WHO की नई गाइडलाइन: रोज़ाना कुल ऊर्जा का 30% से कम वसा का सेवन करें — असंतृप्त वसा को अपनाएं, संतृप्त और ट्रांस वसा से दूरी बनाएं
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने नई गाइडलाइन में कहा है कि कुल दैनिक ऊर्जा का 30% से कम वसा लें और ट्रांस वसा से बचें। असंतृप्त वसा जैसे मूंगफली, सरसों और जैतून के तेल आदि को अपनाने से मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग के खतरे को घटाया जा सकता है।
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प्रस्तावना (Introduction):
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण पोषण संबंधी सिफारिश दोहराई है, जिसमें कहा गया है कि एक व्यक्ति की कुल दैनिक ऊर्जा खपत में वसा (Fats) की मात्रा 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसका उद्देश्य है—अस्वस्थ वजन बढ़ने, मोटापा (Obesity) और हृदय से जुड़ी गैर-संचारी बीमारियों (Non-Communicable Diseases - NCDs) जैसे डायबिटीज, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर को रोकना।
इन सिफारिशों में विशेष रूप से यह भी कहा गया है कि संतृप्त वसा (Saturated fats) को कुल ऊर्जा सेवन का 10% से कम, और ट्रांस वसा (Trans fats) को 1% से कम रखना चाहिए। इसके स्थान पर असंतृप्त वसा (Unsaturated fats) — जैसे कि मूंगफली, सूरजमुखी, सरसों और जैतून के तेलों में पाई जाने वाली वसा — का सेवन अधिक लाभकारी है।
यह दिशा-निर्देश किसी एक देश या संस्कृति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विश्वभर में बढ़ते NCDs के संकट को देखते हुए जारी किए गए हैं। भारत जैसे देशों में, जहां शहरी जीवनशैली तेजी से बदल रही है और फास्ट फूड की आदतें बढ़ रही हैं, यह सलाह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
वसा क्या है और यह शरीर में क्या भूमिका निभाती है?
वसा शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व है, जो ऊर्जा प्रदान करता है, शरीर के अंगों की रक्षा करता है और हार्मोन उत्पादन में सहायता करता है। लेकिन जब वसा की मात्रा और प्रकार पर नियंत्रण नहीं रखा जाता, तो यही उपयोगी पोषक तत्व कई गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बन सकता है।
WHO के अनुसार, वसा की मात्रा से ज्यादा उसके प्रकार पर ध्यान देना जरूरी है।
संतृप्त वसा (Saturated Fats): ये मुख्य रूप से पशु उत्पादों में पाई जाती हैं, जैसे मक्खन, घी, लाल मांस, चीज़ आदि। इनका अधिक सेवन खून में LDL (Bad Cholesterol) बढ़ाता है, जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।
ट्रांस वसा (Trans Fats): यह वसा मुख्यतः प्रोसेस्ड फूड, बेकरी उत्पाद, स्नैक्स और फ्राइड फूड में पाई जाती है। इसे सबसे अधिक हानिकारक माना गया है क्योंकि यह HDL (Good Cholesterol) को घटाती है और LDL (Bad Cholesterol) को बढ़ाती है।
असंतृप्त वसा (Unsaturated Fats): यह वसा प्राकृतिक रूप से पौधों के तेलों, मछली, एवोकाडो, और नट्स में पाई जाती है। यह दिल की सेहत में सुधार, कोलेस्ट्रॉल कम करने और शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित करने में मदद करती है।
भारत में बढ़ता मोटापा और NCDs का खतरा
भारत में मोटापा और डायबिटीज अब “अमीरों की बीमारी” नहीं रह गई है। हाल के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के अनुसार, भारत में 18 वर्ष से अधिक उम्र के हर चार में से एक व्यक्ति का BMI 25 से अधिक है, जो मोटापे की श्रेणी में आता है।
वहीं 40 मिलियन से अधिक भारतीय डायबिटीज से पीड़ित हैं, और यह संख्या अगले दशक में दोगुनी होने की आशंका है।
