महाराष्ट्र में अवैध सौंदर्य क्लीनिक्स पर कार्रवाई की मांग, त्वचा विशेषज्ञों ने MMC को दिया ज्ञापन
महाराष्ट्र में त्वचा विशेषज्ञों ने राज्य चिकित्सा परिषद (MMC) से आग्रह किया है कि वह उन अवैध कॉस्मेटिक क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई करे जो बिना किसी चिकित्सीय योग्यता के लेज़र, बोटॉक्स और फिलर जैसे उपचार दे रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ऐसे गैर-प्रशिक्षित केंद्र न केवल लोगों की त्वचा को नुकसान पहुँचा रहे हैं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र की विश्वसनीयता को भी कमजोर कर रहे हैं। परिषद ने इस मुद्दे पर जांच शुरू करने के संकेत दिए हैं।
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डर्मेटोलॉजिस्ट्स ने महाराष्ट्र चिकित्सा परिषद से अवैध सौंदर्य चिकित्सा प्रक्रियाओं पर कार्रवाई की मांग की
परिचय
महाराष्ट्र के नागपुर में स्थित Vidarbha Dermatological Society (VDS) ने हाल-ही में Maharashtra Medical Council (MMC) से मांग की है कि राज्य में ऐसे व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएँ, जो योग्यता-हीन लोगों द्वारा एस्थेटिक (सौंदर्य) प्रक्रियाएँ करवा रहे हैं — जैसे लेज़र-उपचार, बोटॉक्स, डर्मल फीलर्स व केमिकल पील्स। VDS ने अपना ज्ञापन MMC को सौंपा जिसमें यह कहा गया कि इन प्रक्रियाओं को गैर-चिकित्सकीय सेट-अप में किया जा रहा है, जिससे मरीजों की सुरक्षा खतरें में आ रही है। MMC ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि “Know Your Doctor” (KYD) प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को चिकित्सक की पंजीकरण-स्थिति देखने की सुविधा है और उचित कार्रवाई की जाएगी।
यह विषय इसलिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि एस्थेटिक चिकित्सा-क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हो रही है, लेकिन उसके साथ-साथ प्रमाणित चिकित्सकीय योग्यता, लाइसेंसिंग, मानक प्रक्रियाएँ व नियामक निरीक्षण पिछड़ गए हैं। इसके परिणामस्वरूप न केवल सौंदर्य संबंधी परिणाम प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य-जटिलताओं (complications) का जोखिम भी बढ़ गया है।
पृष्ठभूमि: क्यों बढ़ रही है एस्थेटिक प्रक्रियाओं की माँग?
सौंदर्य चिकित्सा (aesthetic medicine) आज शहरी भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। सोशल मीडिया, सेलेब्रिटी इमेज, आत्म-छवि (self-image) की बढ़ती अपेक्षाएँ और कम-इनवेसिव (minimally invasive) तकनीकों की उपलब्धता ने इसे बहुत अधिक सुलभ बना दिया है।
उदाहरण के लिए, लेज़र उपचार, बोटॉक्स इंजेक्शन, फीलर्स तथा माइक्रोनीडलिंग जैसी प्रक्रियाओं की माँग बढ़ रही है — लेकिन इस वृद्धि के साथ प्रमाणित चिकित्सा-मानकों की अनुपस्थिति ने एक जोखिम का वातावरण बना दिया है। शोधपत्र में यह उल्लेख है कि “The practice of dermatological sciences has been impacted due to patients receiving care at the hands of unlicensed individuals.”
मरीज अक्सर कम लागत व त्वरित परिणाम के वादों से आकर्षित होते हैं, और सैलून-क्लीनिक से ऐसी सेवाएँ चुन लेते हैं जहाँ चिकित्सकीय अनुभव या पंजीकरण की जांच नहीं होती। इसी वजह से यह मामला निजी स्वास्थ्य व सार्वजनिक सुरक्षा दोनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो गया है।
कौन-कौन-सी प्रक्रियाएँ जोखिम में हैं?
