नकली स्वास्थ्य उत्पादों से सतर्क रहें: हर्बल लाइफ इंडिया की नई जागरूकता पहल

भारत में नकली और अवैध स्वास्थ्य उत्पाद तेजी से बढ़ रहे हैं। हर्बल लाइफ इंडिया की नई जागरूकता पहल, FSSAI मानक, असली जोखिम और उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित पोषण से जुड़े जरूरी तथ्य।

PHARMA NEWS

ASHISH PRADHAN

12/23/20251 min read

Herbalife India's initiative A message of caution against counterfeit nutritional products.
Herbalife India's initiative A message of caution against counterfeit nutritional products.

भूमिका

भारत में स्वास्थ्य और पोषण उत्पादों का बाज़ार पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से विस्तार कर रहा है। बेहतर फिटनेस, वज़न प्रबंधन, इम्युनिटी और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव की चाह में करोड़ों उपभोक्ता सप्लीमेंट्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन इस बढ़ती मांग के साथ-साथ नकली, अवैध और गैर-प्रमाणित स्वास्थ्य उत्पादों का खतरा भी गंभीर रूप ले चुका है।

ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया और अनधिकृत बिक्री चैनलों के ज़रिए ऐसे उत्पादों की आसान उपलब्धता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। सस्ते दाम, त्वरित या “चमत्कारी” लाभ के दावे और भ्रामक विज्ञापन अक्सर उपभोक्ताओं को आकर्षित करते हैं, जबकि इनके पीछे न तो वैज्ञानिक प्रमाण होते हैं और न ही नियामक स्वीकृति। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

इन्हीं बढ़ती चिंताओं के बीच, हर्बल लाइफ इंडिया ने एक नई जागरूकता पहल की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य केवल उत्पादों को लेकर जानकारी देना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को यह समझाना है कि स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े फैसले भावनाओं या प्रचार के आधार पर नहीं, बल्कि प्रामाणिक, प्रमाणित और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर ही किए जाने चाहिए।

यह लेख हर्बल लाइफ इंडिया की इस पहल को व्यापक सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य संदर्भ में रखता है। साथ ही, नकली स्वास्थ्य उत्पादों से जुड़े वास्तविक जोखिमों को रेखांकित करता है, भारत में मौजूद नियामक ढांचे की भूमिका को स्पष्ट करता है और आम पाठकों के लिए सुरक्षित व समझदारी भरे विकल्प चुनने से जुड़ी व्यावहारिक, तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करता है।

भारत में स्वास्थ्य और पोषण उत्पादों का बढ़ता बाज़ार: एक संदर्भ

भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, जैसे मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग और पोषण की कमी, ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ाया है। इसी जागरूकता के कारण डाइटरी सप्लीमेंट्स, प्रोटीन पाउडर, विटामिन-मिनरल सप्लीमेंट्स और हर्बल उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकारी और स्वतंत्र शोध रिपोर्टें यह संकेत देती हैं कि यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में और विस्तार करेगा।

हालांकि, बाज़ार के इस विस्तार के साथ एक समानांतर समस्या भी उभरी है—नकली और अवैध उत्पादों की बढ़ती मौजूदगी। कई बार ये उत्पाद बिना किसी वैज्ञानिक परीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण या नियामक स्वीकृति के बाज़ार में उपलब्ध करा दिए जाते हैं, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर सीधा और दीर्घकालिक खतरा उत्पन्न हो सकता है।

हर्बल लाइफ इंडिया की जागरूकता पहल: उद्देश्य और दृष्टि

हर्बल लाइफ इंडिया की नई जागरूकता पहल का मूल उद्देश्य उपभोक्ताओं को केवल उत्पाद बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षित करना और सशक्त बनाना है। कंपनी का कहना है कि स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण तत्व भरोसा है, और यह भरोसा तभी बनता है जब उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और वैज्ञानिक आधार स्पष्ट हों।

इस पहल के माध्यम से उपभोक्ताओं को यह बताया जा रहा है कि:

  • किसी भी स्वास्थ्य या पोषण उत्पाद को खरीदने से पहले उसके लेबल, प्रमाणन और स्रोत की जांच क्यों आवश्यक है।

  • “त्वरित परिणाम” या “चमत्कारी लाभ” जैसे दावों से सावधान रहना क्यों जरूरी है।

  • केवल अधिकृत विक्रेताओं और विश्वसनीय ब्रांड्स से उत्पाद खरीदना स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए क्यों अहम है।

कंपनी प्रतिनिधियों के अनुसार, यह पहल उपभोक्ताओं को सही जानकारी देकर उन्हें नकली उत्पादों के जाल से बचाने का एक प्रयास है।

नकली और अवैध स्वास्थ्य उत्पाद: वास्तविक स्वास्थ्य जोखिम

नकली स्वास्थ्य उत्पादों से जुड़े जोखिम केवल सैद्धांतिक नहीं हैं। चिकित्सकीय साहित्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों की रिपोर्ट्स यह दर्शाती हैं कि ऐसे उत्पादों के सेवन से कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, नकली उत्पादों में अक्सर:

