पोस्ट-COVID का नया खतरा: पुरुषों में बढ़ रहा हृदय रोग का जोखिम, WHO ने दी अहम चेतावनी

COVID-19 के बाद पुरुषों में हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। WHO ने नई चेतावनी जारी की है और अपनी आवश्यक औषधियों की सूची में बदलाव किए हैं।

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ASHISH PRADHAN

10/22/20252 min read

पोस्ट कोविड में पुरुषों में बढ़ते हृदय रोग का खतरा और WHO की नई चेतावनी
पोस्ट कोविड में पुरुषों में बढ़ते हृदय रोग का खतरा और WHO की नई चेतावनी

दिल पर कोविड का असर: पुरुषों में अचानक बढ़े हृदय रोग के मामले, WHO का बड़ा अपडेट आया सामने
परिचय

किसने सोचा था कि जब हम COVID‑19 को पीछे छोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, तो एक दूसरी, शांत लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या हमारे सामने खड़ी होगी — यानी संक्रमण के बाद का दिल-वृक्क (कार्डियो-वस्कुलर) जोखिम। कहाँ और कब यह सामने आया? विश्व भर में कोविड-19 से संक्रमित लोगों के पुनरावलोकनों में यह देखा गया है कि बीमारी के खत्म होने के बाद भी हृदय एवं फुफ्फुस (कार्डियोपल्मोनरी) प्रणाली पर दीर्घकालीन प्रभाव देखने को मिले हैं।


यह जोखिम विशेष रूप से पुरुषों में उभर रहा है, जहाँ न केवल स्वास्थ्य व्यवहार बल्कि पूर्ववर्ती रोग-स्थिति (comorbidities) ने मामले और जटिल बना दिए हैं। उदाहरण के लिए भारत में पुरुषों में हृदय रोग, मधुमेह व मोटापे (ओबेसिटी) का बढ़ता प्रचलन चिंता का विषय है।


इसी बीच, WHO ने 5 सितंबर 2025 को अपनी “मॉडल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिंस (Essential Medicines List – EML)” में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं — जिनमें विशेष रूप से मधुमेह व मोटापे की औषधियाँ स्थान पाई हैं।


तो इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि संक्रमण के बाद दिल पर क्या-क्या प्रभाव हो सकते हैं, पुरुषों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान क्यों देना आवश्यक है, और WHO के इस अपडेट का क्या अर्थ है। साथ ही यह भी देखेंगे कि मधुमेह, मोटापा और हृदय-रोग के आपस में रिश्ते कैसे बुने गए हैं, और नवीन चिकित्सा विकल्प — जैसे GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स — किस तरह भूमिका निभा रहे हैं।

1. पोस्ट-COVID दिल-वृक्क जोखिम: क्या जानते हैं हम?
1.1 COVID-19 संक्रमण के बाद हृदय व फुफ्फुस पर प्रभाव

हाल ही में एक शोध में सामने आया है कि लंबे समय तक “लॉन्ग COVID” या संक्रमण के बाद के मामले में मरीजों के हृदय-मांसपेशियों (मायोकार्डियम) तथा फुफ्फुसों (पल्मोनरी) में सूजन (इन्फ्लामेशन) व संरचनात्मक बदलाव देखने को मिले हैं — जिनके परिणामस्वरूप भविष्य में हार्ट फेल्योर, धमनियों की थकावट, वाल्व दोष आदि हो सकते हैं।


इस अध्ययन में लगभग 100 वयस्क (जिनका कोविड-19 संक्रमण दिसंबर 2020 से जुलाई 2021 के बीच पुष्टि हुआ था) को लगभग 300 दिन बाद उन्नत PET/MRI स्कैनिंग के लिए लिया गया। इनमें 57 प्रतिशत में हृदय या फुफ्फुस संबंधी सूजन के सबूत मिले।
यह संकेत है कि कोविड-19 सिर्फ “सांस की बीमारी” नहीं थी — बल्कि यह रक्त वाहिकाओं (वैस्कुलर), हृदय मांसपेशियों और फुफ्फुस प्रणाली तक गहरे प्रभाव डाल सकती है, विशेषकर उन लोगों में जो पूर्व में स्वस्थ माने जाते थे।

1.2 पुरुषों में विशेष रूप से जोखिम क्यों अधिक?

