यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) Day 2025: क्या भारत 2030 तक सभी को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज दे पाएगा?

यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) Day 2025 पर भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने, आयुष्मान भारत के विस्तार, डिजिटल हेल्थ सिस्टम और 2030 तक सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा हासिल करने को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ हुई। जानें—भारत इस लक्ष्य के कितने करीब है और किन हिस्सों में बड़ी सुधार की जरूरत अभी भी बाकी है।

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ASHISH PRADHAN

12/12/20251 min read

UHC Day 2025 thumbnail showing India health map, stethoscope and blue medical gradient background.
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यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज डे 2025: प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और आयुष्मान भारत के विस्तार पर राष्ट्रीय चर्चाएँ तेज

परिचय: भारत आज क्यों मना रहा है यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज डे और इसका महत्व क्या है?

भारत 12 दिसंबर 2025 को यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) डे मना रहा है—एक ऐसा वैश्विक स्वास्थ्य दिवस जिसे विश्व भर में स्वास्थ्य सेवाओं को सभी के लिए उपलब्ध, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बनाए जाने के संकल्प के रूप में देखा जाता है। इस अवसर पर देशभर में नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, डॉक्टरों और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों ने इस बात पर व्यापक चर्चा की कि भारत को 2030 तक UHC के लक्ष्य को कैसे हासिल करना है, किस प्रकार प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना होगा, आयुष्मान भारत जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा कार्यक्रमों का विस्तार क्यों अनिवार्य है, और कैसे लोगों के लिए स्वास्थ्य खर्च का वित्तीय बोझ कम किया जा सकता है।

इस पूरे विमर्श का केंद्र यह रहा कि भारत की विशाल आबादी के लिए एक ऐसा स्वास्थ्य तंत्र कैसे विकसित किया जाए जिसमें बीमारी किसी भी परिवार को आर्थिक रूप से कमजोर न करे, और स्वास्थ्य सेवाएँ न केवल शहरों बल्कि दूरदराज़ के ग्रामीण इलाकों में भी सुलभ हों।

भारत में UHC का महत्व: यह लक्ष्य इतना जरूरी क्यों है?

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में UHC केवल एक स्वास्थ्य नीतिगत अवधारणा नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और मानव विकास का आधार है। भारत में अभी भी बड़ी संख्या में लोग उच्च निजी खर्च (Out-of-pocket expenditure) के कारण आर्थिक दबाव का सामना करते हैं। सरकार द्वारा 2030 तक सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने का लक्ष्य इसी असमानता को कम करने का प्रयास है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज किसी भी देश की स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती का सबसे बड़ा पैमाना है। भारत में पिछले वर्षों में इस दिशा में कई सकारात्मक कदम उठाए गए, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी भी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, स्वास्थ्य अवसंरचना, मानव संसाधन, और डिजिटल हेल्थ सिस्टम को और मजबूती देने की जरूरत है।

प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की जरूरत क्यों बढ़ गई है?

भारत की स्वास्थ्य नीतियों में सबसे बड़ी चुनौती प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता को बढ़ाना है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs), हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (HWCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHCs) मजबूत होंगे, तो देश में गंभीर और जटिल बीमारियों का बोझ काफी कम हो सकता है।

प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने की मुख्य जरूरतें:

  • ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी

  • डायग्नोस्टिक सुविधाओं का अभाव

  • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में असमानता

  • गैर-संचारी रोगों (NCDs) की बढ़ती चुनौतियाँ

  • मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित उपलब्धता

स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ डॉ. विनीत उपाध्याय के अनुसार,
“भारत में UHC को सफल बनाने का पहला कदम यही है कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ इतनी सक्षम हों कि लोग अपने ही गाँव या कस्बे में गुणवत्तापूर्ण उपचार प्राप्त कर सकें।”

आयुष्मान भारत mission कितना प्रभावी रहा और भविष्य की दिशा क्या है?

आयुष्मान भारत–प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य सुरक्षा कार्यक्रम माना जाता है, जो गरीब और वंचित परिवारों को ₹5 लाख तक की कैशलेस इलाज सुविधा प्रदान करता है।

UHC चर्चाओं में आयुष्मान भारत का विस्तार क्यों केंद्र में रहा?

