Lilly और NVIDIA का ऐतिहासिक गठबंधन: ए.आई. सुपरकंप्यूटर से दवा विकास में नई क्रांति
Eli Lilly और NVIDIA ने मिलकर दुनिया का सबसे शक्तिशाली ए.आई.-संचालित सुपरकंप्यूटर बनाने की घोषणा की है, जो दवा विकास को तेज, सटीक और किफायती बनाएगा। यह पहल मधुमेह (diabetes) और मोटापा (obesity) जैसी जटिल बीमारियों के उपचार में गेमचेंजर साबित हो सकती है। इंडियानापॉलिस में स्थापित होने वाला यह “AI factory” हजारों GPU पर आधारित होगा और दवा खोज प्रक्रिया को वर्षों से महीनों तक घटाने की क्षमता रखेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम “obesity drug”, “weight loss injection” और “diabetes treatment” जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।
INNOVATIONLATEST NEWS


एआई-संचालित दवा खोज की दिशा में बड़ा कदम: Eli Lilly और NVIDIA की ऐतिहासिक साझेदारी
परिचय
अमेरिकी बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी Eli Lilly and Company (लीली) ने टेक्नोलॉजी दिग्गज NVIDIA Corporation (एनविडिया) के साथ हाथ मिलाया है ताकि एक ग्राउंड-ब्रेकिंग एआई-संचालित सुपरकंप्यूटर तैयार किया जा सके।
इस पहल का उद्देश्य दवा खोज (Drug Discovery) और विकास की प्रक्रिया को तेज़, अधिक कुशल और कम लागत वाला बनाना है।
कब और कहाँ हुई यह घोषणा?
यह ऐतिहासिक साझेदारी 28 अक्टूबर 2025 को आधिकारिक रूप से घोषित की गई।
सुपरकंप्यूटर का निर्माण लीली के इंडियानापॉलिस (अमेरिका) स्थित डेटा-सेंटर में किया जा रहा है।
साझेदारी के पीछे की मुख्य सोच
आज जब मधुमेह (Diabetes) और मोटापा (Obesity) जैसी जटिल स्वास्थ्य चुनौतियाँ वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही हैं, तब पारंपरिक दवा-विकास प्रक्रिया न केवल लंबी और महंगी है बल्कि जोखिम-भरी भी है।
इसी कारण लीली और एनविडिया ने मिलकर यह कदम उठाया है — ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और बड़े-डेटा विश्लेषण (Big Data Analytics) के ज़रिए नई दवाओं की खोज और परीक्षण को तेजी दी जा सके।
कैसे काम करेगा यह एआई सुपरकंप्यूटर?
यह सुपरकंप्यूटर हजारों GPU से लैस होगा और नवीनतम AI मॉडल्स पर आधारित होगा।
इसकी मदद से शोधकर्ता:
जीनोमिक (Genomic) और प्रोटीन-डेटा का विश्लेषण कर पाएंगे,
दवाओं की आणविक (Molecular) संरचना को सटीकता से मॉडल कर सकेंगे,
और ट्रायल प्रक्रिया को वास्तविक समय (Real-Time) में बेहतर बना सकेंगे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ: मधुमेह-मोटापा की चुनौतियाँ एवं दवा-विकास की जटिलता
मधुमेह और मोटापा की वैश्विक तस्वीर
आज विश्व के स्वास्थ्य-प्रश्नों में मधुमेह (diabetes) और मोटापा (obesity) प्रमुख रूप से उभरे हुए हैं। मोटापे के कारण इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ता है, ग्लूकोज नियंत्रण बाधित होता है, जिससे टाइप-2 मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त मोटापा हृदय रोग, जटिल मेटाबॉलिक विकार, तथा जीवन-शैली सम्बन्धी बीमारियों को जन्म देता है। ऐसे में “diabetes treatment” व “obesity drug” का विकास सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए जरूरी हो गया है।
