खून की जाँच से उम्र बताने का नया तरीका: स्टैनफोर्ड वैज्ञानिकों की खोज | Stanford scientists discover new way to tell age from blood test
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने खून में मौजूद प्रोटीन का अध्ययन करके इंसान की असली और जैविक उम्र मापने का नया तरीका खोजा है। यह तकनीक दिल, दिमाग और किडनी जैसे अंगों की उम्र बढ़ने की गति को दिखाकर गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत दे सकती है।
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खून की जाँच से उम्र बताने का नया तरीका : स्टैनफोर्ड वैज्ञानिकों की खोज
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (अमेरिका) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका खोजा है, जिससे खून में मौजूद प्रोटीन को मापकर इंसान की उम्र का अंदाज़ा बेहद सटीक लगाया जा सकता है।
क्या है खोज?
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर टोनी वाइस-कोरे (Tony Wyss-Coray) और उनकी रिसर्च टीम ने लगभग 3,000 से अधिक लोगों के खून का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि खून में मौजूद सैकड़ों प्रोटीन उम्र के साथ बदलते रहते हैं। इन प्रोटीनों का पैटर्न देखकर न केवल व्यक्ति की असली उम्र बताई जा सकती है बल्कि यह भी पता चलता है कि उसका शरीर जैविक रूप से (biological age) तेज़ी से बूढ़ा हो रहा है या धीरे।
उम्र सीधी रेखा में नहीं बढ़ती
रिसर्च के अनुसार, शरीर में उम्र बढ़ने के असर तीन प्रमुख दौरों में ज़्यादा नज़र आते हैं –
लगभग 34 साल की उम्र के आसपास
फिर 60 साल के आसपास
और सबसे बड़ा बदलाव 78 साल के आसपास
इसका मतलब है कि बुढ़ापा धीरे-धीरे नहीं बल्कि “लहरों” (waves) की तरह आता है।


क्यों है ज़रूरी?
अगर किसी व्यक्ति का दिल, दिमाग या गुर्दा (kidney) उसकी असली उम्र से ज़्यादा "बूढ़ा" दिखे, तो यह आगे चलकर दिल की बीमारी, अल्ज़ाइमर, या अन्य गंभीर रोगों का शुरुआती संकेत हो सकता है। ऐसे लोगों की पहले ही पहचान करके डॉक्टर समय रहते इलाज या जीवनशैली में बदलाव सुझा सकते हैं।
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भविष्य की दिशा
वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में यह तकनीक नियमित हेल्थ चेकअप का हिस्सा बन सकती है। इससे न केवल उम्र का सही आकलन होगा बल्कि यह भी समझा जा सकेगा कि कौन-सा अंग तेज़ी से बूढ़ा हो रहा है।
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।