Tramadol पर नई चेतावनी: मामूली दर्द राहत पर Heart Attack और Stroke का जोखिम दोगुना

दर्द कम करने वाली मशहूर दवा ट्रैमाडोल (Tramadol) पर अब नए शोध ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) में प्रकाशित 2025 के अध्ययन के अनुसार, ट्रैमाडोल से हृदयाघात (Heart Attack) और स्ट्रोक का जोखिम लगभग 1.8 गुना बढ़ जाता है, जबकि दर्द में राहत मामूली होती है। यह दवा, जिसे अब तक “सेफ” ओपिओइड माना जाता था, लंबे समय तक लेने पर Arrhythmia, Cardiac Ischemia और Blood Clot जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में ट्रैमाडोल का इस्तेमाल सावधानी से और सीमित समय के लिए ही होना चाहिए। जानें — क्या हैं इसके साइड इफेक्ट्स, किसे खतरा ज़्यादा है, और इसके सुरक्षित विकल्प कौन से हैं। पढ़ें पूरा विश्लेषण AIIMS और BMJ की रिपोर्ट के आधार पर।

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ASHISH PRADHAN

10/15/20251 min read

Medical image showing a human heart with ECG pulse and a Tramadol capsule.
Medical image showing a human heart with ECG pulse and a Tramadol capsule.

ट्रैमाडोल पर नई चेतावनी: मामूली दर्द राहत, पर बढ़ा हृदय जोखिम

(Tramadol – A common painkiller under fresh scientific scrutiny)

दर्द मिटाने वाली दवा जो अब खुद बन गई चिंता का कारण

दर्द से राहत पाने के लिए डॉक्टरों द्वारा अक्सर लिखी जाने वाली एक लोकप्रिय दवा — ट्रैमाडोल (Tramadol) — अब मेडिकल जगत में चर्चा का केंद्र बन गई है।
एक हालिया अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, यह दवा पुरानी पीड़ा (Chronic Pain) में सिर्फ मामूली राहत देती है, लेकिन इसके प्रयोग से हृदय संबंधी गंभीर दुष्प्रभावों (Serious Adverse Events) का खतरा लगभग दोगुना हो सकता है।

इस अध्ययन ने दर्द प्रबंधन की दुनिया में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — कि क्या हम दर्द को कम करने के लिए अपनी हृदय-स्वास्थ्य को दांव पर लगा रहे हैं?

ट्रैमाडोल पर क्यों उठे सवाल

ट्रैमाडोल को 1970 के दशक में जर्मनी की कंपनी Grünenthal GmbH ने विकसित किया था। यह एक सिंथेटिक ओपिओइड (Synthetic Opioid Analgesic) है, जो मस्तिष्क में दर्द महसूस करने वाले रसायनों पर असर डालती है।

लंबे समय तक इसे एक “माइल्ड” या “सेफ” ओपिओइड माना जाता रहा क्योंकि यह मॉर्फिन या ऑक्सीकोडोन जैसी ताकतवर दवाओं से कम लत लगाने वाली समझी जाती थी।
लेकिन हाल के वर्षों में विभिन्न देशों से सामने आए अत्यधिक दुष्प्रभाव, हृदय की गड़बड़ियां, और ओवरडोज़ के मामले अब इस दवा की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

अध्ययन का सार (BMJ, 2025)

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) में प्रकाशित 2025 के एक अध्ययन में 3 लाख से अधिक मरीजों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया।
इनमें ऐसे लोग शामिल थे जिन्हें ऑस्टियोआर्थराइटिस, पीठ दर्द या मस्कुलोस्केलेटल दर्द के लिए ट्रैमाडोल या अन्य दर्दनिवारक दवाएं दी गई थीं।

परिणाम चौंकाने वाले थे —

  • ट्रैमाडोल लेने वालों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम 1.8 गुना अधिक पाया गया।

  • दवा बंद करने के बाद भी यह जोखिम कुछ हफ्तों तक बरकरार रहा।

  • दर्द राहत के लिहाज से ट्रैमाडोल ने सिर्फ 10–15% अतिरिक्त सुधार दिखाया, जो सांख्यिकीय रूप से मामूली माना गया।

ट्रैमाडोल कैसे काम करती है? (Mechanism of Action)

ट्रैमाडोल एक ड्यूल-एक्शन एनाल्जेसिक (Dual-Action Analgesic) है — यानी यह दो तरीकों से दर्द पर असर डालती है:

  1. ओपिओइड रिसेप्टर से जुड़ना:
    यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के μ-opioid रिसेप्टर से जुड़कर दर्द संकेतों को ब्लॉक करती है।

  2. सेरोटोनिन और नॉरएड्रेनालिन पर असर:
    यह दोनों न्यूरोट्रांसमीटर की मात्रा बढ़ाती है, जिससे मूड बेहतर होता है और दर्द की अनुभूति कम होती है।

लेकिन यही दोहरा असर कभी-कभी उल्टा भी पड़ सकता है —
सेरोटोनिन स्तर बढ़ने से ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन और तंत्रिका तंत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

मुख्य चिंता: हृदय जोखिम और गंभीर दुष्प्रभाव

अध्ययन में ट्रैमाडोल के साथ कई गंभीर जटिलताएं देखी गईं, जिनमें प्रमुख हैं:

1. हृदय की धड़कन में अनियमितता (Arrhythmia)

ट्रैमाडोल इलेक्ट्रोलाइट संतुलन और सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकती है, जिससे दिल की धड़कन तेज़ या अनियमित हो सकती है।

