भारत ने स्ट्रोक इलाज में रचा इतिहास: AIIMS का स्वदेशी Supernova Stent ट्रायल में 94% सफल

AIIMS द्वारा विकसित भारत के पहले स्वदेशी Supernova Stent-Retriever ने स्ट्रोक ट्रायल में 94% सफलता दिखाई। CDSCO की मंजूरी के बाद यह उपकरण सस्ते और तेज स्ट्रोक इलाज की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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ASHISH PRADHAN

12/14/20251 min read

Supernova stent retriever trial success visual, AIIMS India stroke treatment innovation.
Supernova stent retriever trial success visual, AIIMS India stroke treatment innovation.

परिचय

भारत के चिकित्सा अनुसंधान में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है जब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली ने देश के पहले स्वदेशी विकसित स्ट्रोक इलाज उपकरण Supernova Stent-Retriever के क्लिनिकल ट्रायल में शानदार परिणाम हासिल किए हैं, जिसमें गंभीर स्ट्रोक के रोगियों में लगभग 94 प्रतिशत सफलता दर पाई गई है और ब्लड फ्लो बहाल करने में यह वैश्विक मानकों के बराबर साबित हुआ है।

इस उपलब्धि के बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने इसे भारत में नियमित उपयोग के लिए मंजूरी दी है, जो Make in India पहल के तहत स्वदेशी नवाचार और स्वास्थ्य सुविधा की पहुंच को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है।

यह ट्रायल GRASSROOT Trial नाम से जाना जाता है और यह आठ प्रमुख ट्रायल केंद्रों में किए गए मल्टी-सेंटर अध्ययन पर आधारित है।

भारत में स्ट्रोक का बोझ और क्यों यह महत्वपू‍र्ण है?

भारत वर्ष में लगभग 1.7 मिलियन लोगों को स्ट्रोक का सामना करना पड़ता है, जिससे न केवल मृत्यु होती है बल्कि गंभीर विकलांगता और दीर्घकालिक स्वास्थ्य जटिलताएँ भी आम हैं। इस रोग का इलाज बहुत समय-संवेदनशील है और जब मस्तिष्क के ब्लड वेसल्स ब्लॉक हो जाते हैं तो उसे जल्द से जल्द खोलना आवश्यक होता है ताकि मस्तिष्क को नुकसान से बचाया जा सके। पारंपरिक तरीकों में दवा या थ्रोम्बेक्टोमी और विदेशी उपकरणों का इस्तेमाल होता रहा है, जो महंगे होने के कारण सस्ते और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचना कठिन रहा है। ऐसे में एक सस्ती, प्रभावी और स्वदेशी डिवाइस का होना राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा और रोगी देखभाल में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

Supernova Stent-Retriever क्या है और यह कैसे काम करता है?

डिवाइस की तकनीक और मशीन का तंत्र

Supernova Stent-Retriever एक मेकॅनिकल थ्रॉम्बेक्टोमी डिवाइस है, जिसका उद्देश्य मस्तिष्क की ब्लॉक हुई रक्त वाहिकाओं से रक्त के थक्कों (clots) को निकालना है। इसके लचीले ढांचे के कारण यह सहजता से रक्त वाहिका में प्रवेश करता है और थक्के को पकड़कर उसे बाहर निकाल देता है, जिससे रक्त का प्रवाह पुनः शुरू होता है। आधुनिक स्टेंट-रिट्रीवर तकनीक के तहत इस डिवाइस को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है ताकि यह स्थिरता और न्यूनतम जटिलता के साथ थक्के को हटाने में सक्षम हो।

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क्लिनिकल ट्रायल — GRASSROOT Trial

AIIMS ने GRASSROOT Trial के तहत यह डिवाइस 32 गंभीर स्ट्रोक के मरीजों में परीक्षण किया, जो आठ प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों पर किया गया। यह पहला मौका था जब भारत में ऐसा उपकरण राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षण और मंजूरी के लिए पेश किया गया। ट्रायल में दिखाया गया कि लगभग 94% रोगियों में मस्तिष्क में रक्त प्रवाह सफलतापूर्वक बहाल हुआ, जबकि मरीजों के आधा हिस्सा 90 दिनों के भीतर कार्यात्मक रूप से स्वतंत्र हो गया। गंभीर मस्तिष्क रक्तस्राव (brain bleed) और मृत्यु दर भी अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई, और किसी भी डिवाइस-विशिष्ट जटिलता की घटना रिपोर्ट नहीं हुई।

विशेषज्ञों की राय

डॉ. शैलेश बी. गायकवाड़, प्रोफेसर एवं हेड, न्यूरोइमेजिंग और इंटरवेंशनल न्यूरोरेडियोलॉजी, AIIMS

