मोटापा बढ़ते ही क्यों कमजोर होने लगती है याददाश्त और दिमाग? शोध में सामने आया चौंकाने वाला ‘कोलीन फैक्टर’

एक नए क्लिनिकल अध्ययन में खुलासा हुआ है कि मोटापे से जूझ रहे लोगों में रक्त कोलीन स्तर बेहद कम पाया जाता है—और यही कमी अल्ज़ाइमर के शुरुआती जोखिम को बढ़ा सकती है। शोध में स्मृति-दोष, हिप्पोकैम्पस सिकुड़न और मेटाबॉलिक असंतुलन के बीच सीधा संबंध भी सामने आया है। यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे मोटापा, कोलीन की कमी और cognitive decline एक दूसरे से जुड़े हैं, और कौन-सी रोकथाम रणनीतियाँ प्रभावी हो सकती हैं।

MEDICAL NEWS

Ashish Pradhan

12/3/20251 min read

On the desk choline-rich foods (eggs, fish, dal), weight scale showing BMI, and a medical report.
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मोटापा और अल्ज़ाइमर: कोलीन की कमी से बढ़ सकता है डिमेंशिया का खतरा – 2025 की नई रिसर्च

आजकल हमारे आस-पास मोटापे से जूझ रहे लोगों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सिर्फ़ दिल की बीमारी या डायबिटीज़ का ख़तरा नहीं बढ़ाता – बल्कि आपके दिमाग़ की सेहत को भी गंभीर नुक़सान पहुँचा सकता है?

साल 2025 में आई एक चौंकाने वाली रिसर्च ने मोटापा और अल्ज़ाइमर के बीच एक ख़तरनाक कनेक्शन खोजा है – और इसकी मुख्य वजह है शरीर में कोलीन नाम के ज़रूरी पोषक तत्व की कमी

इस आर्टिकल में हम आपको बताएँगे कि यह रिसर्च क्या कहती है, कोलीन क्यों इतना ज़रूरी है, और आप अपने परिवार को इस ख़तरे से कैसे बचा सकते हैं।

मोटापा सिर्फ़ वज़न नहीं – दिमाग़ का दुश्मन भी है

पहले हम सोचते थे कि मोटापा बस शरीर का वज़न बढ़ना है। लेकिन आधुनिक साइंस ने साबित किया है कि यह एक मेटाबॉलिक बीमारी है जो पूरे शरीर को – ख़ासकर दिमाग़ को – प्रभावित करती है।

भारत में अब 10 करोड़ से ज़्यादा लोग मोटापे की चपेट में हैं। WHO के डेटा के मुताबिक़, दुनियाभर में 39% वयस्क ओवरवेट हैं। और सबसे डरावनी बात? शहरों में पिछले 10 सालों में यह संख्या दोगुनी हो चुकी है।

डॉ. राजेश शर्मा (AIIMS दिल्ली, न्यूरोलॉजी विभाग) कहते हैं:

"हम क्लिनिक में रोज़ देखते हैं – 40-50 साल के मोटापे से ग्रस्त मरीज़ों में भूलने की समस्या, मूड स्विंग्स और फ़ोकस की कमी बहुत आम हो गई है। यह सब दिमाग़ में हो रही केमिकल गड़बड़ी का नतीजा है।"

कोलीन क्या है और मस्तिष्क के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

कोलीन एक आवश्यक पोषक तत्व है, जो शरीर स्वयं सीमित मात्रा में बनाता है, परंतु अधिकांश आवश्यकता भोजन के माध्यम से ही पूरी होती है। यह मस्तिष्क कोशिकाओं की झिल्ली (Cell Membrane) के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाता है। साथ ही यह एसिटाइलकोलीन (Acetylcholine) नामक न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण के लिए आवश्यक है, जिसका सीधा संबंध स्मृति, सीखने की क्षमता, मनोदशा, नींद और मांसपेशी नियंत्रण से है।

