क्या रोज़ाना थोड़ी सी डार्क चॉकलेट आपकी नसों को रख सकती है स्वस्थ? जानिए नया वैज्ञानिक खुलासा
नए अंतरराष्ट्रीय शोध के अनुसार, डार्क चॉकलेट और कोको में पाए जाने वाले फ्लेवनॉल्स रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं, विशेषकर उन लोगों में जो लंबे समय तक बैठे रहते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ सरे के अध्ययन में पाया गया कि कोको फ्लेवनॉल्स हृदय स्वास्थ्य, ब्लड फ्लो और वास्कुलर लचीलापन सुधारने में सहायक हैं। जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं और कितना सेवन सही है।
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क्या रोज़ाना थोड़ी सी कोको या डार्क चॉकलेट आपकी नसों की सेहत सुधार सकती है?
परिचय (Introduction):
जब भी हम चॉकलेट का नाम सुनते हैं, तो हमारे मन में सबसे पहले मिठास, आनंद और कभी-कभी ‘गिल्ट’ (guilt) की भावना आती है। लेकिन हाल ही में सामने आए एक नए वैज्ञानिक शोध ने इस धारणा को आंशिक रूप से बदल दिया है। यह शोध इंगित करता है कि कोको (Cocoa) में पाए जाने वाले फ्लेवनॉल्स (Flavanols) नामक यौगिक, लंबे समय तक बैठे रहने के कारण होने वाले रक्त वाहिका (blood vessels) के नुकसान से सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। यह खोज विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, जो घंटों कंप्यूटर के सामने या दफ्तर में बैठकर काम करते हैं, क्योंकि लंबे समय तक बैठे रहने को आज ‘नई धूम्रपान की आदत’ (new smoking) कहा जाने लगा है — यानी यह धीरे-धीरे शरीर के हृदय तंत्र पर गंभीर प्रभाव डालता है।
अमेरिका और यूरोप के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में यह पाया गया कि कोको में मौजूद फ्लेवनॉल्स शरीर की रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता (vascular function) को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं, खासकर तब जब व्यक्ति लंबे समय तक निष्क्रिय स्थिति में बैठा हो। यह अध्ययन न केवल चॉकलेट प्रेमियों के लिए राहत की खबर है बल्कि कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य (cardiovascular health) पर नए दृष्टिकोण खोलता है।
पृष्ठभूमि: क्यों ‘बैठे रहना’ हमारी सेहत के लिए इतना हानिकारक है?
आधुनिक जीवनशैली में कामकाज के स्वरूप ने इंसान को पहले से कहीं अधिक निष्क्रिय बना दिया है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में शहरी आबादी का लगभग 60% हिस्सा प्रतिदिन औसतन 8-10 घंटे बैठकर काम करता है, चाहे वह दफ्तर हो, वाहन हो या घर का वातावरण। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी चेतावनी दी है कि अत्यधिक बैठने की आदत हृदय रोग, मधुमेह (diabetes), मोटापा (obesity) और रक्तचाप से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को दोगुना कर देती है।
जब शरीर लंबे समय तक निष्क्रिय रहता है, तो रक्त प्रवाह धीमा पड़ जाता है, जिससे धमनियों की दीवारों पर सूजन और क्षति होने लगती है। परिणामस्वरूप, यह स्थिति एथेरोस्क्लेरोसिस (atherosclerosis) यानी धमनियों में अवरोध और कठोरता का कारण बन सकती है, जो आगे चलकर हृदयाघात (heart attack) या स्ट्रोक (stroke) का जोखिम बढ़ाती है।
यहीं पर वैज्ञानिकों की नज़र कोको में पाए जाने वाले फ्लेवनॉल्स पर पड़ी — जो प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स हैं और रक्त प्रवाह को सुधारने, रक्त वाहिकाओं को लचीला बनाए रखने तथा ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (oxidative stress) को कम करने में भूमिका निभाते हैं।
