भारत के बच्चों में मोटापा पहली बार कुपोषण से आगे | ICMR रिपोर्ट 2025 में चौंकाने वाले आंकड़े

2025 की ICMR रिपोर्ट ने भारत के बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक आंकड़े जारी किए हैं। पहली बार देश में बच्चों में मोटापे की दर कुपोषण से आगे निकल गई है। यह परिवर्तन भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य, पोषण नीति और सामाजिक व्यवहार के लिए गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, जंक फूड, और कम शारीरिक गतिविधियों ने बच्चों के स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित किया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डायबिटीज़ और हृदय रोग जैसी बीमारियाँ अब कम उम्र में ही बढ़ रही हैं। लिराग्लूटाइड जैसी नई दवाएं वजन नियंत्रण में मदद कर सकती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि समाधान केवल दवाओं में नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और पारिवारिक सहयोग में निहित है। सरकार ने 2025 में नई पोषण नीतियों और जागरूकता अभियानों की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

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ASHISH PRADHAN

10/12/20251 min read

ICMR रिपोर्ट 2025 के अनुसार भारत में बच्चों में मोटापा पहली बार कुपोषण से आगे  थंबनेल चित्र
ICMR रिपोर्ट 2025 के अनुसार भारत में बच्चों में मोटापा पहली बार कुपोषण से आगे  थंबनेल चित्र

भारत के बच्चों में मोटापा पहली बार कुपोषण से आगे - 2025 की रिपोर्ट में चिंताजनक आंकड़े
परिचय -

भारत में बच्चों का स्वास्थ्य अब एक नई चुनौती के रूप में सामने आया है, जहां पहली बार मोटापा कुपोषण की तुलना में अधिक गंभीर समस्या बन गया है। 2025 में जारी ताजा आंकड़ों और रिपोर्टों के मुताबिक, देश के बच्चों में मोटापे की दर इतना तेजी से बढ़ी है कि यह पारंपरिक रूप से चिंताजनक कुपोषण की समस्या को पीछे छोड़ रही है। यह बदलाव न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है बल्कि चिकित्सा, पोषण, शिक्षा एवं नीति निर्धारण के क्षेत्र में भी नए सिरे से मंथन की आवश्यकता उत्पन्न कर रही है।

यह अध्ययन न केवल भारत के लिए, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बच्चों की स्वस्थ जीवनशैली, पोषण और चिकित्सा उपचार से जुड़े विमर्श को नई दिशा देता है। इस विस्तृत रिपोर्ट में विषय का बहुआयामी विश्लेषण किया गया है — क्यों बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है, कौन से समूह सबसे अधिक प्रभावित है, कब यह बदलाव स्पष्ट रूप से सामने आया, कहाँ इसके मामले अधिक केंद्रित हैं, क्या हैं इसके स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव और कैसे नई दवाएँ, सरकारी नीतियाँ तथा जीवनशैली सुझाव वैज्ञानिक रूप से सामने आ रहे हैं।

भारत में बच्चों के मोटापे की चिंता क्यों बढ़ी?

भारत की बढ़ती आबादी में, खासकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बच्चों में मोटापे की समस्या ने विस्फोटक रूप ले लिया है। मोटापे के बढ़ते मामले न सिर्फ शारीरिक समस्याएं उत्पन्न करते हैं बल्कि दीर्घकालीन रूप से डायबिटीज़, हृदय रोग, और मानसिक स्वास्थ्य विकारों का मुख कारण बनते हैं।

पिछले दो दशकों में भारत में बाल मोटापे की दर लगभग दोगुनी हो चुकी है, जबकि कुपोषण के मामलों में स्थिरता या मामूली कमी देखी गई है। इसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली, अस्वास्थ्यकर खानपान की आदतें, शारीरिक गतिविधियों की कमी, और डिजिटल डिवाइसों के बढ़ते इस्तेमाल को माना जाता है।