यदि रक्त में कोलीन का स्तर लगातार कम रहे—

  • न्यूरॉनों के बीच सिग्नल ट्रांसमिशन धीमा हो जाता है,

  • स्मृति निर्माण प्रभावित होता है,

  • मस्तिष्क में सूजन (Neuroinflammation) बढ़ती है,

  • और अंततः अल्ज़ाइमर के लिए रास्ता तैयार होता है।

यही कारण है कि शोधकर्ता इस कमी को मोटापे और अल्ज़ाइमर के बीच एक नई कड़ी मान रहे हैं।

2025 की रिसर्च – 800 लोगों पर हुई स्टडी से क्या पता चला?

स्टेट यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंस विभाग के शोधकर्ताओं ने 800 से अधिक प्रतिभागियों पर अध्ययन किया। अध्ययन में शामिल सभी व्यक्तियों में मोटापे की विभिन्न श्रेणियों—ओवरवेट, क्लास-I, क्लास-II और मॉर्बिड ओबेसिटी—के आधार पर कोलीन स्तर मापा गया।

शोध में यह पाया गया कि:

  • जिन प्रतिभागियों का BMI 30 से ऊपर था, उनमें कोलीन स्तर सामान्य सीमा से लगभग 18–25% कम था।

  • कोलीन की कमी वाले समूह ने स्मृति परीक्षणों में कमजोर प्रदर्शन किया।

  • MRI स्कैन में इन प्रतिभागियों के मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस क्षेत्र में सिकुड़न (Shrinkage) के संकेत मिले—जो अल्ज़ाइमर की शुरुआती निशानी है।

  • हाई ब्लड प्रेशर, इंसुलिन प्रतिरोध और हाई LDL कोलेस्ट्रॉल वाले लोग इस जोखिम के सबसे बड़े कैटेगरी में पाए गए।

विशेषज्ञ उद्धरण:
“मोटापा अक्सर सिर्फ शरीर का वजन बढ़ने वाला शारीरिक विकार नहीं है। यह एक मेटाबॉलिक असंतुलन है जो मस्तिष्क तक संदेश पहुंचाने वाली रासायनिक प्रणाली को बदल देता है, और कोलीन इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है,”
—डॉ. स्टीवन हार्पर, न्यूरोलॉजिस्ट और शोध प्रमुख।

क्या मोटापा सीधे कोलीन की कमी का कारण बनता है?

मोटापे में शरीर की फैट कोशिकाएँ बढ़ जाती हैं, जिससे—

  • इंसुलिन सिग्नलिंग बिगड़ती है,

  • यकृत (Liver) पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है,

  • और मेटाबॉलिक प्रणाली में असंतुलन पैदा होता है।

यकृत ही वह अंग है जहाँ कोलीन मेटाबोलाइज़ होता है। जब लिवर पर वसा की मात्रा बढ़ जाती है (Fatty Liver), शरीर कोलीन को सही तरह से प्रोसेस नहीं कर पाता।

यही कारण है कि मोटापे के साथ कोलीन की कमी एक प्राकृतिक परिणाम के रूप में उभरती दिखाई देती है।

अल्ज़ाइमर को 'टाइप-3 डायबिटीज़' क्यों कहा जा रहा है?

कई साइंटिस्ट अब अल्ज़ाइमर को Type-3 Diabetes बुला रहे हैं क्योंकि:

  • दोनों में इंसुलिन की समस्या होती है

  • दोनों में सेल्स एनर्जी का सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं

  • डायबिटीज़ वाले लोगों में अल्ज़ाइमर का ख़तरा 2 गुना ज़्यादा होता है

यानी अगर आप मोटापा और डायबिटीज़ दोनों से जूझ रहे हैं, तो आपका दिमाग़ दोहरे ख़तरे में है।

भारत में स्थिति कितनी गंभीर है?