  • अभी भी लाखों योग्य परिवार योजना में शामिल नहीं हो पाए हैं।

  • कई राज्यों में निजी अस्पतालों की भागीदारी सीमित है।

  • स्वास्थ्य दावों (claims) के सेटलमेंट में समय लगना मरीजों के भरोसे को प्रभावित करता है।

  • कुछ क्षेत्रों में कार्डधारकों को उपचार पाने में कठिनाइयाँ की रिपोर्टें मिलती रही हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज चर्चा में कहा:
“2030 तक UHC लक्ष्य प्राप्त करने के लिए यह जरूरी है कि आयुष्मान भारत को अधिक व्यापक, सरल और पूरी तरह डिजिटल बनाया जाए, और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसका विस्तार तेज़ गति से हो।”

वित्तीय सुरक्षा क्यों UHC की रीढ़ है?

स्वास्थ्य खर्च के कारण आर्थिक बोझ भारत में अभी भी एक बड़ी समस्या है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार बीमारी के कारण कर्ज में डूब जाते हैं।

UHC के तहत वित्तीय सुरक्षा के लिए संभावित उपाय:

  • सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को सार्वभौमिक बनाना

  • आवश्यक दवाओं और डायग्नोस्टिक सेवाओं को कम कीमत पर उपलब्ध कराना

  • हेल्थ इंश्योरेंस का निजी क्षेत्र और सरकार दोनों से संयुक्त विस्तार

  • डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड (ABDM) के माध्यम से खर्च पर पारदर्शिता बढ़ाना

भारत का UHC रोडमैप: विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

आज की चर्चाओं में कई विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि UHC केवल वित्तीय सुरक्षा का विषय नहीं बल्कि मानव संसाधन, इन्वेस्टमेंट, और समग्र स्वास्थ्य ढांचे के सुधार का बड़ा एजेंडा है।

प्रमुख विशेषज्ञ सुझाव:

  • हेल्थ बजट को GDP के कम से कम 2.5% तक ले जाना

  • ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भर्ती बढ़ाना

  • डिजिटल हेल्थ मिशन को तेज़ गति से लागू करना

  • क्रोनिक बीमारियों के लिए दीर्घकालिक उपचार योजनाएँ बनाना

  • मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे का हिस्सा बनाना

स्वास्थ्य अर्थशास्त्री रश्मि कटारिया के अनुसार,
“UHC की सफलता का मतलब केवल बीमा योजनाएँ नहीं, बल्कि एक ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था है जो रोकथाम, इलाज और रिकवरी तीनों में समान रूप से मजबूत हो।”

UHC Day 2025 पर रखे गए नए नीति-एजेंडा

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं और डायग्नोस्टिक की उपलब्धता बढ़ाना

  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को ग्रामीण क्षेत्रों तक तेजी से फैलाना

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों (NHP) को एकीकृत करना

  • स्कूल और समुदाय-आधारित स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों को पुनर्जीवित करना

  • क्लीनिकल गवर्नेंस और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करना

निष्कर्ष: 2030 का लक्ष्य—क्या भारत इसके लिए तैयार है?

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन 2030 तक पूर्ण UHC प्राप्त करना अभी भी एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य है। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना, आयुष्मान भारत का विस्तार, वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना और डिजिटल हेल्थ ढांचे को मजबूत बनाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सरकार, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज मिलकर एक मजबूत स्वास्थ्य इकोसिस्टम खड़ा करें, तो भारत न केवल 2030 के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है बल्कि दुनिया के लिए एक मॉडल भी बन सकता है।

References

  • World Health Organization (WHO) – Universal Health Coverage Information

  • Ministry of Health & Family Welfare, Government of India

  • National Health Authority (NHA) – Ayushman Bharat & ABDM Updates

  • UN Universal Health Coverage Day 2025 Theme and Global Policy Notes

  • Public Health Experts’ Commentary (MoHFW panel discussions, December 2025

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