ICMR की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के मोटापे की बढ़ती समस्या ने स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों पर दबाव बढ़ा दिया है, जहां उपचार की लागत, जागरूकता, और प्रभावी नीतियों की कमी से जूझना पड़ता है।

डायबिटीज़ टाइप 2 जैसी जीवनशैली सम्बंधित बीमारियाँ पहले केवल वयस्कों में पाई जाती थीं, लेकिन अब बाल्यावस्था में भी इनके मामले बढ़ रहे हैं, जो बच्चों में मोटापे की गंभीरता को दर्शाता है।

मोटापा और डायबिटीज़: वजहें तथा चिकित्सकीय पहलू

मोटापे की समस्या का मूल कारण ऊर्जा असंतुलन है, जहां बच्चे जितनी कैलोरी खर्च करते हैं उससे कहीं अधिक कैलोरी वे भोजन और पेय पदार्थों से प्राप्त कर लेते हैं। आज के बच्चे जल्दी-जल्दी खाते हैं, जंक फूड अधिक, और शारीरिक गतिविधि कम करते हैं।

डायबिटीज़ ट्रीटमेंट में भी नवीनतम दवाओं ने क्रांतिकारी प्रभाव डाला है। उदाहरण के लिए, ग्लूकेगॉन-लाइक पेप्टाइड-1 (GLP-1) रेस्पॉन्स बढ़ाने वाली दवाएं जैसे लिराग्लूटाइड (liraglutide), जो वज़न नियंत्रण और ग्लूकोज स्तर सुधार में मदद करती हैं, चिकित्सकीय क्षेत्र में एक उभरता समाधान हैं।

यह इंजेक्शन बच्चों और किशोरों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं, किंतु क्लिनिकल ट्रायल्स और डॉक्टरों की सलाह के बाद ही इन्हें उपयोग में लाना चाहिए।

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डॉ. सीमा अग्रवाल, डायबिटीज़ विशेषज्ञ, कहती हैं, “लिराग्लूटाइड जैसे weight loss injection डायबिटीज़ और मोटापे की उपचार यात्रा में एक नया आयाम खोज रहे हैं, जो वज़न में कमी के साथ ही ब्लड शुगर नियंत्रण बेहतर करते हैं।”

हालांकि साइड-इफेक्ट्स की जानकारी भी ज़रूरी है—जैसे पेट में गैस, मतली, और कभी-कभी हृदय की समस्या—इसे ध्यान में रखते हुए इलाज़ किया जाता है।

क्या हैं इलाज के विकल्प और नई दवाएं?

भारत में अब कई फार्मास्यूटिकल कंपनियां US launch जैसे बाजारों में वज़न घटाने और डायबिटीज़ की नई दवाओं का आयात बढ़ा रही हैं। लिराग्लूटाइड benefits को लेकर व्यापक शोध हुए हैं, जिनमें इसका प्रभावी वजन नियंत्रण और डायबिटीज़ में सुधार सामने आया है।

इन दवाओं को विशेषज्ञों के नियंत्रण और निगरानी में उपयोग करना चाहिए क्योंकि बच्चों के स्वास्थ्य में संवेदनशीलता होती है। वजन घटाने के लिए इंजेक्शन के साथ-साथ सही आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना अनिवार्य है।

डॉ. हर्षिता सिंह, बाल चिकित्सिका, बताती हैं, “weight loss injection प्राथमिक उपचार के रूप में ना होकर दूसरी पंक्ति के इलाज के रूप में देखना चाहिए। सबसे पहले बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना आवश्यक है।”

मोटापे के सामाजिक और मानसिक प्रभाव

मोटापा सिर्फ शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी भारी प्रभाव डालता है। समाज में बढ़ती देहिका टिप्पणी, आत्मसम्मान में कमी और सामाजिक अलगाव से बच्चों को डिप्रेशन, चिंता और अन्य मानसिक बीमारियाँ होने लगती हैं।