दवा-विकास के दृष्टिकोण से देखा जाए तो, पारंपरिक “drug development” प्रक्रिया में प्रयोगशाला-अनुभव, क्लीनिकल ट्रायल, नियामक स्वीकृति आदि शामिल होते हैं और यह अक्सर लगभग 10-15 वर्ष या उससे अधिक समय ले लेती है। इसके साथ-साथ आर्थिक लागत काफी भारी होती है, विफलता का जोखिम अधिक होता है, और रोगियों तक दवाएँ पहुँचने में लंबा समय लगता है। इस तरह, विशेष रूप से मोटापा एवं मधुमेह जैसी जटिल स्थितियों में दवा-विकास की चुनौतियाँ और भी बढ़ जाती हैं: नए मॉलिक्यूल्स की ढाँचा-रचना, व्यक्तिगत रोगियों की प्रतिक्रिया-विविधता, दुष्प्रभाव (side-effects), मूल्य निर्धारण व पहुँच-समस्या इत्यादि।
उसी संदर्भ में, तकनीक-आधारित विकल्प — जैसे ए.आई.-मॉडल, मशीन-लर्निंग, बड़े-डेटा विश्लेषण — आज दवा उद्योग में तेजी से प्रवेश कर रही हैं। इसका उद्देश्य है: शोध-प्रक्रिया को तेज करना, सफलता-दर को बढ़ाना, लागत को कम करना तथा रोगियों तक सुरक्षित व प्रभावी दवाओं को sooner पहुँचाना।
पहले से मौजूद दवाओं का महत्व: लिराग्लूटाइड लाभ (liraglutide benefits)
उदाहरण के लिए, दवाओं जैसे Liraglutide ने “weight loss injection” के रूप में क्षेत्रों में माह मशहूरि पाई है। यह मूलतः ग्लूकोज नियंत्रण तथा मधुमेह उपचार के लिए विकसित हुई थी, पर मोटापा-उपचार में भी महत्वपूर्ण लाभ दिखा चुकी है। इन दवाओं के द्वारा वज़न-घटाने, इंसुलिन संवेदनशीलता सुधारने, ग्लूकोज नियंत्रण स्थिर रखने जैसे लाभ सामने आए हैं। हालांकि, इस तरह की दवाओं को विकसित करना, सुरक्षित प्रमाणित करना, प्रभावकारिता दिखाना और बढ़-चढ़ कर स्रोत-मूल्य निर्धारण करना आसान नहीं रहा। इसलिए, नई तकनीक-सहायता वाले प्रयासों को आज आवश्यकता का रूप मिल चुका है।
यह साझेदारी क्यों महत्वपूर्ण है?
“ए.आई. फैक्ट्री” और सुपरकंप्यूटर सिस्टम
लीली-एनविडिया के समझौते के तहत, लीली ने बताया है कि वह फार्मा उद्योग की सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर प्रणाली बनाएगी — जिसमें एनविडिया के DGX SuperPOD प्लेटफॉर्म व DGX B300 जीपीयू-सिस्टम्स शामिल होंगे। यह सिस्टम “AI factory” के रूप में काम करेगी — जहाँ डेटा इनजेक्शन, मॉडल-ट्रेनिंग, हाई-वॉल्यूम इनफरेंस एवं फाइन-ट्यूनिंग तक पूरी प्रक्रिया एकीकृत होगी। उदाहरण के लिए, इस सिस्टम में 1,016 एनविडिया Blackwell Ultra GPUs शामिल हैं, जो प्रति सेकंड 9 क्विंटिलियन से अधिक मैथ समस्याएं हल करने की क्षमता रखते हैं।
दवा-विकास चक्र में गति व कुशलता
इस तरह के सुपरकंप्यूटर-आधारित प्लेटफॉर्म से अपेक्षा यह है कि न केवल नए मॉलिक्यूल्स की खोज तेज होगी, बल्कि विकास-चक्र (development cycle) में लगने वाला समय कम होगा, और क्लीनिकल ट्रायल्स व उत्पादन-मंच (manufacturing) में भी सुधार संभव होगा। प्रेस विज्ञप्ति में लीली ने कहा है कि यह प्रणाली मिलियन-से अधिक प्रयोगों पर प्रशिक्षण ले सकती है, जिससे मॉडलों को हजारों संभावित दवाओं, जैविक पथों (biological pathways) तथा मापदंडों पर परीक्षण-अनुकूलन वाला वातावरण मिलेगा।
इसके अलावा, यह सुपरकंप्यूटर 100 % नवीकरणीय ऊर्जा पर चलेगा तथा लीली की मौजूदा चिल्ड-वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करेगा, जो पर्यावरण-सततता का पक्ष भी दर्शाता है।
इस प्रकार, “US launch” से पहले दवा-विकास प्रक्रिया में सुरक्षा, लागत-प्रभावशीलता व गति सभी में संभावित सुधार दिखने लगा है।
अमेरिका में लॉन्च (US Launch) एवं आगे की राह