पुरुषों में कोविड-19 के बाद हृदय जोखिम क्यों अधिक देखने को मिल रहा है? इसके पीछे कई कारण हैं:

  • पुरुषों में पुरानी बीमारियाँ अधिक पाई जाती हैं — जैसे कि उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधि का कम होना।

  • कोविड-19 संक्रमण के समय तथा बाद में इन जोखिम-कारकों (risk factors) की उपस्थिति ने पुरुषों में मृत्यु व जटिलताओं की संभावना बढ़ा दी है। उदाहरण स्वरूप, एक वैश्विक अध्ययन में पुरुष कोविड-19 मरीजों में मृत्यु-दर और गंभीरता में भिन्नता पाई गई।

  • स्वास्थ्य-सेवाओं से पुरुषों का जुड़ाव अपेक्षाकृत कम रहा है — स्वास्थ्य जांच, समय पर चिकित्सकीय सलाह व नियमित निरीक्षण में उन्हें पीछे पाया गया है।

इसलिए पुरुष स्वास्थ्य (men’s health) के परिप्रेक्ष्य में, हमें न केवल कोविड-19 के बाद की प्रत्यक्ष जटिलताओं को बल्कि उन “मूक संकेतों” को भी समझना होगा जो भविष्य में हृदय रोग का कारण बन सकते हैं।

1.3 मोटापा, मधुमेह व हृदय रोग का त्रिकोण

जब हम बात करते हैं पुरुषों के स्वास्थ्य की — विशेष रूप से हृदय-रक्त संचार प्रणाली की — तो हमें मोटापा (obesity) और मधुमेह (diabetes) को अलग नहीं कर सकते। भारत में, एक ताज़ा रिपोर्ट प्रस्तुत करती है कि देश में मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग एक साथ बढ़ती समस्या बन रही है — और दक्षिण एशियाई लोगों में हृदय रोग जल्दी और गंभीर रूप से प्रकट होता है।


मधुमेह (विशेष रूप से टाइप 2) में ग्लूकोज नियंत्रण की कमी, इंसुलिन-प्रतिरोध (insulin resistance) और रक्त-योग्य चयापचय (metabolic) असंतुलन पाया जाता है। मोटापा, विशेष रूप से पेट के आसपास जमा वसा (abdominal fat) — पुरुषों में “विषम वसा वितरण” — हृदय रोग व मधुमेह का प्रमुख जोखिम-कारक है। इन तीनों (मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग) का आपस में चक्र जुड़ा हुआ है — एक दूसरे को बढ़ावा देते हैं। उदाहरण स्वरूप, मधुमेह मरीजों में धमनियों में सख्ती (एथेरोस्क्लेरोसिस), वसा संचय व सूजन-प्रक्रियाएँ जल्दी विकसित हो जाती हैं। अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि कोविड-19 संक्रमण ने इन्हीं जोखिम-कारकों के साथ मिलकर पुरुषों में हृदय-रोग का जोखिम और बढ़ा दिया है।

इस तरह, पोस्ट-COVID स्थिति में हृदय-रोग का जोखिम एक “हील-अप के बाद का नया मोर्चा” बन गया है, विशेष रूप से उन पुरुषों के लिए जिन्होंने कोविड-19 के दौरान या उसके बाद उपरोक्त जोखिम-कारकों — मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, धूम्रपान — का सामना किया था।

2. पुरुषों का स्वास्थ्य: आज की चुनौतियाँ
2.1 पुरुषों में हृदय रोग का बढ़ता उदय

भारत में पुरुषों में हृदय-रक्त‌शिरा (कार्डियोवैस्कुलर) बीमारियों की स्थिति चिंताजनक है। एक लेख में डॉ. चटर्जी का कहना है: “कार्डियोवैस्कुलर रोग (CVD) भारतीय पुरुषों में मृत्यु का प्रमुख कारण हैं। इनमें दिल का दौरा, स्ट्रोक और उच्च रक्तचाप शामिल हैं। और यह देखा गया है कि युवाओं में — यहां तक कि 40 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों में — हृदय-घटनाएँ बढ़ती हुई हैं।” कुछ प्रमुख जोखिम-कारक जिन्हें उन्होंने रेखांकित किया है:

