शोध में खुलासा: 34, 60 और 78 साल की उम्र पर शरीर अचानक तेज़ी से बूढ़ा क्यों होता है?

वैज्ञानिकों के नए अध्ययन में पाया गया है कि इंसानी शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया सीधी रेखा में नहीं, बल्कि “लहरों” की तरह होती है। खासतौर पर 34, 60 और 78 साल की उम्र पर शरीर तेजी से बूढ़ा होने लगता है। यह शोध बताता है कि इन टर्निंग पॉइंट्स पर दिल की बीमारी, डायबिटीज़ और याददाश्त की समस्या जैसी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है। सही जीवनशैली और समय रहते सतर्कता से उम्र बढ़ने की रफ्तार को धीमा किया जा सकता है।

MEDICAL NEWS

Ashish Pradhan

9/23/20251 min read

Human aging process shows body turning points at 34, 60, 78 with accelerated biological changes.
Human aging process shows body turning points at 34, 60, 78 with accelerated biological changes.

अध्ययन में खुलासा: क्‍यों शरीर एक मोड़ पर आने पर अचानक तेज़ी से बूढ़ा होना शुरू कर देता है?

वैज्ञानिकों ने ऐसा जैविक “टर्निंग पॉइंट” खोजा है, जब इंसानी शरीर की उम्र बढ़ने की रफ्तार अचानक तेज़ हो जाती है। यह खोज बताती है कि क्यों मध्यम आयु और बुज़ुर्गावस्था में बीमारियाँ तेजी से बढ़ने लगती हैं।

क्या मिला शोध में?

खून और ऊतक (टिश्यू) के सैंपल का विश्लेषण करते हुए शोधकर्ताओं ने अलग-अलग उम्र के हजारों लोगों में प्रोटीन, डीएनए और मेटाबॉलिज़्म के बदलावों को ट्रैक किया।
नतीजा यह निकला कि उम्र बढ़ना एक समान रफ्तार से नहीं होता, बल्कि लहरों (waves) में होता है—जिसमें सबसे तेज़ बदलाव लगभग 34, 60 और 78 साल की उम्र पर दिखाई देते हैं।

“ये टर्निंग पॉइंट बताते हैं कि कब हमारे शरीर की प्रणालियाँ तेज़ी से कमजोर होने लगती हैं,” वैज्ञानिकों ने कहा।

स्वास्थ्य पर असर
  • 34 साल: पहला संकेत, जब शरीर का “wear and tear” बढ़ने लगता है।

  • 60 साल: दिल की बीमारी, डायबिटीज़ और याददाश्त की समस्या जैसी बीमारियों का ख़तरा अचानक बढ़ जाता है।

  • 78 साल: बुढ़ापे की प्रक्रिया एक और तेज़ मोड़ लेती है।

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आगे का रास्ता

विशेषज्ञों का मानना है कि इन उम्र संबंधी माइलस्टोन को पहचानकर डॉक्टर बीमारियों का अंदाज़ा पहले ही लगा पाएँगे और व्यक्ति को व्यक्तिगत सलाह व इलाज दे सकेंगे।

वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि जीवनशैली में सुधार—जैसे नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और धूम्रपान से बचाव—बुढ़ापे की रफ्तार को धीमा कर सकते हैं।

“मक़सद बुढ़ापा रोकना नहीं है,” एक शोधकर्ता ने कहा। “बल्कि यह समझना है कि हमारा शरीर कब सबसे अधिक संवेदनशील हो जाता है, ताकि समय रहते बीमारियों को रोका जा सके।”

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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