ा जिले में पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान हुई बच्चों की संदिग्ध मौतों की चल रही व्यापक जांच का ही परिणाम है। यह मामला देश भर की दवा नियामक प्रणालियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कौन जिम्मेदार?

इस पूरे मामले की जड़ें उन कंपनियों तक पहुँचती हैं जिन्होंने इन सिरपों का निर्माण किया है, साथ ही उन दवा निरीक्षकों और MPFDA अधिकारियों पर भी गाज गिरी है जिनकी ड्यूटी में लापरवाही पाई गई है। प्रारंभिक जांच में, कुछ अधिकारियों को निलंबित भी किया गया है।

कैसे पता चला?

बच्चों में किडनी फेलियर के असामान्य मामलों की एक श्रृंखला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और MP FDA सक्रिय हुए। संदेह होने पर कफ सिरपों के नमूने एकत्र किए गए और उनकी जाँच तमिलनाडु जैसे अन्य राज्यों की उन्नत प्रयोगशालाओं में भी कराई गई, जहाँ DEGकी घातक उपस्थिति की पुष्टि हुई।

आगे क्या?

इस प्रतिबंध के बाद, MP FDA ने संबंधित कफ सिरप के बचे हुए स्टॉक को तत्काल जब्त करने और बाजार से हटाने का निर्देश दिया है। यह DEG संकट की एक और परत को उजागर करता है, क्योंकि इससे पहले भी 'Coldrif' और 'Nextro-DS' नामक सिरपों को इसी कारण से प्रतिबंधित किया जा चुका है।

मुख्य आलेख : ज़हरीले 'मीठे' सिरप का काला सच

DEG क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों है?

डायथिलीन ग्लाइकॉल DEG एक रंगहीन, गंधहीन, मीठा स्वाद वाला औद्योगिक विलायक (industrial solvent) है। इसका उपयोग आमतौर पर एंटी-फ्रीज, ब्रेक फ्लुइड, पेंट, प्रिंटिंग इंक और कुछ प्लास्टिक बनाने में होता है। यह किसी भी मानव दवा के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं है, और इसका सेवन, विशेष रूप से बच्चों के लिए, अत्यंत विषैला होता है।

घातक क्रियाविधि (Mechanism of Toxicity): जब कोई व्यक्ति DEG का सेवन करता है, तो यह शरीर में प्रवेश करके लीवर में मेटाबोलाइज़ होता है और दो अत्यधिक विषैले उप-उत्पाद metabolites पैदा करता है: 2-हाइड्रॉक्सीएथॉक्सीएसिटिक एसिड और ऑक्जेलिक एसिड। ये उप-उत्पाद सीधे गुर्दे (किडनी) की नलिकाओं renal tubules को क्षति पहुँचाते हैं, जिससे वे काम करना बंद कर देते हैं। इसे तीव्र गुर्दे की चोट Acute Kidney Injury या AKI कहा जाता है।

डॉक्टर्स का मत: भोपाल के एक वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया, DEG की विषाक्तता के लक्षण सर्दी-खाँसी के सामान्य लक्षणों से मिलते-जुलते हैं, जैसे पेट दर्द, उल्टी, और डायरिया। लेकिन कुछ ही दिनों में, यह बच्चों में गंभीर गुर्दे की विफलता Kidney Failure तंत्रिका तंत्र को क्षति और अंततः मृत्यु का कारण बन जाता है। इस तरह के मामलों में मृत्यु दर 70 प्रतिशत से अधिक हो सकती है।"

कफ सिरप में DEG कैसे पहुँचता है? एक बड़ी लापरवाही का संकेत

दवा निर्माण प्रक्रिया में DEG का प्रवेश अकस्मात नहीं होता, बल्कि यह एक गंभीर अनैतिक और अवैध प्रथा का परिणाम है। कफ सिरप जैसे तरल फ़ार्मुलों में प्रोपीलीन ग्लाइकॉल Propylene Glycol या PG नामक एक फार्मास्यूटिकल-ग्रेड विलायक का उपयोग किया जाता है, जो सुरक्षित होता है।