  • अस्वास्थ्यकर आहार: अधिक तली-भुनी चीजें, अधिक चीनी व नमक।

  • शारीरिक निष्क्रियता: डेस्क जॉब, व्यायाम-कम जीवनशैली।

  • धूम्रपान व शराब का सेवन।

  • उच्च तनाव स्तर: काम-दबाव, आर्थिक चिंता।

  • आनुवंशिकता व शहरी प्रदूषण।

इन सबका समन्वित प्रभाव पुरुषों में हृदय-रोग की गति को बढ़ा रहा है।

2.2 पुरुषों द्वारा स्वास्थ्य जाँच व उपचार में देरी

स्वास्थ्यप्रबंधन में पुरुषों के व्यवहार पर विचार करें — समय पर डॉक्टर को नहीं जाना, नियमित चेकअप को टालना, लक्षणों को हल्के में लेना। उदाहरणस्वरूप, एक अध्ययन में यह पाया गया है कि पुरुषों में सामान्य रोगों से मृत्यु दर अधिक क्यों है — न केवल जैविक कारणों से बल्कि व्यवहारिक कारणों की वजह से भी।


इसका परिणाम यह है कि जब पुरुषों में कोविड-19 संक्रमण होता है, तो उनके पूर्व जोखिम-कारक अधिक सक्रिय हो जाते हैं, और संक्रमण के बाद भी “साइलेंट” कार्डियोवैस्कुलर बदलाव हो सकते हैं — जिन्हें अक्सर अनदेखा किया जाता है।

2.3 पुरुषों को क्यों विशेष रूप से सतर्क होना चाहिए?
  • यदि पुरुषों में कोविड-19 का इतिहास है और उनके पास मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप, धूम्रपान जैसी जोखिम-स्थितियाँ मौजूद हैं, तो उन्हें संक्रमण के बाद हृदय स्वास्थ्य पर विशेष निगरानी रखनी चाहिए।

  • “मोटापा” को सिर्फ वजन बढ़ने का मामला नहीं माना जाना चाहिये बल्कि यह एक सक्रिय रोग-स्थिति है जो श्रृंखला में मधुमेह व हृदय-रोग को जन्म देती है।

  • इसलिए “men’s health” शब्द-शब्द में सिर्फ गुप्त या सीमित अर्थ नहीं रखता — बल्कि यह उन चुनौतियों, लक्षणों, पूर्व जोखिम-निर्धारण और स्वास्थ्य-सक्रियता (health-engagement) को सम्मिलित करता है जो पुरुषों को बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में ले जाती हैं।

पोस्ट-COVID व बाद-संक्रमण युग में, पुरुषों को यह समझना होगा कि यदि उन्होंने संक्रमण झेली है, तो सिर्फ “साँस में कमी” आदि पर नहीं बल्कि लंबे समय तक प्रभावित हो सकने वाले हृदय, वसा वितरण व चयापचय (metabolic) कारकों पर भी नजर रखना चाहिए।

3. मधुमेह-मोटापा-हृदय रोग: विज्ञान, तथ्य व चुनौतियाँ
3.1 भारत में बढ़ता तिकोना बोझ: मधुमेह, मोटापा व हृदय रोग

हाल की रिपोर्ट बताती है कि भारत एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती का सामना कर रहा है — जिसमें मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग आपस में गुंथे हुए हैं। सरल तथ्य यह है कि जब मोटापा बढ़ता है, तो इंसुलिन-प्रतिरोध तथा ग्लूकोज नियंत्रण की कमी होती है, जिससे मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है; और दोनों स्थितियाँ मिलकर हृदय-धमनी, वसा संचय व सूजन-प्रक्रियाओं को तेज करती हैं।
उदाहरण के लिए:

  • मोटापा व विशेष रूप से पेट के आसपास की वसा पुरुषों में हृदय जोखिम को विशेष रूप से बढ़ाती है।

  • मधुमेह में लंबे समय तक उच्च ग्लूकोज स्तर धमनी-ह्रास (एथेरोस्क्लेरोसिस) को गति देते हैं।

  • इन सबका संयोजन कोविड-19 व उसके बाद के लक्षण-स्थिति में “हृदय-सक्षम स्थिति” को कमजोर कर देता है — जिससे पोस्ट-COVID हृदय-रोग का जोखिम और बढ़ जाता है।

3.2 उपचार की चुनौतियाँ: diabetes treatment व obesity drug की कहानी

जब हम “diabetes treatment” व “obesity drug” की ओर देखते हैं, तब यह स्पष्ट है कि पैमाने पर चुनौतियाँ हैं — निदान, पहुँच, दवाओं की लागत, और रोग-सम्बंधित व्यवहार।

  • उदाहरण के लिए, मधुमेह उपचार में ग्लूकोज-नियंत्रण व लक्षण-प्रबंधन के साथ-साथ जीवनशैली-परिवर्तन (आहार, व्यायाम) की भूमिका अहम है।

