अब हर वैक्सीन और कैंसर दवा पर QR कोड अनिवार्य: नकली दवाओं के खिलाफ केंद्र सरकार का बड़ा कदम
भारत सरकार ने स्वास्थ्य सुरक्षा और दवा-प्रमाणिकता को सशक्त बनाने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब सभी वैक्सीन, एंटीमाइक्रोबियल्स, कैंसर-उपचार से जुड़ी दवाओं और नशे-नियंत्रित औषधियों पर QR कोड या बारकोड लगाना अनिवार्य होगा। 16 अक्टूबर 2025 को जारी गज़ट अधिसूचना के तहत यह नियम पूरे भारत में लागू किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य नकली और घटिया दवाओं को आपूर्ति-श्रृंखला से समाप्त कर रोगी-सुरक्षा और दवा-प्रमाणिकता को सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय दवा-विनियमन और पारदर्शिता के नए युग की शुरुआत करेगा, जिससे भारत वैश्विक फार्मा-सप्लाई चेन में एक भरोसेमंद साझेदार बन सकेगा।
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अब हर वैक्सीन और कैंसर दवा पर होगा QR-Code: नकली दवाओं पर केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई
परिचय
देश में स्वास्थ्य सुरक्षा के मानकों को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, Ministry of Health and Family Welfare (MoHFW) ने घोषणा की है कि अब सभी वैक्सीन, एंटीमाइक्रोबियल दवाओं (antimicrobials) तथा कैंसर उपचार से जुड़ी दवाओं पर अनिवार्य रूप से क्विक रिस्पॉन्स (QR) कोड या बारकोड लगाना होगा। यह अधिसूचना 16 अक्टूबर 2025 को जारी एक गज़ट नोटिफिकेशन के अंतर्गत दी गई है, जिसमें कहा गया है कि यह नियम पूर्व में केवल सक्रिय तत्व (APIs) व शीर्ष 300 फॉर्मूलेशन्स तक सीमित था, जिसे अब चार प्रमुख श्रेणियों- वैक्सीन, एंटीमाइक्रोबियल्स, कैंसर दवाओं एवं नशे एवं मनोवैज्ञानिक नियंत्रित दवाओं तक विस्तारित किया गया है।
यह बदलाब पूरे भारत में लागू होगा तथा इसका मुख्य उद्देश्य नकली, अधूरे अथवा घटिया दवाओं को दवा आपूर्ति श्रृंखला से समाप्त करना है—जिससे रोगी-सुरक्षा (patient safety) एवं दवा-प्रामाणिकता (drug authenticity) सुनिश्चित की जा सके।
यह निर्णय इसलिए भी समय-सापेक्ष है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में नकली cough syrup जैसी घटनाएँ प्रकाश में आई हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है।
इस प्रकार, इस लेख में हम विस्तार से देखेंगे कि यह कदम क्यों उठाया गया है, इसके प्रभाव क्या होंगे, आपूर्ति श्रृंखला पर इसका क्या अर्थ है, किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है तथा आगे क्या-क्या अपेक्षित है।
क्या है इस पोलीसी का पृष्ठभूमि एवं संदर्भ?
नकली दवाओं की समस्या कितनी बड़ी है?
भारत में दवा आपूर्ति-शृंखला (pharmaceutical supply chain) अत्यन्त विस्तृत और जटिल है। इस शृंखला में निर्माता, वितरक, थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता, अस्पताल एवं क्लीनिक आदि शामिल हैं। इस जटिलता के कारण नकली (counterfeit) या उप-मानक (substandard) दवाओं के बाजार में प्रवेश की संभावना बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, एक अध्ययन में बताया गया है कि 2023-24 में लगभग 1,06,150 दवा नमूनों में से 2,988 नमूने उप-मानक पाए गए और 282 नमूने नकली या मिलावटी पाए गए थे।
नकली दवाओं का सेवन रोगी के जीवन के लिए सीधे खतरा उत्पन्न कर सकता है—चाहे वह दवा अपना असर न दे, या गलत खुराक हो, या दुष्प्रभाव बढ़ जाएँ। इसलिए सरकार एवं नियामक निकायों ने लंबे समय से इसकी समस्या से निपटने के लिए उपाय खोजे हैं।
QR-कोड क्यों आवश्यक हुआ?