VDS के ज्ञापन में विशेष रूप से निम्नलिखित प्रक्रियाओं पर चिंता जताई गई है:
लेज़र-उपचार (Laser treatments)
बोटॉक्स (Botox) इंजेक्शन
डर्मल फीलर्स (Dermal fillers)
केमिकल पील्स (Chemical peels)
इन सभी में चिकित्सकीय ज्ञान, संक्रमण-नियंत्रण (infection control), उपकरण-सुरक्षा, अनुवर्ती देखभाल (after-care) आदि महत्वपूर्ण होते हैं। जब इन्हें योग्य चिकित्सक के बावजूद नहीं, बल्कि प्रशिक्षित-नहीं व्यक्ति द्वारा किया जाता है, तो निम्न-जोखिम सामने आ सकते हैं:
संक्रमण या जलने का खतरा
त्वचा में स्थायी निशान या कोलिड (keloid) निर्माण
परिणामस्वरूप असममित (uneven) रूप या असंतुष्टि
मरीज को स्पष्ट चेतावनी व विकल्प न प्रदान करना (inadequate informed consent)
कर्नाटक में एक मामले में यह देखने को मिला है कि गैर-योग्य व्यक्ति द्वारा किए गए केमिकल-उपचार ने «chemical burns, scarred scalps» जैसी जटिलताएँ उत्पन्न कीं।
समस्या के मुख्य कारण क्या हैं?
इस समस्या के पीछे अनेक कारण हैं, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं:
कम लागत व सहज उपलब्धता
सौंदर्य क्लीनिक और सैलून द्वारा आकर्षक पैकेज व विज्ञापन दिए जाते हैं — जिससे मरीजों को ऐसा लगता है कि तुरंत परिणाम मिलेगें। इस चाहत में वे योग्य प्रमाण-चिकित्सक का चयन न कर, सस्ते विकल्प चुन लेते हैं।लाइसेंसिंग एवं प्रशिक्षण का अभाव
कई स्थानों पर ऐसा देखा गया है कि लेज़र तथा अन्य एस्थेटिक प्रक्रियाएँ चिकित्सा-योग्यता बिना लिए भी हो रही हैं। उदाहरण के लिए, तेलंगाना में निरीक्षण में पाया गया कि कुछ क्लीनिक्स में MBBS/MD Dermatology नहीं बल्कि दंत चिकित्सक, आयुष/यूनानी चिकित्सक या डिप्लोमा-धारी व्यक्ति कार्यरत थे।नियम-निरीक्षण की कमी
राज्य-स्तरीय स्वास्थ्य विभाग या चिकित्सा परिषदों द्वारा किए गए निरीक्षण सीमित हैं। निजी प्रतिष्ठानों की छापेमारी, पंजीकरण व अनुपालन की मॉनिटरिंग प्रणाली पर्याप्त नहीं है। उदाहरण के लिए, कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में गैर-पंजीकृत एस्थेटिक क्लीनिक्स पर कार्रवाई की गई थी।मरीजों की जागरूकता कम होना
सामान्य नागरिक को यह जानकारी अक्सर नहीं होती कि किस चिकित्सक या क्लीनिक में सुरक्षित रूप से ये प्रक्रियाएँ हो सकती हैं। कौन-से प्रमाण-पत्र होने चाहिए, क्लीनिक का पंजीकरण कैसे देखें — ऐसे सवालों पर जागरूकता की कमी है।बाजार-वृद्धि और प्रतिस्पर्धा
सौंदर्य चिकित्सा-बाजार में तेजी से निवेश हो रहा है। कई व्यवसायी शीघ्र फायदा लेने के लिए मानक-प्रक्रियाओं को कम महत्व देते हैं, जिससे गुणवत्ता व सुरक्षा पीछे रहने लगती है।
महाराष्ट्र चिकित्सा परिषद को किन कदमों की आवश्यकता है?