  • मोटापे (ओबेसिटी) के इलाज में अब तक मुख्यतः जीवनशैली-परिवर्तन, आहार-निरोध, व्यायाम व कभी-कभी सर्जरी शामिल रही है। लेकिन अब दवाओं की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।

  • “obesity drug” यानी मोटापे-विरोधी दवाओं के क्षेत्र में विशेष रूप से ग्लूकोगन-लाइक पेप्टाइड-1 (GLP-1) रिसेप्टर एगोनिस्ट्स का बोलबाला है — जो न केवल मधुमेह उपचार में बल्कि मोटापा नियंत्रण में भी प्रभावशाली साबित हो रही हैं।

  • लेकिन इन दवाओं की चुनौतियाँ हैं — कीमतें, रोग-सक्रिय पहुँच, स्थानीय स्वास्थ्य-सिस्टम की तैयारी, चिकित्सकीय सुझाव, और लम्बे समय तक प्रभाव व सुरक्षा की जानकारी।

3.3 GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स: क्रांतिकारी लेकिन विचार-विमर्श योग्य

यहाँ हम “GLP-1 agonist” वर्ग की दवाओं पर एक नज़र डालेंगे — यह “liraglutide benefits”, “weight loss injection”, “diabetes treatment” जैसे खोज-शब्दों से सीधे जुड़े हैं।

  • GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स (GLP-1 RAs) का मूल तंत्र यह है कि ये ग्लूकोगन-लाइक पेप्टाइड-1 (एक प्राकृतिक हार्मोन) की तरह काम करते हैं — जो भोजन के बाद पैनक्रियास से इंसुलिन स्राव को बढ़ाते हैं, ग्लूकागन को कम करते हैं, पाचन को धीमा करते हैं और मस्तिष्क में तृप्ति (satiety) का संकेत बढ़ाते हैं।

  • उदाहरणस्वरूप, Semaglutide नामक दवा ने मधुमेह टाइप 2 व मोटापे दोनों में प्रभाव दिखाया है।

  • 2025 में, WHO ने अपनी एसेन्शियल मेडिसिंस लिस्ट में इस तरह की दवाओं को शामिल किया है — “Medicines for diabetes and obesity: GLP-1 receptor agonists … semaglutide, dulaglutide and liraglutide … added to the EML”।

  • Side-effects या जोखिम की दृष्टि से, GLP-1 RAs में सामान्यतः मतली, उल्टी, पाचन-सम्बंधित प्रभाव, इंजेक्शन स्थल पर समस्या आदि देखे गए हैं।

  • इसके अलावा, इन दवाओं का असर सिर्फ मधुमेह व मोटापे पर ही नहीं बल्कि कॉर्‍डियोवैस्कुलर परिणामों पर भी देखने को मिल रहा है — यानि हृदय-घटना (cardiovascular events) का जोखिम कम करने की दिशा में संकेत मिल रहे हैं।

इन सब तथ्यों के बीच यह समझना महत्वपूर्ण है कि “weight loss injection” या “obesity drug” जैसे शब्द केवल फैशन व सेलिब्रिटी ट्रेंड नहीं हैं — बल्कि यह भविष्य-दृष्टि से देखी जाने वाली चिकित्सा क्रांति हैं, जिनका भारत जैसे देश में पहुँच व उपयोग बड़ी चुनौती हो सकती है।

4. World Health Organization का आवश्यक औषधियों में नया अपडेट: क्या-क्या शामिल हुआ?
4.1 EML (Essential Medicines List) व इसका महत्व

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) हर दो साल में अपनी मॉडल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिंस (EML) व EML for Children (EMLc) प्रकाशित करती है — जो उन दवाओं को चिह्नित करती हैं जो किसी देश की स्वास्थ्य-प्राथमिकताओं, रोग प्रचलन एवं लागत-प्रभावकारिता को ध्यान में रखते हुए “जनसंख्या की प्राथमिक स्वास्थ्य-जरूरतों” को पूरा करती हैं।
24वीं संध्‍या (edition) 2025 में WHO ने इस सूची में कई नई दवाएँ जोड़ी हैं — जिसमें मधुमेह व मोटापे के लिए GLP-1 RAs तथा कुछ कैंसर-उपचार शामिल हैं।