लागत कटौती की लालसा: DEG रासायनिक रूप से PG के समान दिखता है, लेकिन यह 20 से 30 गुना सस्ता होता है। फार्मा कंपनियों द्वारा लागत में कटौती करने के लिए, कुछ unscrupulous (अनैतिक) आपूर्तिकर्ता suppliers जानबूझकर सस्ते और जहरीले DEG को सुरक्षित PG बताकर आपूर्ति कर देते हैं। यह 'भेड़ की खाल में भेड़िया' वाली स्थिति है।

जवाबदेही का अभाव: इस घटना ने भारतीय दवा नियामक प्रणाली की परीक्षण और निरीक्षण प्रक्रियाओं में बड़ी खामियों को उजागर किया है। एक प्रतिष्ठित दवा विश्लेषक Drug Analyst, प्रोफेसर अनुपमा जैन, कहती हैं, "यह सिर्फ निर्माता की गलती नहीं है, बल्कि यह MP FDAकी असफलता है। प्रत्येक बैच के raw material की कठोर जाँच होनी चाहिए। यह त्रासदी स्पष्ट संकेत देती है कि हमारी नियामक एजेंसियाँ, जिन्हें 'drug safety' सुनिश्चित करनी थी, अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा पाईं। विशेष रूप से cough syrup जैसे OTC (Over-The-Counter) अर्थात बिना डॉक्टर के पर्चे के मिलने वाले उत्पादों में ऐसी लापरवाही अक्षम्य है।"

मध्य प्रदेश संकट की क्रोनोलॉजी: पिछली कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

मध्य प्रदेश में यह संकट तब शुरू हुआ जब छिंदवाड़ा में एक ही पैटर्न पर कई बच्चों की मौतें हुईं, जिनमें सभी ने एक ही या मिलते-जुलते कफ सिरप का सेवन किया था।

* पहली चेतावनी (Coldrif): सबसे पहले 'Coldrif Syrup' को निशाने पर लिया गया। तमिलनाडु की एक प्रयोगशाला में इसकी जाँच में DEGकी अत्यधिक मात्रा पाई गई। इसके बाद {MP} सरकार ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया।

* दूसरी जाँच (Nextro-DS): Nextro-DSसिरप को भी जांच के दायरे में लिया गया और शुरुआती अनिश्चितता के बाद, एहतियात के तौर पर इसे भी प्रतिबंधित किया गया।

* नवीनतम प्रतिबंध (ReLife और Respifresh TR): अब MP FDA की व्यापक जाँच में ReLife और Respifresh TR में भी DEG का जानलेवा स्तर पाया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या किसी एक उत्पाद तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की फार्मा supply chain में एक गंभीर दरार है।

इस मामले में मुख्यमंत्री ने सख्त कार्रवाई का निर्देश देते हुए कई ड्रग इंस्पेक्टरों को निलंबित और FDA के उप निदेशक का स्थानांतरण कर दिया है। यह दर्शाता है कि सरकार इस मामले की गंभीरता को स्वीकार कर रही है और 'strict action' लेने के लिए बाध्य है।

अगर आप बच्चों की मौतों के बाद खांसी सिरप पर सरकार के एक्‍शन के बारे में विस्तार से पढ़ना चाहते हैं, तो यह लेख पढ़ें

दवा कंपनियों पर दबाव और भविष्य के निहितार्थ

यह संकट न केवल जानलेवा है, बल्कि इसने भारतीय फार्मा उद्योग की वैश्विक प्रतिष्ठा को भी गंभीर रूप से क्षति पहुँचाई है। भारत को 'दुनिया की फार्मेसी' कहा जाता है, और जब देश के भीतर ही 'toxic drugs' की समस्या सामने आती है, तो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और विश्वसनीयता खतरे में पड़ जाती है।