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा कारण है – उच्च वसा, कम फाइबर और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन। शहरी इलाकों में लोग सुविधा और स्वाद की चाह में ऐसे खाद्य पदार्थों की ओर झुक गए हैं जिनमें ट्रांस वसा और संतृप्त वसा की मात्रा अत्यधिक होती है। यही कारण है कि WHO और भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार “Eat Right India” जैसे अभियानों के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
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WHO की सिफारिशें: क्या कहता है नया दिशानिर्देश?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने नवीनतम न्यूट्रिशनल गाइडलाइन में स्पष्ट कहा है:
कुल वसा सेवन: दैनिक ऊर्जा खपत का 30% से कम होना चाहिए।
संतृप्त वसा: कुल ऊर्जा खपत का 10% से कम।
ट्रांस वसा: कुल ऊर्जा खपत का 1% से कम।
असंतृप्त वसा: कुल वसा सेवन का बड़ा हिस्सा होना चाहिए।
WHO की न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस के अनुसार,
“हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोग अब भोजन के प्राकृतिक स्वरूप से दूर होकर प्रोसेस्ड और हाई-फैट डाइट की ओर बढ़ रहे हैं। यह न केवल मोटापे का कारण बन रही है, बल्कि आने वाले वर्षों में हृदय, लिवर और मस्तिष्क संबंधी बीमारियों की दर को और बढ़ा सकती है।”
क्या करें – असंतृप्त वसा को अपनाने के आसान तरीके
रिफाइंड ऑयल की जगह नेचुरल ऑयल अपनाएं:
सूरजमुखी, सरसों, जैतून या मूंगफली का तेल उपयोग करें। ये मोनो- और पॉली-असंतृप्त वसा से भरपूर होते हैं।घी और मक्खन की मात्रा सीमित करें:
स्वाद के लिए सीमित मात्रा में ही उपयोग करें। कोशिश करें कि पकवानों में डीप फ्राई की जगह रोस्ट या बेकिंग के विकल्प अपनाएं।पैक्ड फूड और बेकरी उत्पादों से दूरी बनाएं:
बिस्कुट, केक, चिप्स और फास्ट फूड में ट्रांस वसा की मात्रा अधिक होती है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।फलों और नट्स को डाइट में शामिल करें:
बादाम, अखरोट, काजू और बीज (flaxseed, chia) में प्राकृतिक असंतृप्त वसा पाई जाती है, जो दिल के लिए लाभकारी है।लेबल पढ़ने की आदत डालें:
पैक्ड फूड खरीदते समय “Trans fat-free” या “Low saturated fat” जैसे लेबल्स को जरूर देखें।
भारत में नीति और जागरूकता के कदम
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भी WHO के दिशानिर्देशों के अनुरूप कदम उठाए हैं।
2023 में “Eat Right Movement” के अंतर्गत ट्रांस वसा मुक्त भारत का लक्ष्य घोषित किया गया।
FSSAI ने तय किया है कि भारत में बिकने वाले सभी तेल और खाद्य उत्पादों में ट्रांस वसा 2% से अधिक नहीं होना चाहिए।
कई राज्य सरकारें स्कूलों और कॉलेजों में जंक फूड पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में काम कर रही हैं।
निष्कर्ष (Conclusion):
वसा शरीर की आवश्यकता है, लेकिन उसका अतिरेक स्वास्थ्य का शत्रु बन सकता है। WHO की यह सिफारिश केवल आंकड़ों का सेट नहीं, बल्कि हमारे जीवनशैली परिवर्तन की दिशा में एक वैज्ञानिक चेतावनी है।
यदि हम कुल ऊर्जा का 30% से कम वसा का सेवन करें और संतृप्त वसा की जगह असंतृप्त वसा अपनाएं, तो हम न केवल मोटापा और डायबिटीज से बच सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ, दीर्घायु और ऊर्जावान जीवन जी सकते हैं।
संदर्भ (References):
World Health Organization (WHO) – Guideline on Fat Intake and Noncommunicable Diseases, 2025 Edition
Indian Council of Medical Research (ICMR) – Dietary Guidelines for Indians, 2024
FSSAI – Eat Right India Campaign Report, 2023
Harvard School of Public Health – Nutrition and Health Study, 2022
National Family Health Survey (NFHS-6), India, 2024
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।
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