4.2 मधुमेह व मोटापे संबंधी दवाएं जो शामिल हुईं

विशेष रूप से ध्यान देने योग्य बिंदु यह है कि WHO ने अब GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स को EML में शामिल करने का निर्णय लिया है — यह किसी भी स्वास्थ्य-सिस्टम में इन दवाओं की पहुँच व उपलब्धता-नीति (access) को बढ़ावा देगा।
उदाहरण के लिए:

  • “GLP-1 receptor agonists – semaglutide, dulaglutide and liraglutide – … added to the EML”।

  • WHO ने इस बदलाव को “a significant step toward expanding access to new medicines with proven clinical benefits and with high potential for global public-health impact” कहा है।

  • दस्तावेज में यह स्पष्ट किया गया है कि मोटापा व मधुमेह आज बहुत तेजी से बढ़ रही चुनौतियाँ हैं — “Over 800 million people were living with diabetes in 2022 … more than 1 billion people worldwide are affected by obesity…”

  • लेकिन WHO ने यह भी स्पष्ट किया कि इन दवाओं तक पहुँच सीमित है — जैसे उच्च कीमतें, जन-सामान्य खपत में कमी, जनस्वास्थ्य-प्रणाली (health-systems) की तैयारी इन बाधाओं में शामिल हैं।

4.3 इस अपडेट का चिकित्सा-कार्यक्षमता (impact)

यह अपडेट निम्न-प्रकार प्रभाव उत्पन्न कर सकता है:

  • किसी देश, विशेष रूप से विकासशील देशों में, इन दवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य-सेवाओं (primary-care) के अंतर्गत उपलब्ध करवाने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

  • चिकित्सकीय गाइडलाइन्स में इन दवाओं का समावेश बढ़ सकता है, जिससे “diabetes treatment” व “obesity treatment” में विकल्प बड़ा होगा।

  • यह संकेत भी है कि मोटापा व मधुमेह की न केवल “वजन कम करने” की दिशा में, बल्कि “हृदय-रोग जोखिम व गुर्दा (किडनी) रोग जोखिम को कम करने” की दिशा में भी दवाओं से प्रभाव संभव है — WHO ने स्पष्ट किया कि GLP-1 RAs उक्त जोखिमों में कमी दिखा रही हैं।

  • नीति-निर्माताओं (policy-makers) व स्वास्थ्य-सिस्टम अंशधारकों (stakeholders) को यह स्पष्ट संदेश मिला है कि अब यह सिर्फ “लग्जरी दवा” नहीं रह गई — बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य-प्राथमिकता में शामिल हो चुकी है।

4.4 ध्यान रहने योग्य बातें व सीमाएँ
  • हालांकि दवाओं को EML में शामिल किया गया है, वास्तविक उपयोग व उपलब्धता में जोखिम-विरोध व आर्थिक पहुँच (affordability) बड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। WHO ने कहा है कि “High prices of medicines like semaglutide and tirzepatide are limiting access … Prioritising those who would benefit most … encouraging generic competition … and making these treatments available in primary care … are key.”

  • इसके अलावा, मोटापे-उपचार (obesity treatment) में लम्बी अवधि के परिणाम, विशेष रूप से हृदय-वृक्क (cardio-renal) जटिलताओं पर प्रभाव, अभी भी पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं हैं।

  • चिकित्सकीय निगरानी, जीवनशैली-परिवर्तन, रोग-प्रबंधन (disease-management) का समन्वित मॉडल आवश्यक है — सिर्फ दवा लगाना पर्याप्त नहीं।

5. “ड्रग डीटेल्स” — ­मूल तंत्र, क्लिनिकल ट्रायलों का सार, किन्हें सावधानी रखनी चाहिए
5.1 GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स — तंत्रज्ञान (mechanism) विस्तार से

GLP-1 (Glucagon-Like Peptide-1) एक प्राकृतिक इनक्रेटिन हार्मोन है, जो भोजन के बाद छोटी आंत से स्रावित होता है और निम्न-प्रक्रियाएँ करता है:

  • पैंक्रियास को इंसुलिन स्राव बढ़ाने हेतु प्रेरित करना (जब ग्लूकोज स्तर बढ़े हों)

  • ग्लूकागन (जो ग्लूकोज बढ़ाता है) के स्राव को कम करना

  • भोजन की पाचन गति को धीमा करना (जिससे भोजन-उत्पन्न ग्लूकोज रक्तप्रवाह में धीरे-धीरे प्रवेश करे)