कोको के फ्लेवनॉल्स: एक प्राकृतिक औषधीय तत्व
कोको के फ्लेवनॉल्स, विशेष रूप से एपिकैटेचिन (epicatechin) और कैटेचिन (catechin), पौधों में पाए जाने वाले पॉलीफेनॉल्स की एक श्रेणी हैं, जिनके बारे में यह ज्ञात है कि वे एंडोथेलियल फंक्शन (endothelial function) यानी रक्त वाहिकाओं की भीतरी परत की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं।
वैज्ञानिक रूप से यह पाया गया है कि फ्लेवनॉल्स नाइट्रिक ऑक्साइड (Nitric Oxide) के उत्पादन को बढ़ाते हैं — यह एक ऐसा यौगिक है जो रक्त वाहिकाओं को फैलाने, रक्त प्रवाह को सुचारु रखने और रक्तचाप को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है।
लंदन की यूनिवर्सिटी ऑफ सरे (University of Surrey) में किए गए हालिया अध्ययन में 40 स्वस्थ प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिनसे यह जानने की कोशिश की गई कि लंबे समय तक बैठे रहने के बाद कोको फ्लेवनॉल्स का क्या असर होता है। शोध में पाया गया कि जो प्रतिभागी कोको फ्लेवनॉल्स से भरपूर पेय पी रहे थे, उनके रक्त प्रवाह की दक्षता उन लोगों की तुलना में बेहतर रही जिन्होंने साधारण पेय लिया था।
क्या डार्क चॉकलेट वास्तव में उतनी फायदेमंद है जितनी कोको?
कई लोग यह समझ लेते हैं कि डार्क चॉकलेट का हर टुकड़ा स्वास्थ्यवर्धक होता है, लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। डार्क चॉकलेट में कोको की मात्रा जितनी अधिक होती है, उतना ही उसमें फ्लेवनॉल्स का स्तर अधिक होता है।
हालांकि, बाज़ार में मिलने वाली कई चॉकलेट्स में शुगर, फैट और मिल्क सॉलिड्स की मात्रा अधिक होती है, जिससे स्वास्थ्य लाभ कम और नुकसान अधिक हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आप कम से कम 70% कोको युक्त डार्क चॉकलेट का सीमित सेवन करते हैं — यानी 10-20 ग्राम प्रतिदिन, तो यह रक्तचाप को नियंत्रित करने, सूजन को कम करने और हृदय की कार्यक्षमता सुधारने में मदद कर सकती है।
दिल्ली स्थित कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संदीप माथुर कहते हैं —
“कोको फ्लेवनॉल्स हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन यह तभी कारगर है जब सेवन नियंत्रित और संतुलित मात्रा में किया जाए। बाजार की हर चॉकलेट ‘हेल्दी’ नहीं होती; इसलिए उपभोक्ताओं को लेबल पढ़ने की आदत डालनी चाहिए।”
लंबे समय तक बैठे रहने के प्रभाव और फ्लेवनॉल्स की भूमिका: शोध क्या कहता है?
अध्ययन में पाया गया कि जब प्रतिभागियों को 6 घंटे लगातार बैठे रहने के लिए कहा गया, तो उनके फेमोरल आर्टरी (जांघ की प्रमुख धमनी) की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। लेकिन जिन प्रतिभागियों ने कोको फ्लेवनॉल ड्रिंक का सेवन किया था, उनमें यह गिरावट बहुत कम रही।
यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि फ्लेवनॉल्स रक्त वाहिकाओं के एंडोथेलियल सेल्स को सक्रिय रख सकते हैं, जिससे रक्त प्रवाह बाधित नहीं होता और वेसोडाइलेशन (vasodilation) यानी रक्त वाहिकाओं का फैलाव सुचारु बना रहता है।
अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन (AJCN) में प्रकाशित इस अध्ययन ने इस बात पर भी जोर दिया कि फ्लेवनॉल्स के लाभ व्यायाम या दवा के विकल्प नहीं हैं, बल्कि यह एक सहायक तत्व की तरह काम करते हैं जो बैठे-बैठे जीवनशैली से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
फ्लेवनॉल्स बनाम औषधीय विकल्प: क्या यह भविष्य की ‘प्राकृतिक थेरेपी’ हो सकती है?