QR-कोड (Quick Response code) और बारकोड जैसी तकनीकें दवा पैकेजिंग में ट्रैसेबिलिटी (traceability) और प्रमाणिकता (authenticity) सुनिश्चित करने का एक प्रभावी साधन हैं। जब प्रत्येक पैकेज पर यूनिक कोड लगा होता है, तो उसे स्कैन करके उत्पादन-बैच-नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, निर्माता नाम, लाइसेंस नंबर आदि जानकारी उपभोक्ता या वितरक द्वारा तुरंत प्राप्त की जा सकती है।
विशेष रूप से, भारत के संदर्भ में, पहले केवल APIs व शीर्ष 300 ब्रांड्स पर QR-कोड अनिवार्य किया गया था। अब यह दायरा बढ़ा कर उन दवाओं तक फैलाया गया है, जिनमें वैक्सीन आदि शामिल हैं—क्योंकि इनकी नकली आपूर्ति से सार्वजनिक स्वास्थ्य को बहुत गंभीर खतरा है।
इसके अलावा, ट्रैसेबिलिटी से न सिर्फ उपभोक्ता बल्कि नियामक संस्थानों को भी आपूर्ति-शृंखला में किसी भी प्वाइंट पर “गलत” दवा को पहचानने व उसे हटाने का अवसर मिलता है।
इस फैसले का कानूनी आधार
यह बदलाव Drugs Rules, 1945 के अंतर्गत आता है, जिसे दवा विनियमन (Drug Regulation) के लिए देश में प्रमुख कानून माना जाता है। सरकार ने 16 अक्टूबर 2025 को गज़ट नोटिफिकेशन जारी कर इस दिशा में संशोधन प्रस्तावित किए हैं। इसमें से एक प्रमुख बिंदु यह है कि चार प्रमुख श्रेणियों—वैक्सीन, एंटीमाइक्रोबियल्स, कैंसर दवाएँ, तथा Schedule H2 में आने वाली नशे एवं मनोवैज्ञानिक नियंत्रित दवाएँ—अब QR-कोड या बारकोड के दायरे में आ गयीं हैं।
नए निर्णय का क्या मतलब है? — “क्या बदला है?”
कौन-कौन सी दवा-श्रेणियाँ शामिल हुईं?
इस नए आदेश के अनुसार निम्नलिखित दवाओं पर अनिवार्य रूप से QR-कोड या बारकोड लगेगा:
वैक्सीन (Vaccines): सभी प्रकार की टीकाएँ जिनका उत्पादन व वितरण हो रहा है।
एंटीमाइक्रोबियल्स (Antimicrobials): बैक्टीरिया, वायरस, फंगस आदि संक्रमण-रोधी दवाएँ।
कैंसर-उपचार से जुड़ी दवाएँ (Anticancer medicines): जिन्हें कैंसर के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
नशे एवं मनोवैज्ञानिक नियंत्रित दवाएँ (Narcotic & Psychotropic drugs): Schedule H2 के अंतर्गत आने वाली नियंत्रण-युक्त दवाएँ।
अब तक कौन-क्या सीमाएँ थीं?
पहले यह नियम केवल सक्रिय घटक (APIs) और शीर्ष 300 ब्रांड्स पर लागू था। परंतु अब इसे व्यापक रूप से सभी उस श्रेणियों में विस्तारित किया गया है जहाँ नकली दवाओं का खतरा सर्वाधिक माना जाता है।
उदाहरण के लिए, 2024 की खबर में बताया गया था कि “सभी वैक्सीन” पर QR-कोड अनिवार्य किया गया है। अब यह कदम और भी आगे बढ़ गया है—जिसका असर आपूर्ति-शृंखला की पारदर्शिता पर गहरा होगा।
ट्रैसेबिलिटी (Traceability) में क्या नया है?
QR-कोड के माध्यम से पैकेजिंग पर मौजूद दवा को स्कैन करके निम्नलिखित जानकारी तुरंत मिल सकती है:
निर्माणकर्ता का नाम एवं पते सहित लाइसेंस नंबर
बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि
सक्रिय सामग्री और ब्रांड नाम
आपूर्ति-शृंखला में उस दवा का पिछला इतिहास (कहाँ से आई, कब भेजी गई आदि)
इस प्रकार, यदि कोई दवा नकली पाई जाती है या उसमें समस्या आती है, तो उसे जल्दी पहचान कर वापस बुलाया (recall) जा सकता है।
इस निर्णय के प्रभाव क्या होंगे?