  • मस्तिष्क (हाइपोथैलेमस) में तृप्ति-सिग्नल उत्पन्न करना, भूख कम करना।
    GLP-1 RAs दवाएं इस हार्मोन की क्रिया-प्रतिकृति (agonist) करती हैं — यानि यह रिसेप्टर से जुड़कर उसी तरह काम करती हैं जैसे प्राकृतिक GLP-1 करता है।
    इस तरह:

  • ये दवाएं ग्लूकोज कंट्रोल को बेहतर बनाती हैं — “diabetes treatment” में महत्वपूर्ण।

  • साथ ही, भूख कम करती हैं, भोजन-कम मात्रा में संतृप्ति प्रदान करती हैं — “weight loss injection” या मोटापे उपचार में सहायक।

  • अपेक्षाकृत, यही तंत्र हृदय-वृक्क (cardiovascular) व गुर्दा (renal) सुरक्षा में भी योगदान दे सकता है — शोध अब इस दिशा में बढ़ रहा है।

5.2 प्रमुख दवाएं व क्लिनिकल ट्रायल्स

कुछ उदाहरण दवाओं के नाम व ट्रायल्स की झलक:

  • Semaglutide: इस दवा ने न सिर्फ मधुमेह में ग्लूकोज नियंत्रण दिखाया है बल्कि मोटापे में भी महत्वपूर्ण वजन-घटाव (weight loss) दिखा रहा है।

  • Liraglutide: यह पूर्व में मधुमेह उपचार में उपयोग हुआ है और मोटापे व उससे जुड़ी जोखिम-शर्तों में भी प्रयोग में लाया गया।

  • Dulaglutide: मधुमेह के लिए एक अन्य GLP-1 RA।

  • ट्रायल डेटा के अनुसार, GLP-1 RAs के माध्यम से वज़न में कमी का अनुपात और हृदय-सुरक्षा संबंधी संकेत प्राप्त हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, एक समीक्षा-लेख में कहा गया कि GLP-1 RAs (including tirzepatide, a dual GIP/GLP-1 agonist) मोटापे के इलाज में प्रभावशाली हैं।

5.3 संभावित लाभ
  • बेहतर ग्लूकोज नियंत्रित करना — मधुमेह की जटिलताओं को रोका जा सकता है।

  • वज़न कम करना — विशेष रूप से पुरुषों व मधुमेह-रुग्णों में लाभ।

  • हृदय-वृक्क जोखिम में कमी का संकेत — शोध ने यह दिखाना शुरू किया है कि GLP-1 RAs हृदय-घटना (cardiovascular events) व किडनी रोग (kidney disease) के जोखिम को कम कर सकते हैं।

  • मोटापा-विषयक लक्षण-कोमॉरबिडिटीज (co-morbidities) जैसे उच्च रक्तचाप, डिस्लिपिडेमिया (lipid imbalance), फैटी लिवर रोग (NAFLD) आदि पर सकारात्मक प्रभाव।

5.4 संभावित दुष्प्रभाव (side-effects) व सावधानी
  • भूख कम होना, मतली, उल्टी, पाचन संबंधी असुविधाएँ — जी आई (gastro-intestinal) लक्षण सामान्य।

  • इंजेक्शन स्थल पर प्रतिक्रिया, कभी-कभी पित्ताशय (gallbladder) संबंधी जटिलताएँ।

  • कुछ मामलों में हृदय-धड़कन तेज होना (heart-rate increase) या अन्य मेटाबॉलिक बदलाव। इसलिए चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक।

  • यह दवाएँ अकेले पर्याप्त नहीं हैं — आदत-परिवर्तन, आहार, व्यायाम तथा चिकित्सकीय सुझाव के साथ उपयोग करना आवश्यक है।

  • भारत जैसे विकासशील-देशों में इन दवाओं की लागत व उपलब्धता एक बड़ी बाधा बनी हुई है — WHO ने भी इस पर विशेष चिंता व्यक्त की है।

5.5 “diabetes treatment” और “weight loss injection” के परिप्रेक्ष्य में
  • यदि एक पुरुष मरीज को टाइप 2 मधुमेह है और उसके साथ मोटापा भी है (BMI ≥ 30), तो GLP-1 RA जैसे विकल्प पर विचार किया जा सकता है — विशेष रूप से जब पुरानी उपचार रणनीतियाँ पर्याप्त सफल नहीं हुई हों।

  • यह उपाय केवल “वजन कम करने” का साधन नहीं है, बल्कि “हृदय-सुरक्षा, गुर्दा-रक्षा व जीवन-गुणवत्ता सुधारने” का माध्यम बन सकता है।

  • चिकित्सक एवं रोगी दोनों को यह समझना होगा कि दवा-अनुपालन (medication adherence), जीवनशैली-परिवर्तन, नियमित स्वास्थ्य-जाँच ये तीनों मिलकर सफलता-कहानी बनाते हैं।

6. पोस्ट-COVID स्थिति में क्या करें? — सवाल व उत्तर
6.1 आपको कब जाँचना चाहिए कि “मेरी स्थिति सामान्य है या जोखिम में?”

