छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: अब दूसरे राज्यों से दवा खरीद पर रोक, हर व्यापारी को देना होगा पूरा लेखा-जोखा

छत्तीसगढ़ सरकार ने दवा आपूर्ति में पारदर्शिता और नकली दवाओं पर नियंत्रण के लिए नया नियम लागू किया है। अब राज्य में कोई भी थोक या रिटेल व्यापारी दूसरे राज्यों से दवा नहीं खरीद सकेगा। हर लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड और दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। जानिए, इस फैसले से कैसे बदलेगा राज्य का दवा बाजार और मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था।

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ASHISH PRADHAN

11/5/20251 min read

Chhattisgarh government bans drug purchases from other states
Chhattisgarh government bans drug purchases from other states

गैर राज्यों से दवा खरीद पर रोक: अब थोक कारोबारी और रिटेलर दोनों को देना होगा पूरा लेखा-जोखा

परिचय:

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिसके तहत अब किसी भी मेडिकल स्टोर या थोक कारोबारी (wholesaler) को दूसरे राज्यों से सीधे दवाएं खरीदने की अनुमति नहीं होगी। यह नया नियम नवंबर 2025 से लागू हो गया है, और इसका मुख्य उद्देश्य नकली, घटिया या गैर-पंजीकृत दवाओं के अवैध प्रवेश पर पूर्ण विराम लगाना है।

राज्य के स्वास्थ्य विभाग और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने साफ किया है कि यदि कोई व्यापारी, लाइसेंस प्राप्त डीलर होने के बावजूद भी बाहरी राज्य से दवा मंगवाता है, तो उसे हर एक लेन-देन का विस्तृत लेखा-जोखा (transaction record) प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

इस फैसले के पीछे सरकार की मंशा यह है कि राज्य के अंदर केवल वैध, प्रमाणित और निरीक्षणित चैनल से ही औषधि की आपूर्ति हो ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और दवा बाजार में पारदर्शिता लाई जा सके।

पृष्ठभूमि: क्यों जरूरी पड़ी यह सख्ती?

पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ समेत देशभर में नकली और घटिया दवाओं की बिक्री में भारी वृद्धि देखी गई है। केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बिकने वाली लगभग 3–4% दवाएं “सबस्टैंडर्ड” पाई जाती हैं। नकली एंटीबायोटिक, सिरप और दर्दनिवारक दवाओं के कारण न केवल हजारों मरीजों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ा, बल्कि मेडिकल उद्योग की विश्वसनीयता भी प्रभावित हुई।

छत्तीसगढ़ में हाल ही में गरियाबंद जिले में नकली कफ सिरप का बड़ा मामला सामने आया था, जिसने स्वास्थ्य विभाग को झकझोर दिया। इससे पहले भी कुछ थोक कारोबारी बिना अनुमति के दूसरे राज्यों से दवाएं मंगा रहे थे, जिनमें जांच के बाद अनियमितताएं पाई गईं। इसी पृष्ठभूमि में, राज्य औषधि नियंत्रण विभाग और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CMSCL) ने नई गाइडलाइन जारी की, जिससे अब यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी दवा राज्य में तभी बिकेगी जब वह स्थानीय डीलर चैनल से होकर आए।

क्या है नया नियम और कैसे लागू होगा?

नई नीति के तहत—

  • राज्य के सभी मेडिकल स्टोर, थोक दवा व्यापारी और डिस्ट्रिब्यूटर अब किसी अन्य राज्य से सीधे दवा नहीं खरीद सकेंगे।

  • दवा कंपनियों के राज्य में पंजीकृत डीलर से ही खरीदारी करनी होगी।

  • यदि कोई व्यापारी फिर भी बाहरी राज्य से दवा मंगवाता है, तो उसे उस लेन-देन का विस्तृत लेखा-जोखा, बिल, और माल परिवहन दस्तावेज विभाग को देना होगा।

  • इन दस्तावेजों की जांच FDA अधिकारियों द्वारा की जाएगी, ताकि हर बैच की ट्रेसबिलिटी (traceability) बनी रहे।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा —

“हमारा लक्ष्य कारोबारियों को परेशान करना नहीं, बल्कि दवा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाना है। यदि कोई थोक कारोबारी नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके लाइसेंस पर कार्रवाई की जाएगी।”

नकली दवाओं से क्यों बढ़ी चिंता?

नकली दवाओं का खतरा केवल आर्थिक नहीं बल्कि गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या भी बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, विकासशील देशों में हर वर्ष लगभग 10 लाख लोग नकली या सबस्टैंडर्ड दवाओं के सेवन से प्रभावित होते हैं।

छत्तीसगढ़ में भी ऐसी दवाओं के कारण कई बार उपचार विफलता (treatment failure) और प्रतिकूल प्रभाव (side effects) के मामले सामने आए हैं। हाल ही में कुछ निजी अस्पतालों में संदिग्ध आयरन इंजेक्शन और मस्कुलर पेन रिलीफ टैबलेट्स के बैच पाए गए थे, जिनकी गुणवत्ता रिपोर्ट में खामियां मिलीं। इसके बाद छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इन बैचों पर रोक लगाई और कंपनियों से स्पष्टीकरण मांगा।

कॉर्पोरेशन द्वारा जांचे गए बैच कोड RT24126 और RT25018 को सस्पेंड किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि दवाओं के पैकेजिंग व रंग में भिन्नता थी, जिससे छेड़छाड़ की आशंका बनी।

व्यापार पर क्या असर पड़ेगा?

