छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: चार नए मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य परियोजनाओं के लिए ₹1,390 करोड़ की मंज़ूरी

छत्तीसगढ़ सरकार ने मनेंद्रगढ़, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा और गीदाम में चार नए मेडिकल कॉलेजों के लिए ₹1,390 करोड़ की मंज़ूरी दी है।

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ASHISH PRADHAN

10/26/20251 min read

छत्तीसगढ़ में चार नए मेडिकल कॉलेजों के लिए 1390 करोड़ की मंजूरी
छत्तीसगढ़ में चार नए मेडिकल कॉलेजों के लिए 1390 करोड़ की मंजूरी

छत्तीसगढ़ सरकार ने चार नए मेडिकल कॉलेज एवं स्वास्थ्य-प्रोजेक्ट्स के लिए रु 1,390 करोड़ की मंज़ूरी दी

परिचय:


केंद्रीय एवं राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों की अनुशंसा के बाद, छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने जबरदस्त पैमाने पर स्वास्थ्य-विकास का निर्णय लिया है। 23 अक्टूबर 2025 को राज्य के राजधानी रायपुर में आयोजित 51वीं बैठक में Chhattisgarh Medical Services Corporation Limited (CGMSC) की मंजूरी के तहत चार नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों एवं दो अतिरिक्त स्वास्थ्य-प्रोजेक्ट्स के लिए करीब रु 1,390 करोड़ की राशि स्वीकृत की गयी है।

यह राशि न केवल चिकित्सा-शिक्षा के विस्तार में मदद करेगी बल्कि राज्य में स्वास्थ्य-सेवाओं के विस्‍तार तथा गुणवत्ता सुधार की दिशा में भी अहम धक्का देगी। इस पहल का उद्देश्य है स्वास्थ्य-संवेदनशील एवं दूरदराज के इलाकों में चिकित्सा-शिक्षा तथा बेहतर अस्पताल सुविधाएं पहुँचाना। इस तरह, छत्तीसगढ़ सरकार ने यह संकेत दिया है कि अब स्वास्थ्य-इन्फ्रास्ट्रक्चर को राज्य विकास की प्राथमिकता में रखा जा रहा है।

पृष्ठभूमि एवं संदर्भ : स्वास्थ्य-चक्र और राज्य की चुनौतियाँ

छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहाँ जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र में रहता है, वहाँ स्वास्थ्य-सेवाओं तक पहुँच, डॉक्टर-नर्स की कमी और चिकित्सकीय शिक्षा की सीमित संख्या पहले से ही बड़ी समस्या रही है। इनमें शामिल हैं डायबिटीज़ (मधुमेह), मोटापा (ओबेसिटी) तथा संबंधित कॉमऑरबिड स्थितियाँ जैसे हृदय-रोग, गुर्दा रोग व उच्च रक्तचाप — इनकी चुनौतियाँ विशेष रूप से ग्रामीण-क्षेत्र में और अधिक तीव्र हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य-सर्वेक्षण तथा विभिन्न अध्ययन इस बात की ओर संकेत करते हैं कि मधुमेह तथा मोटापे के कारण उन राज्यों में जहाँ स्वास्थ्य-प्रणाली कमजोर है, रोग-भार (disease burden) बहुत अधिक है। चिकित्सा-शिक्षा एवं अस्पताल-सुविधाओं के अभाव से अनेक रोगियों को बेहतर इलाज-प्राप्ति में देरी होती है, जिससे जटिलताएँ बढ़ जाती हैं। ऐसी पृष्ठभूमि में, इन चार नए मेडिकल कॉलेजों तथा अन्य स्वास्थ्य-प्रोजेक्ट्स की स्वीकृति का मतलब सिर्फ इमारत बनाना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य-सिस्टम को सुदृढ़ करने का राष्ट्रीय रूप से महत्वपूर्ण कदम है।

इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य-विकास के लिए कई कल्याण-योजनाएँ शुरू की हैं, जैसे कि ‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ आदि, जिससे इलाज-खर्च में सहारा मिलता रहा है। इस तरह की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएँ इन मौजूदा पहलों को शक्ति प्रदान करेंगी और स्वास्थ्य-शिक्षा एवं सेवाओं के मिश्रित विकास में मदद करेंगी।

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स्वीकृत प्रोजेक्ट्स का स्वरूप : कहाँ, कितनी राशि, क्या बनेगा?