वर्तमान में हृदय स्वास्थ्य सुधारने के लिए स्टैटिन्स, ब्लड थिनर्स और नाइट्रेट बेस्ड ड्रग्स का उपयोग किया जाता है, लेकिन इन दवाओं के साथ साइड-इफेक्ट्स भी जुड़े होते हैं। दूसरी ओर, कोको जैसे प्राकृतिक स्रोत दीर्घकालिक उपयोग के लिए सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। हालांकि, यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि कोको फ्लेवनॉल्स चिकित्सा उपचार का विकल्प बन सकते हैं — मगर यह निश्चित रूप से एक ‘सपोर्टिव न्यूट्रास्यूटिकल’ (supportive nutraceutical) के रूप में अपनी जगह बना रहे हैं।
डॉ. एलिज़ाबेथ हार्पर, जो यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग (UK) में न्यूट्रिशनल बायोकेमिस्ट्री की प्रोफेसर हैं, कहती हैं —
“हम यह नहीं कह रहे कि कोको चमत्कार है, लेकिन यह शरीर में वास्कुलर हेल्थ को बनाए रखने के लिए एक सुरक्षित और प्राकृतिक मार्ग प्रदान कर सकता है। भविष्य में हम इसे कार्डियोवस्कुलर रोगों की रोकथाम में एक सहायक तत्व के रूप में उपयोग कर सकते हैं।”
भारत में संभावनाएं और आहार संबंधी दृष्टिकोण
भारत में डायबिटीज और मोटापा (obesity) की बढ़ती दर को देखते हुए, कोको फ्लेवनॉल्स पर आधारित स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों का बाज़ार तेजी से उभर रहा है।
2024 में प्रकाशित इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 10 करोड़ वयस्क डायबिटीज से प्रभावित हैं, जबकि 13 करोड़ से अधिक लोग प्रीडायबिटिक स्थिति में हैं। ऐसे में यदि कोको जैसे प्राकृतिक तत्व रक्त प्रवाह, इंसुलिन संवेदनशीलता और सूजन नियंत्रण में सहायता कर सकते हैं, तो यह जीवनशैली संबंधी बीमारियों की रोकथाम में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion): क्या रोज़ की डार्क चॉकलेट आपकी नसों की रक्षा कर सकती है?
नए शोध स्पष्ट रूप से यह दिखाते हैं कि कोको फ्लेवनॉल्स रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद करते हैं, विशेषकर तब जब व्यक्ति लंबे समय तक बैठे रहे। हालांकि, यह ‘चॉकलेट खाने की खुली छूट’ नहीं है, बल्कि संतुलित मात्रा में, बिना अतिरिक्त चीनी या फैट वाली डार्क चॉकलेट को अपने आहार में शामिल करने का संकेत है।
फ्लेवनॉल्स का यह गुण भविष्य में कार्डियोवस्कुलर रोगों की रोकथाम, डायबिटीज मैनेजमेंट और वजन नियंत्रण के क्षेत्र में नई संभावनाएँ खोल सकता है। जैसे-जैसे इस दिशा में शोध बढ़ेगा, कोको को शायद “दिल का प्राकृतिक मित्र” (Heart’s Natural Ally) कहा जाने लगे।
संदर्भ:
University of Surrey, UK — Flavanols and Vascular Function Study, 2025
American Journal of Clinical Nutrition, Volume 119, 2025
World Health Organization (WHO) — Sedentary Lifestyle and Cardiovascular Risk Report, 2024
Indian Council of Medical Research (ICMR) — Diabetes & Obesity Report, 2024
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।