BHU शोध में खुलासा: दुधिया घास में मिले प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट यौगिक, Nigrospora sphaerica बना उम्मीद की नई किरण
BHU के वैज्ञानिकों ने Euphorbia hirta में पाए गए कवक Nigrospora sphaerica से शक्तिशाली फेनोलिक-फ्लैवोनॉइड यौगिक खोजे — प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट का नया स्रोत।
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दुधिया घास Euphorbia hirta में मिले अंतःफलकीय कवक Nigrospora sphaerica (EHL2) द्वारा उत्पादित फेनोलिक-फ्लैवोनॉइड यौगिक: एक आशाजनक प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट स्रोत
परिचय
भारतीय शोध-विश्व में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है कि वाराणसी के Banaras Hindu University (BHU) में किए गए अध्ययन में यह पता चला है कि एक औषधीय पौधा ‘दुधिया घास’ यानी Euphorbia hirta में अंतःफलकीय रूप से पाए जाने वाले कवक Nigrospora sphaerica (EHL2) में उच्च मात्रा में फेनोलिक एवं फ्लैवोनॉइड यौगिक मौजूद हैं, तथा इनके एक्सट्रैक्ट में बहुत-उच्च एंटीऑक्सिडेंट क्रिया पाई गई है। यह परिणाम इसलिए विशेष है क्योंकि प्रकृति में ऐसे स्रोत आज भी पर्याप्त रूप से शोध के दायरे में नहीं हैं, और इस तरह के अध्ययन प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट स्रोत खोजने के प्रयास को आगे बढ़ाते हैं। इस लेख में हम इस शोध-कार्य की पृष्ठभूमि, कार्यप्रणाली, निष्कर्ष, संभावित उपयोगिता एवं भारत-संदर्भ में आगे की दिशा-निर्देशों का विवेचना करेंगे।
पृष्ठभूमि: प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट और उनका महत्व
हमारा शरीर रोज-मर्रा की जीवनप्रक्रियाओं में सक्रिय ऑक्सीजन प्रकार (reactive oxygen species – ROS) उत्पन्न करता है, जो यदि नियंत्रित न हों तो सेलुलर स्तर पर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस उत्पन्न कर सकते हैं और डीएनए, प्रोटीन व लिपिड्स को क्षति पहुँचा सकते हैं। ऐसे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को हृदय-रक्तवाहिनी रोग, कैंसर, डायबिटीज और अन्य पुरानी बीमारियों के साथ जोड़ा गया है। इसलिए प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स — जैसे कि फेनोलिक एवं फ्लैवोनॉइड यौगिक — बहुत मायने रखते हैं।
पटेंडेड शोध ने यह दिखाया है कि बहुत-से पौधे इन यौगिकों के भरोसे ‘स्वास्थ्यवर्धक’ कहलाए हैं और खाद्य, कॉस्मेटिक व औषधीय अनुप्रयोगों में अनुसन्धान हो रहा है। लेकिन समस्या यह है कि कई प्राकृतिक स्रोत अब कम-उपयुक्त हो चुके हैं या उनकी सक्रियता कम पाई गई है। ऐसे में अंतःफलकीय कवक (endophytic fungi) जैसे विकल्प सामने आ रहे हैं — ये कवक पौधे के अंदर रहते हैं और कई बार पौधे के जैव-संश्लेषित यौगिकों जैसा या उससे बेहतर यौगिक उत्पन्न करते पाए गए हैं। इस तरह से शोधकर्त्ताओं ने यह मार्ग अपनाया कि पौधा-भित्ति में रहने वाले कवक को अलग-कर उसका अध्ययन किया जाए।
इसी संदर्भ में Euphorbia hirta नामक पौधे में रहने वाले Nigrospora sphaerica (EHL2) को अध्ययन के लिए चुना गया। यह पौधा पारंपरिक रूप से औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है तथा इसमें पहले भी कुछ एंटीऑक्सिडेंट यौगिक पाए गए हैं। इस तरह यह शोध प्राकृतिक स्रोत-अन्वेषण के दृष्टिकोण से प्रिय और उपयुक्त रहा है।
शोध-उद्देश्य एवं कार्यप्रणाली
इस अध्ययन का उद्देश्य था कि Nigrospora sphaerica (EHL2) को Euphorbia hirta के पत्तियों से अलग (isolate) किया जाए, उसे विभिन्न संकरण माध्यमों (fermentation media) में विकसित किया जाए, फिर उसके ग्रोथ-ब्रॉथ को विभिन्न सॉल्वैंट्स से एक्सट्रैक्ट किया जाए और अंततः उन एक्सट्रैक्ट्स में कुल फेनोलिक सामग्री (Total Phenolic Content – TPC) एवं कुल फ्लैवोनॉइड सामग्री (Total Flavonoid Content – TFC) मापी जाएँ ताकि यह जाना जा सके कि कौन-सा माध्यम व सॉल्वैंट संयोजन सबसे अच्छा परिणाम दे रहा है।
कार्यप्रणाली मुख्य रूप से इस प्रकार थी:
स्वस्थ Euphorbia hirta के पत्तियों से कवक को सतही कीटाणु-मुक्त (surface-sterilized) वातावरण में अलग किया गया, उसके बाद कवक को विभिन्न माध्यमों (जैसे Potato Dextrose Broth (PDB), Czapek Dox Broth (CDB) आदि) में विकसित किया गया।
कवक-संस्कृति से प्राप्त ब्रॉथ को फिल्टर करके विभिन्न सॉल्वैंटों जैसे ethyl acetate, hexane आदि से क्रमशः एक्सट्रैक्शन किया गया।
एक्सट्रैक्ट्स में TPC तथा TFC मापने के लिए मानक कलरिमेट्रिक विधियाँ (जैसे Folin-Ciocalteu reagent तथा AlCl₃ विधि) तथा फ्री-रैडिकल स्कैवेंजिंग परीक्षण (जैसे DPPH, ABTS) किए गए।
सबसे उत्तम संयोजन से प्राप्त एक्सट्रैक्ट (ethyl acetate extract of PDB-grown fungus) को TLC-bioautography एवं GC–MS विश्लेषण द्वारा आंशिक रूप से शुद्ध किया गया और उसमें प्रमुख यौगिकों की पहचान की गई।
इस तरह शोध ने एक व्यवस्थित वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई है जहाँ स्रोत (कवक), माध्यम (ब्रॉथ), सॉल्वैंट (एक्सट्रैक्शन) व परीक्षण (फेनोलिक–फ्लैवोनॉइड व एंटीऑक्सिडेंट क्रिया) सभी सामंजस्य में थे।
क्यों यह शोध महत्वपूर्ण है?