  • गलत या अघोषित घटक शामिल होते हैं,

  • सक्रिय तत्वों की मात्रा मानकों से अधिक या कम हो सकती है,

  • और कई बार प्रतिबंधित या हानिकारक chemical पाए जा सकते हैं।

इन कारणों से उपभोक्ताओं को एलर्जी, पाचन संबंधी समस्याएं, यकृत और गुर्दे को नुकसान, तथा दवाइयों के साथ नकारात्मक अंतःक्रिया (drug interactions) जैसी गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि “हर्बल” या “नेचुरल” शब्द का उपयोग अक्सर उपभोक्ताओं को झूठी सुरक्षा का एहसास दिलाने के लिए किया जाता है, जबकि हर हर्बल उत्पाद स्वतः सुरक्षित नहीं होता।

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नियामक ढांचा: FSSAI और अन्य संस्थाओं की भूमिका

भारत में स्वास्थ्य और पोषण उत्पादों के लिए एक स्थापित नियामक ढांचा मौजूद है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) डाइटरी सप्लीमेंट्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करता है, जिनमें:

  • उत्पाद की संरचना,

  • लेबलिंग और घटकों की जानकारी,

  • अनुशंसित सेवन मात्रा,

  • और चेतावनी संदेश शामिल होते हैं।

इसके अतिरिक्त, आयातित उत्पादों के लिए अलग से अनुमोदन और गुणवत्ता जांच की प्रक्रियाएं होती हैं। हर्बल लाइफ इंडिया का कहना है कि उसके उत्पाद इन सभी नियामक मानकों का पालन करते हैं और नियमित गुणवत्ता परीक्षण प्रक्रियाओं से गुजरते हैं।

FSSAI regulations, labeling, and quality control processes for dietary supplements in India.
FSSAI regulations, labeling, and quality control processes for dietary supplements in India.

पोषण उत्पाद कैसे काम करते हैं? वैज्ञानिक समझ

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, पोषण उत्पादों का उद्देश्य शरीर को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराना होता है, विशेषकर उन परिस्थितियों में जब सामान्य आहार से उनकी पूर्ति संभव नहीं हो पाती। प्रमाणित और वैज्ञानिक रूप से विकसित सप्लीमेंट्स में:

  • संतुलित फॉर्मुलेशन,

  • अनुशंसित दैनिक मात्रा (RDA) का पालन,

  • और सुरक्षा प्रोफाइल पर आधारित विकास प्रक्रिया शामिल होती है।

नकली उत्पाद इन वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को नज़रअंदाज़ करते हैं, जिससे उनका प्रभाव न केवल अप्रभावी हो सकता है, बल्कि हानिकारक भी साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों की राय: सावधानी क्यों ज़रूरी है

पोषण विशेषज्ञों और चिकित्सकों का मानना है कि उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य उत्पादों के चयन में अत्यधिक सतर्कता बरतनी चाहिए। एक वरिष्ठ पोषण विशेषज्ञ के अनुसार, “स्वास्थ्य से जुड़े निर्णय भावनाओं या विज्ञापनों के आधार पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर लिए जाने चाहिए।”

हर्बल लाइफ इंडिया के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि का कहना है कि कंपनी की जागरूकता पहल का उद्देश्य यही है कि उपभोक्ता सही जानकारी के साथ अपने स्वास्थ्य के लिए बेहतर निर्णय ले सकें।

उपभोक्ताओं के लिए व्यावहारिक सुझाव

विशेषज्ञों और नियामक संस्थाओं की सलाह के आधार पर, उपभोक्ताओं के लिए कुछ व्यावहारिक कदम महत्वपूर्ण हैं:

  • हमेशा उत्पाद का लेबल ध्यान से पढ़ें।

  • FSSAI लाइसेंस या अन्य प्रमाणन की जांच करें।

  • अत्यधिक लाभ के दावों से सावधान रहें।

  • किसी भी नए सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ से सलाह लें।

निष्कर्ष (Conclusion)

नकली स्वास्थ्य उत्पादों का खतरा एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है, विशेषकर ऐसे समय में जब लोग बेहतर स्वास्थ्य की तलाश में अधिक से अधिक पोषण उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं। हर्बल लाइफ इंडिया की नई जागरूकता पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उपभोक्ताओं को प्रामाणिकता, गुणवत्ता और वैज्ञानिक प्रमाण के महत्व को समझाने का प्रयास करती है।

भविष्य में, ऐसी पहलें न केवल उपभोक्ताओं की सुरक्षा में मदद कर सकती हैं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य और पोषण उद्योग में पारदर्शिता और भरोसे को भी मजबूत कर सकती हैं।

संदर्भ

  1. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) – डाइटरी सप्लीमेंट्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स से संबंधित दिशा-निर्देश, अद्यतन अधिसूचनाएं

  2. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) – Substandard and Falsified Medical Products, पृष्ठभूमि दस्तावेज़

  3. भारत सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय – उपभोक्ता स्वास्थ्य सुरक्षा से संबंधित सार्वजनिक रिपोर्ट्स

  4. प्रकाशित तिथि: 2025 (सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नियामक और स्वास्थ्य रिपोर्ट्स के आधार पर संकलित)

Disclaimer:

यह लेख उपभोक्ता जागरूकता और जनहित के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों, नियामक दिशानिर्देशों और विशेषज्ञ राय पर आधारित है। यह किसी भी उत्पाद के प्रचार या चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य या पोषण उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य चिकित्सक या पोषण विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक है।

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