“यह ट्रायल भारत में स्ट्रोक उपचार के इतिहास में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है और यह प्रमाणित करता है कि हम वैश्विक स्तर के चिकित्सा शोध कर सकते हैं और साथ ही उपलब्ध तकनीकों की प्रत्यक्षता से बेहतर देखभाल दे सकते हैं।”

डॉ. अशुतोष जाधव, चीफ साइंटिफिक ऑफिसर, Gravity Medical Technology

“स्वदेशी डेटा के आधार पर विकसित और मान्यता प्राप्त यह डिवाइस भविष्य के बड़े पैमाने पर उच्च-गुणवत्ता वाले ट्रायल्स के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।”

डॉ. दीप्ति विभा, प्रोफेसर ऑफ न्यूरोलॉजी, AIIMS

“मरीजों और उनके परिवारों की भागीदारी ने यह सुनिश्चित किया कि सस्ती और तेज इलाज की सुविधा भारत के अधिकांश नागरिकों तक पहुंच सके।”

Supernova डिवाइस की अपेक्षित प्रभावशीलता और सुरक्षा

Supernova स्टेंट-रिट्रीवर ने मल्टी-सेंटर अध्ययन में उच्च सुरक्षा और प्रभावशीलता परिणाम दिखाए हैं और इसके उपयोग से बेहतर रोगी नतीजे दिखाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक द्वारा थक्के को पहली या दूसरी कोशिश में हटाना संभव होता है, जिससे रोगी में मृत्यु और विकलांगता की संभावना कम होती है। जैसा कि अध्ययन के फॉलो-अप आंकड़ों में देखा गया है, मरीजों की न्यूरोलॉजिकल स्थिति में सकारात्मक सुधार देखा गया, जिससे उनकी दैनिक गतिविधियों में बेहतर स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

भारत में Make in India पहल के लिए इसका योगदान

Supernova की मंजूरी और सफलता ने Make in India पहल को नई ऊँचाई दी है। यह पहला ऐसा स्ट्रोक इलाज उपकरण है जिसे पूरी तरह भारतीय क्लिनिकल ट्रायल डेटा के आधार पर अनुमोदित किया गया है, जिससे भारत अब चिकित्सा उपकरण अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। यह सफलता न केवल रोगियों के लिए किफायती चिकित्सा विकल्प उपलब्ध कराती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय नवाचार की प्रतिष्ठा को भी मजबूत करती है।

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मरीजों और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर प्रभाव

रोगियों के लिए अवसर

यह डिवाइस विशेष रूप से उन रोगियों के लिए उम्मीद की किरण है जो समय-संवेदनशील स्ट्रोक स्थितियों का सामना करते हैं। क्योंकि भारत में बहुत से लोग आर्थिक रूप से कमजोर आर्थिक स्थिति से हैं, सस्ती और प्रभावी तकनीक उन्हें उच्च-स्तर की स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच प्रदान करेगी।

स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर लाभ

स्वदेशी उपकरणों का उत्पादन और नियमित उपयोग स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की लागत को भी कम करने में मदद करेगा। इससे अस्पतालों में उन्नत चिकित्सकीय उपकरण की उपलब्धता और डॉक्टरों की विशेषज्ञता का उपयोग बेहतर तरीके से हो सकेगा, जिससे उच्च-स्तरीय देखभाल तक पहुंच बनेगी।

निष्कर्ष और भविष्य की योजनाएँ

Supernova स्टेंट-रिट्रीवर की सफलता और उस पर मिली मंजूरी भारत में स्ट्रोक उपचार की दिशा में एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। आने वाले वर्षों में भारत के स्वास्थ्य अनुसंधान, तकनीकी विकास और रोगी देखभाल प्रणालियों में इस उपलब्धि का दीर्घकालिक प्रभाव होगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह ट्रायल भविष्य में और भी बड़े पैमाने पर क्लिनिकल शोध और स्वदेशी इलाज तकनीकों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।

विशेषज्ञ सलाह

डॉक्टरों का कहना है कि स्ट्रोक के इलाज के साथ-साथ समय पर अस्पताल पहुंचना, शुरुआती पहचान (FAST signs), उच्च-रक्तचाप और मधुमेह जैसी जोखिम स्थितियों का प्रबंधन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

संदर्भ

  1. India’s First Homegrown Stroke Device Shows Strong Results in AIIMS-Led Trial, Times of India, 14 दिसंबर 2025.

  2. AIIMS Delhi conducts India’s first dedicated clinical trial of advanced brain stent, PTI via The Week, 13 दिसंबर 2025.

  3. स्ट्रोक इलाज में AIIMS का नया कारनामा, TV9 Hindi, 14 दिसंबर 2025.

  4. AIIMS-Delhi conducts India’s first clinical trial of advanced brain stent, The Tribune, 13-14 दिसंबर 2025.

  5. AIIMS-led trial on most advanced brain stent shows promise, IANS, 13 दिसंबर 2025.


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