VDS द्वारा MMC को दिए गए ज्ञापन में निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं:
चिकित्सक की योग्यता एवं पंजीकरण की जाँच
डॉक्टर द्वारा MD/DNB (Dermatology & Venereology) या समकक्ष प्रशिक्षिण प्रमाण होना चाहिए। क्लीनिक की पंजीकरण-स्थिति और चिकित्सा प्रतिष्ठान-लाइसेंस की जाँच होनी चाहिए।क्लीनिक-पंजीकरण व निरीक्षण तंत्र सुदृढ़ करना
एस्थेटिक क्लीनिकों को चिकित्सा प्रतिष्ठान अधिनियम या संबद्ध नियमों के तहत पंजीकृत करना तथा नियमित निरीक्षण व मानदंड तय करना आवश्यक है।सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम चलाना
“Know Your Doctor (KYD)” जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से मरीज स्वयं चिकित्सक-लाइसेंस चेक कर सकें। MMC ने इस पहल का उल्लेख किया है।सख्त कानूनी कार्रवाई एवं विज्ञापन-नियमन
ऐसे क्लीनिक्स जिनमें गैर-योग्य व्यक्ति कार्यरत हों, उनका पंजीकरण निरस्त करना, जुर्माना लगाना और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करना। साथ ही, विज्ञापन में दावे व प्रमाण जांचना।प्रमाणित प्रशिक्षण व मानक-निर्माण
एस्थेटिक प्रक्रियाओं के लिए न्यूनतम प्रमाण-प्रशिक्षण मानक एवं प्रमाणपत्र तय करना। इस तरह योग्य चिकित्सक व प्रशिक्षिण-साहित्य सुनिश्चित हो सके।
मरीजों के लिए सुझाव: सुरक्षित विकल्प कैसे चुनें?
अगर आप एस्थेटिक उपचार कराने का विचार कर रहे हैं, तो निम्न-चालक बिंदुओं पर ध्यान दें:
चिकित्सक का नाम स्पष्ट पूछें, उनकी योग्यता (MBBS + MD/DNB in Dermatology) और पंजीकरण संख्या पूछें।
क्लीनिक की पंजीकरण-स्थिति और मेडिकल-प्रतिष्ठान-लाइसेंस की प्रतिलिपि देखें।
प्रक्रिया से पहले संभावित जोखिम, विकल्प और बाद की देखभाल (after-care) के बारे में स्पष्ट जानकारी मागें।
बहुत सस्ते ऑफर्स या “कोई प्रशिक्षण ही नहीं”-प्रचारित क्लीनिकों से सावधान रहें।
उपचार के बाद अनपेक्षित समस्या हो तो तुरंत योग्य त्वचा रोग विशेषज्ञ (dermatologist) से संपर्क करें।
यदि आप स्वयं डॉक्टर से बात करें, तो उनसे पूछ सकते हैं: “क्या इस तरह की प्रक्रिया करने के लिए आपको प्रशिक्षिण प्रमाण मिला है?”, “अगर समस्या हुई तो क्लीनिक का क्या प्रोटोकॉल है?” आदि।
निष्कर्ष
एस्थेटिक चिकित्सा क्षेत्र बहुत तेजी से बढ़ रहा है, और यह स्वाभाविक रूप से स्वागत योग्य है क्योंकि लोगों को अपने Skin & Beauty की दिशा में विकल्प मिल रहे हैं। लेकिन जैसे-जैसे यह बाजार विकसित हो रहा है, हमें यह भी सुनिश्चित करना है कि यह सुरक्षित, प्रमाणित और चिकित्सकीय-मानकों के अनुरूप हो।
महाराष्ट्र में VDS द्वारा MMC से की गई यह मांग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है — यह याद दिलाती है कि सिर्फ सौंदर्य परिणाम नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा, चिकित्सकीय योग्यता और मानक-अनुपालन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
उपचार कराने वाले मरीजों को सचेत रहना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्होंने योग्य चिकित्सक व प्रमाणित क्लीनिक चुनें। चिकित्सा परिषदों, स्वास्थ्य विभागों व निजी क्लीनिक्स को भी मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि एस्थेटिक प्रक्रियाएँ ट्रेंड से मात्र व्यवसाय न बनकर, एक सुरक्षित चिकित्सकीय सेवा-रूप में हों।
यदि यह संतुलन बना होगा — जहाँ लोकप्रियता और सौंदर्य की चाह को चिकित्सकीय-मानकों, मरीज-सुरक्षा व प्रमाणित प्रशिक्षण ने संतुलित किया होगा — तभी यह क्षेत्र वास्तव में सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकेगा।
स्रोत:
“Dermatologists urge Maha Medical Council to crackdown on unqualified practitioners performing aesthetic procedures …”, Medical Dialogues, 26 Oct 2025.
“A Modern Epidemic of Dermatology Quackery in India”, M Shishak et al., PMC, 2024.
“Beware of Quack Dermatology: The Dangers of Unqualified Skincare Practitioners”, Times of India, 14 Sept 2025.
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।
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