लीली ने घोषणा की है कि यह सुपरकंप्यूटर अमेरिका में अपने डेटा-सेंटर में रखा जाएगा और साल की शुरुआत में परिचालन में आ जाएगा। जब नई दवाएँ क्लीनिकल ट्रायल में सफल होंगी, तब अमेरिका में उनकी “US launch” प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज होगी — और इसके बाद अन्य देशों में विस्तार होगा। इस तरह यह गठबंधन अमेरिका-केंद्रित शुरुआत के बाद वैश्विक बाजारों में भी प्रतिस्पर्धा-क्षेत्र तैयार करेगा।
क्लीनिकल ट्रायल्स, जोखिम और निर्माण प्रक्रिया
क्लीनिकल ट्रायल्स में ए.आई. की भूमिका
दवा विकास में क्लीनिकल ट्रायल्स केंद्रीय भूमिका निभाते हैं: दवा की सुरक्षा (safety), प्रभावकारिता (efficacy), उपयुक्त रोगी-सेगमेंटेशन, दुष्प्रभावों की निगरानी आदि। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से लीली को यह अवसर मिल रहा है कि वह क्लीनिकल ट्रायल डिज़ाइन और रोगी चयन में ए.आई.-सहायता ले सके — जैसे रोगियों को उनकी जीनोमिक प्रोफाइल, जीवनशैली, अन्य चिकित्सकीय स्थितियों के आधार पर वर्गीकृत करना।
इससे ट्रायल्स में सुधार की संभावना बढ़ सकती है और विफलता-दर कम हो सकती है।
हालाँकि, यह ध्यान देने योग्य है कि ए.आई.-सहायता के बावजूद दवा विकास में अभी भी कई वैज्ञानिक अनिश्चितताएँ बनी हुई हैं। लीली ने स्वयं चेतावनी दी है कि इस तरह के पहल में “forward-looking statements” शामिल हैं और परिणाम की गारंटी नहीं दी जा सकती।
संभावित जोखिम और दुष्प्रभाव
किसी भी नई दवा का निर्माण जोखिम-मुक्त नहीं है। नई दवाओं में सामान्यतः दुष्प्रभाव (side-effects) की संभावना होती है, ट्रायल में अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकते, बाजार-स्वीकृति व मूल्य निर्धारण चुनौतियाँ हो सकती हैं। विशेष रूप से मोटापे-उपचार में देखा गया है कि दवाओं के प्रयोग से कभी-कभी जिगर, गुर्दा, पैनक्रियास पर असर हो सकता है।
इस तरह की संभावनाओं को कम करने के लिए बेहतर चयन-प्रक्रियाएं व निगरानी मॉडल आवश्यक हैं।
ए.आई. मॉडल इन जोखिमों को पहले से पहचानने में मदद कर सकते हैं — किन्तु पूरी तरह समाप्त नहीं। इसलिए शोध-प्रक्रिया व क्लीनिकल मॉनिटरिंग दोनों महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
निर्माण एवं वितरण प्रक्रिया
दवा सिर्फ खोजने तक सीमित नहीं है — उसे बड़े पैमाने पर निर्मित करना, सुरक्षित वितरण सुनिश्चित करना एवं रोगियों तक पहुँचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। लीली-एनविडिया के गठबंधन में यह बात ध्यान में लाई गई है कि सुपरकंप्यूटर प्रणाली सिर्फ खोज-अनुसंधान नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, मेडिकल इमेजिंग, डिजिटल ट्विन्स आदि को भी समर्थ करेगी।
उदाहरण के लिए, मैन्युफैक्चरिंग लाइनों का “डिजिटल ट्विन” बनाना, रोबोटिक्स-सहायता से उत्पादन स्थिर करना, निष्क्रिय समय (downtime) को कम करना — ये सब इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से संभव हो सकते हैं। यह वितरण-साख (supply chain) को अधिक भरोसायोग्य व लचीला बना सकता है। जब यह हो सकेगा, तब “US launch” के बाद वैश्विक बाजारों में नई दवाओं का प्रवेश तेजी से संभव होगा।
भारत और दक्षिण एशिया में अवसर व चुनौतियाँ
भारत में मधुमेह-मोटापा का बढ़ता बोझ