यदि आपने कोविड-19 का संक्रमण झेला है — खासकर यदि:

  • आपके पास पूर्व में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा या धूम्रपान जैसी जोखिम-स्थिति है;

  • आप पुरुष हैं और वर्षा कम (उदाहरण के लिए < 50);

  • संक्रमण के बाद थकान, सीने में दर्द, सांस फूलना, हार्ट पल्पिटेशन्स (heart palpitations) जैसे लक्षण अनुभव कर रहे हैं;

तो आपको विशेष रूप से हृदय-वृक्क व फुफ्फुस स्वास्थ्य के लिए जाँचना चाहिए। उदाहरण के लिए, Mount Sinai Health System के अध्ययन के अनुसार, मरीजों में संक्रमण के लगभग 300 दिन बाद भी PET/MRI द्वारा हृदय-और फुफ्फुस-संबंधी सूजन देखी गई है।

6.2 पुरुषों के लिए विशेष सलाह
  • नियमित रूप से स्वास्थ्य-जाँच कराना — रक्तशर्करा (HbA1c), लिपिड-प्रोफाइल, रक्तचाप, BMI, सीने-चेकअप आदि।

  • जीवनशैली-परिवर्तन: संतुलित आहार, तली-भुनी व जंक फूड से बचाव, प्रतिदिन कम-से-कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि।

  • धूम्रपान व शराब सेवन से दूर रहना — पुरुषों में यह जोखिम और बढ़ाते हैं।

  • संक्रमण के बाद यदि सीने में असामान्य दर्द, अचानक सांस फूलना, धड़कन तेज होना जैसे लक्षण हों — तत्काल चिकित्सकीय सलाह।

6.3 चिकित्सकीय दृष्टिकोण से क्या-क्या नया है?
  • कोविड-19 संक्रमण के बाद “हृदय-सक्षम हिसाब से पुनरावलोकन” (cardio-risk reassessment) की दिशा में चिकित्सकीय जागरुकता बढ़ रही है।

  • मधुमेह-मोटापा-हृदय रोग का संयोजन जोखिम को बहुत बढ़ा देता है — इसलिए “obesity drug” व “diabetes treatment” विकल्पों पर भी नए दृष्टिकोण बन रहे हैं।

  • यदि मरीज सफल जीवनशैली-परिवर्तन के साथ चलते हैं, तो GLP-1 RAs जैसी दवाओं का समावेश चिकित्सक विचार कर सकते हैं।

7. भारत में परिदृश्य, चुनौतियाँ और आगामी राह
7.1 भारत-विशेष चुनौतियाँ
  • भारत में पुरुषों में हृदय-रोग बड़ा स्वास्थ्य-चुनौती बना हुआ है — धूम्रपान, शराब, sedentary कार्यशैली व पुरानी बीमारियाँ जोखिम बढ़ा रही हैं।

  • मोटापा व मधुमेह का बढ़ता प्रचलन — और ये रोग अब युवाओं में भी दिखने लगे हैं। उदाहरण के लिए, भारत में “public health challenge: the growing burden of diabetes, obesity and heart disease” शीर्षक से रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई है।

  • दवाओं की ऊँची कीमतें व स्वास्थ्य-सेवा पहुँच में असमानताएँ (inequities) — नई दवाओं का लाभ उन्हीं तक सीमित हो सकता है जिनकी आर्थिक स्थिति व स्वास्थ्य-सिस्टम मजबूत है।

  • संक्रमण के बाद-देखभाल (post-COVID follow-up) व पुरुषों में विशेष “men’s health” जागरुकता अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँची है।

7.2 भारत में लॉन्च-योजना व संभावनाएँ
  • भारत में नए GLP-1 RAs व मोटापा-उपचार दवाओं के आगमन की संभावना है — लेकिन बाजार तैयारी, मूल्‍य निर्धारण व जनसंख्या आधार पर पहुँच उनकी सफलता की कुंजी होगी।