रोगी-सुरक्षा (Patient Safety) पर असर
इस कदम से रोगियों की सुरक्षा में वृद्धि की उम्मीद है क्योंकि:
नकली व उप-मानक दवाओं के कारण उत्पन्न होने वाले जोखिमों (जैसे- दवा न काम करना, गलत खुराक, अधिक दुष्प्रभाव) में कमी आ सकती है।
उपभोक्ता (consumer) को यह भरोसा मिलेगा कि उन्होंने खरीदी हुई दवा प्रमाणित स्रोत से है।
अस्पताल, क्लीनिक और फार्मेसी में चेन ऑफ कस्टडी (chain of custody) बेहतर तरीके से ट्रैक की जा सकेगी—जो विशेष रूप से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में महत्वपूर्ण है।
आपूर्ति-शृंखला (Supply Chain) पर असर
निर्माता से लेकर वितरक, खुदरा विक्रेता तक हर स्तर पर पैकेज को स्कैन करना संभव होगा, जिससे दवा की origin और हर बदलाव पर नज़र रखी जा सकेगी।
नकली दवाओं को आपूर्ति-शृंखला में प्रवेश करने से पहले ही पकड़ना आसान होगा।
दवा वापसी (recall) और निरीक्षण/निगरानी अधिक प्रभावशाली होगी क्योंकि बैच-वाइज जानकारी उपलब्ध होगी।
दवा उद्योग पर असर
दवा कंपनियों के लिए यह एक अतिरिक्त अनुपालन (compliance) बोझ होगा—उनको पैकेजिंग पर QR-कोड की व्यवस्था करनी होगी, स्कैनिंग व ट्रैकिंग सिस्टम बनानी होगी।
छोटे एवं मझोले निर्माता-वितरकों को शुरुआती निवेश व प्रशिक्षण की चुनौती आ सकती है।
साथ ही, यह कदम भारत को वैश्विक स्तर पर दवा आपूर्ति श्रृंखला में एक भरोसेमंद खिलाड़ी बनाने की दिशा में भी सहायता करेगा।
चुनौतियाँ एवं सावधानियाँ
तकनीकी चुनौतियाँ: इंटरनेट-सक्षम स्मार्टफोन, स्कैनिंग ऐप्स और वितरण चैनल तक ट्रैकिंग सुविधा हर क्षेत्र में समान नहीं है, खासकर ग्रामीण इलाकों में।
QR-कोड की नकली बनावट: कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यदि QR-कोड प्रणाली को ठीक तरह से नहीं डिजाइन या लागू किया गया तो यह नकली दवाओं को पहचानने में विफल साबित हो सकती है।
जागरूकता एवं प्रशिक्षण: खुदरा विक्रेता, फार्मेसी, हॉस्पिटल स्टाफ को इस नए सिस्टम के बारे में प्रशिक्षण देना होगा ताकि स्कैनिंग व सत्यापन सक्रिय रूप से हो सके।
विशेषज्ञों की राय
All India Organisation of Chemists and Druggists (AIOCD) ने इस गज़ट नोटिफिकेशन का स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम नकली व उप-मानक दवाओं के खिलाफ लड़ाई को बहुत मजबूत करेगा और दवा आपूर्ति-शृंखला में मरीजों का भरोसा बढ़ाएगा।
AIOCD के अध्यक्ष जे एस शिंदे व महासचिव राजीव सिंगल ने कहा कि “हम पूरा सहयोग देंगे ताकि रिटेलर्स व वितरक तक इस प्रणाली को सुचारू बनाने के लिए प्रशिक्षण व तकनीकी सहायता पहुंचे।”
वहीं, एक विशेषज्ञ ब्लॉग में यह चेतावनी भी दी गयी है कि इस तरह की प्रणाली यदि सही से क्रियान्वित न हो, तो दुष्प्रवर्तन (tampering) व QR-कोड की नकल जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
भारत में आगे क्या-क्या देखने को मिलेगा?