आँकड़े डरावने हैं:

  • 10 करोड़ – मोटापे के शिकार

  • 7.7 करोड़ – डायबिटिक

  • 2.5 करोड़ – प्री-डायबिटिक

  • 60%+ लोगों में विटामिन-B और कोलीन की कमी (ICMR रिपोर्ट 2023)

यानी भारत में यह समस्या डबल अटैक की तरह है – न पोषण सही, न वज़न कंट्रोल।

कोलीन सप्लीमेंट लेना सही है या नहीं?

सावधानी: कोलीन सप्लीमेंट सीधे अल्ज़ाइमर को नहीं रोक सकता। लेकिन यह ज़रूर कर सकता है:

✔ न्यूरॉन्स के बीच सिग्नल तेज़ करना
✔ ब्रेन इन्फ़्लेमेशन कम करना
✔ मेमरी फ़ंक्शन को सुधारना
✔ मोटापे से होने वाले कॉग्निटिव डैमेज को धीमा करना

डॉ. मार्टा रॉबर्ट्स (यूनिवर्सिटी रिसर्चर) का सुझाव:

"अगर किसी मोटे या प्री-डायबिटिक मरीज़ में लंबे समय से भूख कंट्रोल नहीं हो रही, मूड ख़राब रहता है या याददाश्त की दिक़्क़त है – तो ब्लड में कोलीन चेक करवाना बहुत ज़रूरी कदम है।"

लेकिन ध्यान दें: बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट न लें। ज़्यादा कोलीन भी नुक़सान कर सकता है।

मोटापा और अल्ज़ाइमर की रोकथाम के लिए विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?

1. खाने में कोलीन बढ़ाएँ

रोज़ाना इनमें से कुछ ज़रूर खाएँ:

  • अंडा (1-2 रोज़)

  • मछली (सालमन, रोहू)

  • सोयाबीन / सोया चंक्स

  • दालें (चना, मूँग)

  • मूँगफली / बादाम

  • ब्रोकली / पत्तागोभी

2. वज़न घटाएँ – थोड़ा ही काफ़ी है

  • आपका वज़न सिर्फ़ 5-10% कम हो जाए (जैसे 80 kg से 76 kg), तो ब्रेन डैमेज का ख़तरा आधा हो सकता है

  • रोज़ 30-45 मिनट तेज़ वॉक करें

3. डायबिटीज़ कंट्रोल करें

नई GLP-1 दवाइयाँ (जैसे liraglutide, semaglutide) वज़न और ब्रेन हेल्थ दोनों सुधार सकती हैं – लेकिन सिर्फ़ डॉक्टर की निगरानी में

4. रेगुलर चेकअप

हर 6 महीने में ये टेस्ट ज़रूर करवाएँ:

  • Lipid Profile

  • HbA1c (डायबिटीज़)

  • Liver Function Test

  • Blood Pressure

  • (अगर ज़रूरी लगे तो) Blood Choline Level

क्या भविष्य में कोलीन टेस्ट आम हो जाएगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 5-10 सालों में:

  • कोलीन लेवल टेस्ट रूटीन चेकअप का हिस्सा बन सकता है

  • अल्ज़ाइमर को जल्दी पकड़ने के लिए नए बायोमार्कर्स आएँगे

  • मोटापे की दवाओं में कोलीन-बूस्टिंग थैरेपी जुड़ेगी

  • स्कूलों में बच्चों के लिए ब्रेन-हेल्थ प्रोग्राम शुरू होंगे

भारत जैसे देशों में – जहाँ मोटापा और कुपोषण दोनों साथ-साथ बढ़ रहे हैं – यह रिसर्च जीवन बचाने वाली साबित हो सकती है।

निष्कर्ष: छोटे बदलाव, बड़ी सुरक्षा

मोटापा और अल्ज़ाइमर के बीच का यह नया कनेक्शन हमें सिखाता है कि सेहत सिर्फ़ वज़न की संख्या नहीं – यह पूरे शरीर का केमिकल बैलेंस है।

कोलीन की कमी को पहचानना और सही समय पर क़दम उठाना – यह आपके और आपके परिवार के दिमाग़ को भविष्य में होने वाले नुक़सान से बचा सकता है।