यह शोध इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:
यह एक अपेक्षाकृत अनछुए स्रोत — यानी अंतःफलकीय कवक — से सक्रिय यौगिकों की खोज को आगे ले जाता है। सामान्यतः ऐसे शोध पौधों पर केंद्रित रहते थे, पर यहाँ कवक-विकसित माध्यम से अच्छे परिणाम मिले।
उच्च-स्तरीय एंटीऑक्सिडेंट क्रिया (96.8 %) प्राप्त होना संकेत देता है कि यह स्रोत व्यावहारिक (practical) उपयोग की दिशा में हो सकता है।
यह भारतीय जैव-विविधता और माइक्रोबियल स्रोतों की क्षमता को उजागर करता है — जटिल शोध-परिसर में भारत-विज्ञान को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाने में यह योगदान दे सकता है।
प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट स्रोतों की खोज खाद्य, कॉस्मेटिक, औषध-सहायक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है, और इस तरह का शोध इन क्षेत्रों के लिए नए विकल्प प्रस्तुत करता है।
आगे की चुनौतियाँ और संभावनाएँ
हालाँकि यह शोध बहुत हद तक सफल रहा है, इसके आगे कुछ चुनौतियाँ और संभावनाएँ मौजूद हैं:
यह अध्ययन इन-विट्रो (शाला-स्तर पर) किया गया है; इसका मतलब है कि मानव या जानवरों पर परीक्षण नहीं हुआ है। इसलिए, इन-विवो (in-vivo) और क्लिनिकल परीक्षणों की दिशा में शोध की आवश्यकता है।
यौगिकों की बायोउपलब्धता (bioavailability), सुरक्षितता (safety), स्थिरता (stability) व संभावित दुष्प्रभावों (side-effects) का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।
बड़े-पैमाने पर उत्पादन (scale-up), लागत-प्रभावशीलता (cost-effectiveness) और स्रोत-संपदा (sustainability) सुनिश्चित करना चुनौतिपूर्ण होगा।
नियामकीय (regulatory) अनुमोदन, गुणवत्ता-मान (quality-control) और व्यावसायीकरण (commercialisation) की प्रक्रिया लंबी हो सकती है।
इसके विपरीत, यदि आगे परीक्षण सकारात्मक हों, तो यह स्रोत प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट उद्योग, खाद्य-अनुरूप अनुप्रयोग, औषध-सहायक विकास व स्वास्थ्य-सहायक उत्पादों (health-supplement) में उपयोगी हो सकता है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, यह पाया गया है कि Euphorbia hirta में अंतःफलकीय रूप से पाए गए Nigrospora sphaerica (EHL2) नामक कवक में उच्च मात्रा में फेनोलिक व फ्लैवोनॉइड यौगिक मौजूद हैं तथा इनके एक्सट्रैक्ट में अत्यधिक एंटीऑक्सिडेंट क्रिया पाई गई है। यह शोध प्राकृतिक स्रोत-अन्वेषण के क्षेत्र में एक उत्साहवर्धक संकेत है। हालांकि अभी यह व्यावसायिक या चिकित्सीय उपयोग के स्तर पर नहीं है, पर आगे की दिशा में यदि शोध सफल रहा, तो यह स्वास्थ्य-उद्योग और प्राकृतिक उत्पाद विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
संदर्भ (References):
Gautam, V. S., Singh, A., Kumari, P., Nishad, J. H., Kumar, J., Yadav, M., Bharti, R., Prajapati, P., & Kharwar, R. N. (2022). Phenolic and flavonoid contents and antioxidant activity of an endophytic fungus Nigrospora sphaerica (EHL2), inhabiting the medicinal plant Euphorbia hirta (dudhi) L. Archives of Microbiology, 204, 140. DOI: 10.1007/s00203-021-02650-7.
Gautam, V. S., Kumari, P., Jaiswara, P. K., & अन्य. (2024). Antioxidant and cytotoxic activity of Rutin isolated from Nigrospora sphaerica, an Euphorbia hirta-based endophytic fungus. Process Biochemistry.
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।
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