  • सरकारें व सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाएँ इन नई दवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य-केंद्रों तक पहुँचाने हेतु नीति-निर्माण कर रही हैं। WHO के EML में शामिल होने से यह दिशा और मजबूती पाएगी।

  • पुरुषों में स्वास्थ्य-सक्रियता बढ़ाने हेतु “men’s health awareness programmes” व चिकित्सकीय स्क्रीनिंग-कैम्प्स का आयोजन आवश्यक होगा।

7.3 आगामी राह व रणनीतियाँ
  • संक्रमण-उपश्च (post-COVID) स्थिति में स्वास्थ्य-प्रबंधन को नियमित चेक-अप, जोखिम-मापन व व्यक्तिगत सलाह-मूलक बनाना होगा।

  • चिकित्सक व रोगी दोनों को यह समझना होगा कि नया “drug option” जीवनशैली-परिवर्तन का विकल्प नहीं बल्कि उसे समर्थन देने वाला है।

  • नीति-निर्माताओं को दवाओं की लागत कम करने, जन-पहुंच बढ़ाने, चिकित्सकीय प्रशिक्षण व जन-जागरुकता अभियान पर ध्यान देना होगा।

  • पुरुषों के स्वास्थ्य में “निरंतरता” एवं “पूर्व-ज्ञात जोखिम-फॉलोअप” (pre-known risk follow-up) पर बल देना होगा — अर्थात संक्रमण के बाद सिर्फ ठीक होना पर्याप्त नहीं; स्वास्थ्य-सक्रिय पुनरावलोकन जरूरी है।

निष्कर्ष

संक्षिप्त में कहें तो — यदि आपने कोविड -19 संक्रमण झेला है, विशेषकर पुरुष हैं, और आपके पास मोटापा, मधुमेह, धूम्रपान, उच्च रक्तचाप जैसी जोखिम-स्थिति है — तो यह लेख आपके लिए एक चेतावनी और मार्गदर्शिका दोनों है:

  • पोस्ट-COVID दिल-वृक्क जोखिम वगत है, विशेष रूप से उन पुरुषों में जिनकी जीवनशैली व पूर्व चिकित्सकीय अवस्थाएँ अनुकूल नहीं थीं।

  • पुरुषों की स्वास्थ्य-जागरुकता (men’s health awareness) अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि महामारी ने सिर्फ संक्रमण का चक्र नहीं चलाया बल्कि उसके बाद के स्वास्थ्य प्रभावों को भी सक्रिय किया है।

  • मधुमेह (diabetes treatment) व मोटापा (obesity treatment) के क्षेत्र में चिकित्सा-विश्व में नए विकल्प सामने आ रहे हैं — विशेष रूप से GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स (weight loss injection) — जो अब सिर्फ “वजन कम करने” तक सीमित नहीं रह गए, बल्कि हृदय-वृक्क व गुर्दा-रक्षा के संदर्भ में भी उपयोगी साबित हो रहे हैं।

  • World Health Organization द्वारा आवश्यक औषधियों (essential medicines) की सूची में इन दवाओं का शामिल होना एक सकारात्मक स्वास्थ्य-नीति सिग्नल है — लेकिन व्यवहार में इस सिग्नल को वास्तविक-परिवर्तन (real-world change) में बदलने के लिए तमाम चैलेंज्स मौजूद हैं।

  • भारत जैसे देशों में पुरुषों को विशेष रूप से सतर्क रहने, स्वास्थ्य-जाँच नियमित कराने, जीवनशैली बदलने तथा चिकित्सकीय विकल्पों की जानकारी रखने की आवश्यकता है।

संदर्भ
  1. “WHO updates list of essential medicines to include key cancer, diabetes treatments”, WHO News Release, 5 September 2025.

  2. “Long COVID May Cause Long-Term Changes in the Heart and Lungs and May Lead to Cardiac and Pulmonary Diseases”, Mount Sinai News, 6 May 2025.

  3. “Review: Glucagon-Like Peptide-1 Receptor Agonists”, StatPearls, 2024.

  4. “GLP-1 single, dual, and triple receptor agonists for treating Type 2 diabetes and obesity”, The Lancet eClinicalMedicine, 2024.

  5. “India’s public health challenge: The growing burden of diabetes, obesity and heart disease”, Economic Times, 29 September 2025.

  6. “Men’s health: Doctor shares ‘leading cause of death among … Indian men’”, Hindustan Times, 23 July 2025.

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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