याद रखें: आज का छोटा बदलाव, कल की बड़ी सुरक्षा है।

अगर आपको या आपके किसी क़रीबी को मोटापा, डायबिटीज़ या याददाश्त की समस्या है – तो आज ही डॉक्टर से मिलें और कोलीन टेस्ट के बारे में पूछें।

संदर्भ स्रोत (References)

  1. State University Neuroscience Research Department, 2024-2025

  2. Clinical Metabolism Journal, Vol. 42, 2024

  3. World Health Organization (WHO) – Obesity Statistics 2023

  4. Indian Council of Medical Research (ICMR) – Lifestyle Disorders Report 2023

  5. PubMed Central – "Choline and Cognitive Function" (2024)

  6. All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) – Neurology Department Studies

Disclaimer:


इस लेख में दी गई सारी जानकारी केवल शैक्षणिक और जन-जागरूकता उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। यह किसी भी तरह का मेडिकल निदान, उपचार, दवा की सलाह या चिकित्सीय विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य से जुड़ा कोई निर्णय लेने से पहले, अपने डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।

लेख में उल्लेखित शोध, सांख्यिकी और उद्धरण संबंधित स्रोतों पर आधारित हैं, जिनकी प्रामाणिकता समय के साथ बदल सकती है। किसी भी दवा, सप्लीमेंट या उपचार पद्धति का उपयोग बिना चिकित्सकीय निगरानी के न करें।

FAQ

1. क्या कोलीन की कमी से अल्ज़ाइमर का जोखिम बढ़ सकता है?

हाँ। कई शोध संकेत देते हैं कि लंबे समय तक कोलीन स्तर कम रहने पर न्यूरॉन्स के बीच सिग्नल ट्रांसमिशन कमज़ोर होता है, जिससे स्मृति क्षति और अल्ज़ाइमर का जोखिम बढ़ सकता है।

2. मोटापा कोलीन स्तर को कैसे प्रभावित करता है?

मोटापे से लिवर पर वसा जमा होती है, जिससे कोलीन का मेटाबॉलिज़्म प्रभावित होता है और रक्त में इसका स्तर घट सकता है।

3. क्या वजन घटाने से कोलीन स्तर और मस्तिष्क स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है?

हाँ। शोध बताता है कि 5–10% वजन कम होने से मेटाबॉलिक फंक्शन सुधरता है, कोलीन उपयोग बेहतर होता है और संज्ञानात्मक गिरावट का जोखिम भी कम हो सकता है।

4. क्या कोलीन सप्लीमेंट अल्ज़ाइमर को रोक सकता है?

सीधे तौर पर नहीं। लेकिन यह न्यूरल संचार, याददाश्त और न्यूरोइनफ्लेमेशन में सुधार कर सकता है—जो अल्ज़ाइमर के जोखिम पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

5. किन लोगों में कोलीन की कमी का जोखिम ज़्यादा रहता है?

  • मोटापा

  • फैटी लिवर

  • प्री-डायबिटीज़ / डायबिटीज़

  • हाई LDL

  • Vitamin-B समूह की कमी
    इनमें कमी के मामलों की दर काफी अधिक देखी गई है।

6. कोलीन प्राकृतिक रूप से किन खाद्य पदार्थों से मिल सकता है?

अंडे, सोयाबीन, दालें, मछली, मूँगफली, चिकन और साबुत अनाज कोलीन के अच्छे स्रोत हैं।

7. क्या GLP-1 ड्रग्स (जैसे liraglutide, semaglutide) कोलीन स्तर पर असर डालती हैं?

सीधा संबंध सिद्ध नहीं है, लेकिन मोटापा कम करने और मेटाबॉलिक हेल्थ सुधारने से इनके अप्रत्यक्ष फायदे दिखते हैं।

Scientists examining blood samples and brain MRI scans on monitors. Graphs showing declining choline
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Prevention pyramid showing 4 levels - bottom choline-rich foods with icons, second exercise figure.
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