2. स्ट्रोक और ब्लड क्लॉटिंग जोखिम

सेरोटोनिन स्तर बढ़ने से रक्त में प्लेटलेट्स की कार्यक्षमता बदलती है, जिससे थक्का जमने (Clot Formation) की संभावना बढ़ जाती है — यह स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है।

3. हार्ट अटैक और सीने में दर्द (Cardiac Ischemia)

लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर रक्तचाप और ऑक्सीजन प्रवाह पर असर पड़ता है, जिससे हार्ट अटैक की संभावना बढ़ सकती है।

4. सीरियस एडवर्स इवेंट्स (SAE)

ट्रैमाडोल से जुड़े अन्य गंभीर दुष्प्रभावों में शामिल हैं:

  • बेहोशी या अत्यधिक नींद

  • दौरे (Seizures)

  • सांस रुकना (Respiratory Depression)

  • ओवरडोज़ से मौत के मामले

विशेषज्ञों की राय

“ट्रैमाडोल को अक्सर एक सुरक्षित विकल्प मानकर लिखा जाता है, जबकि हकीकत में यह उतनी ‘माइल्ड’ नहीं है जितनी समझी जाती है।”
डॉ. एमिली रॉबर्ट्स, कार्डियोलॉजिस्ट, यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो

“हमें हर मरीज के लिए दर्द प्रबंधन की रणनीति को व्यक्तिगत बनाना होगा। एक ही दवा सब पर समान रूप से सुरक्षित नहीं हो सकती।”
डॉ. आर.के. शर्मा, सीनियर पेन स्पेशलिस्ट, AIIMS, नई दिल्ली

भारत में ट्रैमाडोल का उपयोग और स्थिति

भारत में ट्रैमाडोल को Schedule-H1 ड्रग की श्रेणी में रखा गया है, यानी यह केवल पंजीकृत डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही दी जा सकती है। 2018 में सरकार ने इसके दुरुपयोग और अवैध व्यापार को रोकने के लिए इसे नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के अंतर्गत भी नियंत्रित किया।

फिर भी, कई छोटे शहरों और निजी क्लिनिकों में इसे बिना पर्याप्त जांच के लंबे समय तक दर्द प्रबंधन के लिए दिया जाता है, जिससे मरीज अनजाने में गंभीर जोखिम उठा लेते हैं।

कौन से लोग अधिक जोखिम में हैं?

अध्ययन और चिकित्सा रिपोर्टों के अनुसार, ट्रैमाडोल से हृदय जोखिम निम्नलिखित समूहों में अधिक पाया गया है:

  • जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या स्ट्रोक हुआ हो

  • 60 वर्ष से अधिक उम्र के मरीज

  • जो अन्य एंटी-डिप्रेसेंट या सेरोटोनिन-बढ़ाने वाली दवाएं लेते हैं

  • डायबिटीज़ या मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति

ट्रैमाडोल के सुरक्षित विकल्प

डॉक्टर अब दर्द नियंत्रण के लिए अधिक सुरक्षित और प्रभावी विकल्पों की सिफारिश कर रहे हैं:

दवा के साथ सावधानियां
  1. डॉक्टर की सलाह के बिना ट्रैमाडोल शुरू या बंद न करें

  2. यदि दवा लेने के दौरान सीने में दर्द, चक्कर, दिल की धड़कन तेज़ महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

  3. शराब या अन्य नींद लाने वाली दवाओं के साथ इसका प्रयोग न करें।

  4. लंबे समय तक लगातार उपयोग से बचें — दर्द प्रबंधन के लिए वैकल्पिक तरीकों (जैसे फिजियोथेरेपी, एक्यूपंक्चर, योग) को अपनाएं।

आगे की दिशा: क्या ट्रैमाडोल का भविष्य सीमित होगा?

कई देशों में अब यह चर्चा चल रही है कि ट्रैमाडोल को सख्त नियंत्रण में लाया जाए।
अमेरिका और यूरोप में पहले ही इसके प्रिस्क्रिप्शन पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
भारत में भी फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम (PvPI) इसके दुष्प्रभाव डेटा की निगरानी कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ट्रैमाडोल को केवल “अल्पकालिक और विशेष परिस्थितियों” में ही अनुमति दी जा सकती है।

निष्कर्ष: दर्द कम, जोखिम ज़्यादा

ट्रैमाडोल ने एक समय में डॉक्टरों को दर्द के इलाज का सुविधाजनक विकल्प दिया था। लेकिन अब यह स्पष्ट है कि यह दवा उतनी “सेफ” नहीं जितनी इसे माना गया। दर्द से राहत की चाह में यदि हृदय पर भार बढ़ रहा है, तो चिकित्सा जगत को नए संतुलन की जरूरत है —
कम जोखिम और अधिक प्रभावी दर्द प्रबंधन की दिशा में।

स्रोत एवं संदर्भ
  1. British Medical Journal (BMJ), 2025; “Comparative cardiovascular safety of tramadol versus other analgesics in chronic pain patients”

  2. The Lancet Public Health, 2024 – Opioid safety profile and cardiovascular events

  3. World Health Organization (WHO) – Pharmacovigilance Database, 2023

  4. AIIMS Pain Management Unit, New Delhi – National Pain Registry Report, 2024

  5. US FDA Drug Safety Communications – Tramadol Label Update, 2024

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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ट्रैमाडोल के सुरक्षित विकल्प नॉन-ओपिओइड एनाल्जेसिक
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