भारत में मधुमेह व मोटापे की समस्या बहुत तीव्र गति से बढ़ रही है। especially शहरी इलाकों में जीवनशैली, खाद्य-परिवर्तन, कम शारीरिक गतिविधि आदि कारणों से मोटापा और टाइप 2 मधुमेह की स्थिति युवा-वर्ग में भी बढ़ रही है। इस संदर्भ में “diabetes treatment” और “obesity drug” की आवश्यकता खासी रूप से बढ़ गई है।
यदि लीली-एनविडिया का ए.आई.-सहायता वाला प्रयास सफल हुआ, तो भारत जैसे बाजारों में भी इन नए उपचारों का आगमन अपेक्षाकृत जल्दी हो सकता है — बशर्ते कि नियामक-प्रक्रिया, मूल्य-व्यवस्था व वितरण-मॉडल उपयुक्त हों।
अवसर और चुनौतियाँ
यह गठबंधन भारत के लिए एक अवसर प्रस्तुत करता है कि वह वैश्विक दवा-खोज की दिशा में शामिल हो सके — ए.आई.-सहायता वाले मॉडल, ट्रायल साझेदारी, स्थानीय उत्पादन इत्यादि।
परन्तु चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं: लागत, ट्रायल-इन्फ्रास्ट्रक्चर, मूल्य निर्धारण, वितरण-लॉजिस्टिक्स और मरीज-सचेतना (patient awareness) — ये सभी बाधाएँ हो सकती हैं। इसलिए भारत में इस तरह की पहल को सफल बनाने के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी, नीति-सहायता व स्थानीय-अनुकूलन आवश्यक होंगे।
निष्कर्ष
इस प्रकार, लीली-एनविडिया की यह साझेदारी चिकित्सा-अनुसंधान और दवा-विकास की दिशा में एक नयी क्रांति का संकेत है — जहाँ ए.आई. सुपरकंप्यूटर-आधारित “AI factory” पुराने प्रतिमानों (trial-and-error, लंबी-विकास-चक्र) को चुनौती दे रही है। भविष्य में इसके निम्न-लिखित प्रभाव देखने को मिल सकते हैं:
रोगियों को तेजी से नए उपचार मिलने की संभावना बढ़ सकती है — विशेष रूप से मधुमेह व मोटापा के मामलों में, जहाँ आज विकल्प सीमित हैं।
भारत सहित विकासशील बाजारों में नवीन दवाओं का प्रवेश समय-पूर्व हो सकता है, बशर्ते नियामक व मूल्य-मॉडल सहयोग दें।
दवा कंपनियों के लिए खर्च व समय में कमी संभव हो सकती है, जिससे बेहतर दवाओं की डिज़ाइन-कुशलता बढ़ सकती है।
लेकिन इसके साथ-साथ, सुरक्षा, दुष्प्रभाव, पहुँच-समानता जैसे मुद्दे भी सामने आएँगे — जिन्हें हल करना आवश्यक हो जाएगा।
विशेष रूप से भारत में यह अहम होगा कि नई “obesity drug” या “weight loss injection” केवल अमीर तबकों तक सीमित न रह जाएँ, बल्कि जनसाधारण तक पहुँचें। इस दिशा में नियामक सहजता, स्थानीय-डेटा समायोजन और मूल्य-सुलभता प्रमुख भूमिका निभाएँगे।
अंततः, यह साझेदारी यह संदेश देती है: ए.आई. अब सिर्फ भविष्य की कल्पना नहीं, बल्कि आज की वास्तविकता बन चुका है, और यदि सही दिशा में उपयोग किया जाए, तो यह रोगियों की जिंदगी में सार्थक परिवर्तन ला सकता है।
स्रोत एवं संदर्भ
“Lilly partners with NVIDIA to build the industry’s most powerful AI supercomputer, supercharging medicine discovery and delivery for patients” — Eli Lilly press release, 28 Oct 2025.
“Lilly partners with Nvidia on AI supercomputer to speed up drug development” — Reuters, 28 Oct 2025.
“Lilly Deploys World’s Largest, Most Powerful AI Factory for Drug Discovery Using NVIDIA Blackwell-Based DGX SuperPOD” — NVIDIA Blog, 28 Oct 2025.
“J&J, Lilly Crest AI Wave With Nvidia Partnerships” — BioSpace, 29 Oct 2025.
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।
Subscribe to our newsletter
Get the latest Health news in your box.