लागूकरण (Implementation) की दिशा
इस नियम को देशव्यापी स्तर पर लागू करने के लिए निम्न चरण अपेक्षित हैं:
निर्माता कंपनियों द्वारा पैकेजिंग में QR-कोड/बारकोड लगाना एवं उसकी स्कैनिंग व ट्रैकिंग की प्रणाली तैयार करना।
वितरक व खुदरा विक्रेता स्तर पर स्कैनिंग उपकरण, ऐप व प्रशिक्षण प्रदान करना।
राज्य-नियामक प्राधिकरणों द्वारा निगरानी व अनुपालन सुनिश्चित करना।
उपभोक्ता जागरूकता अभियान चलाना कि किस प्रकार दवा को स्कैन करके उसकी प्रमाणिकता जाँची जा सकती है।
क्या यह केवल शुरुआत है?
हाँ, यह कदम सिर्फ शुरुआत मात्र है। भविष्य में देखा जा सकता है कि यह अनिवार्यता और व्यापक दवाओं तक फैले—उदाहरणस्वरूप, अधिक सामान्य ओवर-द-काउंटर (OTC) दवाएँ, स्वास्थ्य उपकरण, या अन्य चिकित्सकीय उपकरण। ब्लॉग के अनुसार ऐसी संभावनाएं खुली हुई हैं।
इसके अलावा, तकनीक के विकास के साथ, पैकेजिंग में ब्लूटूथ-ट्रैकिंग, RFID टैग्स या अन्य डिजिटल पहचान प्रणाली भी जोड़ी जा सकती हैं जिससे ट्रैसेबिलिटी और अधिक सुदृढ़ हो सके।
मरीजों के लिए क्या मायने होंगे?
मरीज अब दवा खरीदते समय QR-कोड स्कैन कर यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि वे वास्तविक उत्पाद ले रहे हैं।
खासकर कैंसर, संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों में यह व्यवस्था भरोसे का पर्याय बन सकती है।
यदि किसी बैच में समस्या पाई जाती है, तो उसका प्रभाव जल्दी प्रभावित मरीजों तक पहुँचने से पहले कम किया जा सकेगा।
दवा-उपयोग के दौरान किसी समस्या (उदाहरण- दुष्प्रभाव, असर न होना) की स्थिति में ट्रैकिंग जानकारी उपलब्ध होने से नियामक सक्रिय हो सकेंगे।
निष्कर्ष
इस प्रकार, सरकार द्वारा जारी यह नया QR-कोड अनिवार्यता कदम न केवल दवा-नियमन (pharmaceutical regulation) की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है बल्कि मरीजों, वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और दवा उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि अब चिकित्सकीय दवाओं की आपूर्ति-शृंखला में पारदर्शिता, प्रमाणिकता व जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
भविष्य में इसका सकारात्मक प्रभाव मरीज-सुरक्षा, दवा-उपलब्धता और स्वास्थ्य-प्रबंधन पर निश्चय ही देखने को मिलेगा। हालांकि, इस फैसले की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि इसे कितनी दृढ़ता के साथ लागू किया जाता है—क्या तकनीकी सुविधाएँ, प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और निरीक्षण-प्रक्रिया समय पर पूरी हो पाएगी।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि मरीजों को भी सतर्क रहना चाहिए—दवा लेते समय पैकेजिंग को ध्यान से देखना, QR-कोड स्कैन करना, वितरक से प्रमाणित स्रोत से खरीदना। साथ ही, खुदरा विक्रेताओं और वितरकों को भी इस नए नियम का पालन सुनिश्चित करना होगा, वरना दंड-प्रावधानों का सामना करना पड़ सकता है।
भारत इस कदम के साथ एक वैश्विक स्वास्थ्य-प्राधिकरण (global health player) के रूप में उभरने की ओर अग्रसर है, जहाँ “दवा प्रमाणिकता” और “रोगी का भरोसा” सर्वोपरि हैं।
स्रोत / References
“Centre plans to mandate QR code-based traceability for vaccines, anticancer medicines”, The New Indian Express, Updated On Oct 19 2025.
“Centre mandates QR codes on all vaccines, antimicrobials and cancer drugs to combat counterfeiting”, IndiaMedToday, Published today.
“Govt Says Top 300 Pharma Brands Must Print QR Code On Packaging”, MediaNama, Aug 4 2025.
“AIOCD Welcomes Gazette Notification on Anti-Counterfeiting Measures”, Rashtradrishti, Oct 2025.
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।
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