स्वीकृति के विवरण के अनुसार, चार नए मेडिकल कॉलेज तथा दो अन्य स्वास्थ्य-प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। निम्नलिखित बिंदुओं में इस योजना के प्रमुख तत्व दिए जा रहे हैं:

  • चार मेडिकल कॉलेजों का निर्माण होगा: मनेंद्रगढ़ (Manendragarh), कबीरधाम (Kabirdham), जांजगीर‑चांपा (Janjgir-Champa) तथा गीदाम (Geedam) में।

  • इस के अतिरिक्त एक 220-बेड अस्पताल मनेंद्रगढ़ में और एक आयुर्वेद कॉलेज एवं अस्पताल बिलासपुर में स्वीकृत हुआ है।

  • कॉलेजों के लिए क्रमश: रु 323.03 करोड़ (मनेंद्रगढ़), रु 318.27 करोड़ (कबीरधाम), रु 318.27 करोड़ (जांजगीर-चांपा) तथा रु 326.53 करोड़ (गीदाम) की राशि तय की गयी है।

  • कुल मिलाकर लगभग रु 1,390 करोड़ स्वीकृत की गयी है।

  • स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री और संबंधित अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि ये योजनाएँ राज्य में शिक्षा-सेवाओं तथा स्वास्थ्य-इन्फ्रास्ट्रक्चर को समान रूप से बढ़ावा देने की दिशा में केंद्रित होंगी।

यह विस्तार-योजना उन जिलों में हो रही है जहाँ पहले मेडिकल-कॉलेज नहीं थे या अस्पताल-सुविधाएँ पर्याप्त नहीं थीं, अतः इनका चयन रणनीतिक एवं आवश्यकता-आधारित है।

यह योजना क्यों महत्वपूर्ण है? — लाभ एवं प्रभाव

इस तरह की बड़ी निवेश-राशि एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की पहल स्वास्थ्य-सेवाओं की पहुँच तथा गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए बेहद ज़रूरी है निम्नलिखित बिंदुओं में इसका महत्व स्पष्ट होता है:

  • चिकित्सा-शिक्षा को बढ़ावा : नए मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से राज्य में मेडिकल स्नातक (MBBS) तथा बाद-में संभवतः स्नातकोत्तर (PG) सीटों में वृद्धि होगी, जिससे डॉक्टरों-विशेषज्ञों की संख्या बढ़ेगी एवं दूर-दराज के इलाकों में नियुक्ति संभव होगी।

  • स्वास्थ्य-सेवाओं की उपलब्धता में सुधार : 220-बेड अस्पताल तथा आयुर्वेद कॉलेज-अस्पताल की सुविधा से ग्रामीण/आदिवासी इलाकों में ख़ुद-से बेहतर इलाज मिल सकेगा जिससे मेट्रो शहरों तक यात्रा की आवश्यकता कम होगी।

  • क्षमता एवं गुणात्मक सुधार : आधुनिक भवन, प्रयोगशालाएँ, उपकरण-संसाधन व विशेषज्ञ डॉक्टरों के आने-जाने से स्वास्थ्य-इन्फ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता में सुधार होगा।

  • रोजगार-सृजन एवं क्षेत्र-विकास : मेडिकल-कॉलेज तथा अस्पतालों के निर्माण-समय में कामगारों के लिए अवसर सृजित होंगे, और बाद में चिकित्सक, नर्स, तकनीशियन आदि की नियुक्ति से स्थायी रोजगार बढ़ेगा।

  • स्वास्थ्य-सुरक्षा एवं सामाजिक कल्याण : बेहतर स्वास्थ्य-इन्फ्रास्ट्रक्चर से राज्य के नागरिकों को उच्च-स्तरीय उपचार उपलब्ध होगा, जिससे रोग-भार कम होगा और जीवन-मान बेहतर होगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है: “ये पहल न सिर्फ चिकित्सा-शिक्षा व अस्पताल-बुनियादी ढांचे को बढ़ाएगी बल्कि राज्य में स्वास्थ्य-सेवाओं की समान पहुँच सुनिश्चित करेगी।”

References:

  • “New Medical Colleges and Hospitals Coming to Chhattisgarh”, Saralnama, 23 October 2025.

  • “Chhattisgarh Approves Tender Rates for 4 New Medical Colleges Among 6 Healthcare Projects”, Hindustan Times, 23 October 2025.

  • “Rs 1,077 crore approved for three new medical colleges in Chhattisgarh”, Times of India, 5 October 2025.

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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