कंपनी का पक्ष: हालाँकि, अभी तक संबंधित कंपनियों (जिनके उत्पाद 'ReLife' और 'Respifresh TR' हैं) का विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सामान्य तौर पर फार्मा कंपनियाँ raw material की आपूर्ति करने वाले वेंडरों को दोषी ठहराती हैं। फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "कंपनियाँ PG जैसे excipient के लिए हमेशा pharmacopoeial grade सामग्री ही खरीदती हैं। यह वेंडर-स्तर पर जानबूझकर की गई मिलावट का मामला हो सकता है। हमारी संस्था सभी सदस्यों को 'supply chain integrity' और raw material testingको बढ़ाने के लिए एडवाइजरी जारी कर रही है।"

अस्पतालों पर बोझ: इस त्रासदी के कारण कई बच्चों को गंभीर हालत में नागपुर और अन्य शहरों के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। AKI से पीड़ित बच्चों का उपचार एक लंबी और महँगी प्रक्रिया है जिसमें डायलिसिस और गहन चिकित्सा देखभाल ICU care शामिल है। राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा देने और उपचार का पूरा खर्च वहन करने की घोषणा की है, लेकिन एक बच्चे की जान की कीमत किसी भी आर्थिक सहायता से नहीं आँकी जा सकती।

समापन (Conclusion): आगे की राह और Drug Safety का भविष्य

मध्य प्रदेश में DEG युक्त कफ सिरप पर लगा यह प्रतिबंध एक अस्थायी समाधान मात्र है। इस गंभीर समस्या से स्थायी रूप से निपटने के लिए भारत को अपनी 'national drug safety review' प्रणाली में मूलभूत परिवर्तन लाने होंगे।

आवश्यक कदम और विशेषज्ञों की सलाह:

* कठोर परीक्षण (Mandatory Testing): DEG और इथाइलीन ग्लाइकॉल EG जैसे संभावित विषाक्त पदार्थों के लिए raw material और अंतिम उत्पाद (finished product) की कठोर, अनिवार्य और नियमित परीक्षण प्रक्रिया तुरंत लागू की जानी चाहिए।

* सरल भाषा में चेतावनी: बाल रोग विशेषज्ञों को यह सलाह दी गई है कि वे दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कफ और कोल्ड की दवाइयाँ देने से बचें। पेरेंट्स को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे बच्चों को 'cough syrup' देने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें, न कि स्वयं OTC दवा खरीदकर इलाज करें।

* दंड का प्रावधान: DEG जैसी जानलेवा मिलावट के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास या गैर इरादतन हत्या के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। मौजूदा 'Drugs and Cosmetics Act' के तहत दंड को अधिक कठोर बनाने की आवश्यकता है।

सार: यह त्रासदी एक वेक-अप कॉल है। हमें याद रखना होगा कि दवाइयाँ जीवन बचाने के लिए होती हैं, न कि लेने के लिए। मध्य प्रदेश MP FDA का यह कदम सही दिशा में है, लेकिन जब तक देश की पूरी pharma manufacturing और regulatory compliance प्रणाली को दुरुस्त नहीं किया जाता, तब तक 'मीठे ज़हर' का खतरा मंडराता रहेगा। सरकार, नियामक संस्थाओं और दवा निर्माताओं को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि देश के प्रत्येक नागरिक को केवल सुरक्षित और प्रभावी दवाएँ ही मिलें।

संदर्भ (References)
  • ANI (Asian News International) - मध्य प्रदेश FDA द्वारा DEG युक्त सिरप पर प्रतिबंध संबंधी रिपोर्ट्स।

  • Economictimes और The Hindu द्वारा Chhindwara बाल मृत्यु मामलों पर प्रकाशित लेख।

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO और CDSCO की DEG विषाक्तता पर गाइडलाइन्स।

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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