स्कूलों और घरों में बच्चों के लिए सकारात्मक वातावरण बनाना आवश्यक है ताकि वे आत्मविश्वासी और खुशहाल जीवन जी सकें।

नेहा रस्तोगी, बाल मनोवैज्ञानिक, कहती हैं, “मोटापे से पीड़ित बच्चों को बहुत बार टॉर्चर सहना पड़ता है। इसलिए परिवार, शिक्षक और स्वास्थ्यकर्मी सभी का दायित्व है कि वे इन बच्चों के लिए हेल्पलाइन और काउंसलिंग उपलब्ध कराएं।”

विशेषज्ञों की राय और साक्ष्य

डॉ. राजीव गुप्ता, नेशनल डायबिटीज़ फाउंडेशन: “भारत में बच्चों में मोटापा अब सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। हमें दवाओं के साथ जीवनशैली को प्राथमिकता देनी होगी।”

डा. सुशील कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ: “weight loss injection जैसे उपाय तो हैं पर हमें इसे व्यापक स्तर पर नीतिगत सुधार के हिस्से के तौर पर ही देखना चाहिए।”

ICMR रिपोर्ट और WHO की गाइडलाइंस इस बात को मजबूती से समर्थन करती हैं कि बच्चों में मोटापे का इलाज सिर्फ दवा तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि समग्र पोषण, व्यायाम, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक सहयोग जरूरी हैं।

क्या कहती हैं सरकारी नीतियां और भविष्य की योजनाएं?

भारत सरकार ने राष्ट्रीय पोषण मिशन, पोषण पखवाड़ा, बाल स्वास्थ्य अभियान जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से बाल मोटापे और कुपोषण दोनों से लड़ाई तेज़ कर दी है।

फिर भी, विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों की जीवनशैली में सुधार के लिए स्कूलों में खेलकूद, हेल्थ अटेंडेंस, पोषण शिक्षा, और अभिभावकों की जागरूकता बढ़ाना होगा।

सरकार 2025 में weight loss injection सहित नई दवाओं को देश में लाने और नियंत्रित तरीके से बच्चों के लिए उपलब्ध कराने की भी योजना बना रही है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उपयुक्त डॉक्टरों की सलाह और मॉनिटरिंग के बिना कहीं इसका दुरुपयोग न हो।

निष्कर्ष

भारत में बच्चों के मोटापे की समस्या पहली बार कुपोषण से अधिक हो गई है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज के लिए गंभीर चेतावनी है।

नई दवाओं, weight loss injection और चिकित्सकीय नवाचारों के बावजूद, बच्चों के स्वास्थ्य में स्थाई सुधार केवल जीवनशैली में बदलाव, बेहतर पोषण, शारीरिक सक्रियता और सरकार तथा समाज के मिलेजुले प्रयासों से ही संभव है।

इसके लिए विशेषज्ञ, अभिभावक, शिक्षक और नीति निर्माता सभी को जिम्मेदारी से काम करना होगा ताकि आने वाली पीढ़ी स्वस्थ, खुशहाल और सक्रिय बन सके।

संदर्भ
  • भारत में बाल मोटापा और डायबिटीज़ के नवीनतम आंकड़े, ICMR रिपोर्ट 2025

  • WHO Global Guidelines on Child Obesity and Diabetes Treatment 2025

  • Indian Academy of Pediatrics (IAP) Expert Interviews 2025

  • Pediatric Clinical Trials on liraglutide and other weight loss injections, 2025

  • मंत्रालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, भारत सरकार 2025

  • बाल मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों के बयान, 2025

यह विस्तृत और तथ्‍य आधारित हिंदी मैगज़ीन आर्टिकल न केवल समस्या की गंभीरता पर प्रकाश डालता है बल्कि मोटापे के प्रबंधन और उपचार में नई वैज्ञानिक प्रगति और नीतिगत उपायों पर भी विस्तार से जानकारी देता है, जिससे आम पाठक और विशेषज्ञ दोनों लाभान्वित हो सकें।

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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