नई नीति से सबसे अधिक असर उन थोक कारोबारियों पर पड़ेगा जो अब तक दूसरे राज्यों से सीधे सस्ती दवा मंगा कर अधिक मुनाफा कमाते थे। अब उन्हें राज्य के भीतर पंजीकृत डीलरों से ही खरीद करनी होगी। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह कदम लंबी अवधि में खुद कारोबारियों के लिए भी लाभदायक होगा क्योंकि इससे नकली दवाओं के मामलों में उनकी जिम्मेदारी कम होगी और बाजार में पारदर्शिता आएगी।

रायपुर के एक दवा व्यापारी ने बताया —

“पहले कई बार दूसरे राज्यों से सीधे दवाएं मंगाना आसान था, लेकिन अब हर खरीद का लेखा रखना पड़ेगा। हालांकि यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल है, पर इससे हम भी सुरक्षित रहेंगे क्योंकि बाद में कोई भी जांच में हमारा रिकॉर्ड साफ रहेगा।”

कैसे सुनिश्चित होगी दवाओं की गुणवत्ता?

राज्य सरकार ने गुणवत्ता निगरानी की तीन-स्तरीय प्रणाली शुरू की है—

  1. डीलर-स्तर पर दस्तावेज जांच: हर बैच का बिल, सप्लायर डिटेल, और कंपनी प्रमाणपत्र जमा करना अनिवार्य होगा।

  2. थोक और रिटेल स्तर पर निरीक्षण: FDA अधिकारी समय-समय पर मेडिकल स्टोर्स और गोदामों का निरीक्षण करेंगे।

  3. लैब परीक्षण: संदिग्ध दवाओं के सैंपल राज्य की प्रयोगशाला में परीक्षण हेतु भेजे जाएंगे।

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ने कहा —

“हमारी प्राथमिकता है कि राज्य के हर मरीज को सुरक्षित और प्रमाणित दवा मिले। अब हर दवा की ट्रैकिंग बैच नंबर से की जा सकेगी।”

कानूनी रूपरेखा और दंड प्रावधान

इस नीति के तहत दवा कारोबारियों पर कई कानूनी प्रावधान लागू होंगे। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और फार्मेसी एक्ट, 1948 के तहत—

  • गलत स्रोत से खरीदी गई या बिना बिल की दवा मिलने पर व्यापारी का लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है।

  • नकली या निम्न गुणवत्ता वाली दवा बेचने पर जुर्माना और कारावास, दोनों का प्रावधान है।

  • औषधि नियंत्रण विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कारोबारी इन नियमों का पालन नहीं करेगा तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है।

जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से प्रभाव

इस सख्ती का सबसे सकारात्मक प्रभाव जनता पर पड़ेगा। राज्य के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जब दवा वितरण की पूरी प्रणाली पारदर्शी होगी, तब मरीजों को सही, सुरक्षित और असरदार दवाएं मिलेंगी। इससे मरीजों का विश्वास बढ़ेगा, डॉक्टरों की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी और अस्पतालों में गलत उपचार के मामले घटेंगे।

रायपुर के एक वरिष्ठ फार्मासिस्ट का कहना है —

“अब हर दवा की सप्लाई का दस्तावेज उपलब्ध होगा, जिससे किसी भी समस्या की स्थिति में ट्रेसिंग और जांच तुरंत संभव होगी। यह एक दीर्घकालिक सुधार है।”

अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन सकता है छत्तीसगढ़

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बनेगी। दवा वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए राजस्थान, महाराष्ट्र और तमिलनाडु पहले ही इसी तरह के नियम लागू कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ में यह कदम “प्रिवेंटिव हेल्थकेयर” को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

राज्य स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अगर यह व्यवस्था सफल रहती है तो अगले चरण में ऑनलाइन फार्मेसी और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी इसी प्रकार की निगरानी लागू की जा सकती है।

भविष्य की चुनौतियाँ और संभावनाएँ

हालांकि यह नीति अपने आप में ठोस और आवश्यक है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं —

  • छोटे कस्बों के मेडिकल स्टोर्स को लॉजिस्टिक दिक्कतें आ सकती हैं।

  • राज्य के अंदर डीलर नेटवर्क को मजबूत करने में समय लगेगा।

  • कई पुराने कारोबारी नए नियमों को समझने और अपनाने में असमर्थ हो सकते हैं।

फिर भी, नीति-निर्माताओं का मानना है कि इन कठिनाइयों के बावजूद यह सुधार भारत की दवा आपूर्ति प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगा।

निष्कर्ष:

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गैर राज्यों से दवा खरीद पर लगाई गई रोक केवल प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य की सुरक्षा, औषधि उद्योग में पारदर्शिता और जनता के भरोसे को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इस नियम से न केवल नकली दवाओं की आपूर्ति पर अंकुश लगेगा, बल्कि राज्य के भीतर दवा वितरण का ढांचा भी और अधिक संगठित होगा।

आने वाले महीनों में इसका वास्तविक प्रभाव तब दिखेगा जब सभी कारोबारी इस प्रणाली को पूरी तरह अपनाएँगे और हर लेन-देन को पारदर्शी बनाएंगे। यह कदम यदि सही दिशा में लागू रहा, तो छत्तीसगढ़ भारत का पहला ऐसा राज्य बन सकता है जिसने दवा सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल प्रस्तुत किया।

स्रोत एवं संदर्भ:
  • छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CMSCL) रिपोर्ट, अक्टूबर 2025

  • खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) छत्तीसगढ़, सरकारी परिपत्र संख्या 342/2025

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट: Substandard and Falsified Medical Products in India, 2024

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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