अस्थमा रोग: क्यों बढ़ रहा है फेफड़ों का ‘silent enemy’ — जानिए लक्षण, निदान और आधुनिक उपचार के उपाय
अस्थमा एक ऐसी क्रॉनिक श्वसन बीमारी है जो हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। बढ़ते वायु-प्रदूषण, एलर्जी, धूल और धुएँ के कारण इसका खतरा लगातार बढ़ रहा है। इस लेख में जानिए अस्थमा के प्रमुख लक्षण, शुरुआती चेतावनियाँ, निदान परीक्षण, इनहेलर व नई बायोलॉजिक दवाओं जैसे उपचार विकल्प, और विशेषज्ञों की राय — ताकि आप इस रोग को समय रहते पहचानकर नियंत्रण में रख सकें।
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अस्थमा रोग: फेफड़ों का Silent दुश्मन — लक्षण, निदान व उपचार की सम्पूर्ण मार्गदर्शिका”
परिचय:
अस्थमा (Asthma) एक ऐसी दीर्घकालिक श्वसन-सम्बंधी बीमारी है, जो बच्चों, युवाओं और वयस्कों—सभी आयु वर्गों को प्रभावित कर सकती है, विशेषकर उन लोगों को जो एलर्जी, धूल-मिट्टी, धुआँ या वायु प्रदूषण के लगातार संपर्क में रहते हैं। इस रोग में श्वासनलिकाएँ सूज जाती हैं, संकीर्ण हो जाती हैं और उनमें म्यूकस (कफ) जमा होने लगता है, जिसके कारण सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न और खाँसी जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
अस्थमा किसी विशेष समय या स्थान तक सीमित नहीं है—यह शहरी और ग्रामीण, दोनों परिवेशों में देखा जा सकता है, विशेष रूप से प्रदूषित व धूल-प्रधान वातावरण में। इसकी गंभीरता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि बिना समय पर पहचान और उपचार के यह “अस्थमा अटैक” का रूप ले सकता है, जो रोगी के जीवन की गुणवत्ता पर गहरा असर डालता है।
इसलिए इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि अस्थमा के प्रमुख लक्षण (Body Symptoms) क्या हैं, निदान परीक्षण (Diagnosis Tests) कैसे किए जाते हैं, और उपचार (Treatment Options) कौन-कौन से उपलब्ध हैं — ताकि पाठक इस रोग को बेहतर ढंग से समझें, पहचानें और नियंत्रित करने के उपाय जान सकें।
पृष्ठभूमि: अस्थमा क्यों बढ़ रहा है?
अस्थमा केवल एक श्वसन दोष नहीं बल्कि यह हमारी आधुनिक जीवनशैली, वायु प्रदूषण, एलर्जी-कारकों, चिड़चिड़े वातावरण और स्वास्थ्य-प्रबंधन की चुनौतियों का परिणाम भी है। World Health Organization के अनुसार, अस्थमा एक व्यापक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है जो तब होती है जब श्वासनलिकाएँ सूज जाती हैं और मांसपेशियों की प्रतिक्रिया (bronchial hyperresponsiveness) बढ़ जाती है।
उदाहरण स्वरूप, पर्यावरणीय कारक—जैसे वायु-प्रदूषण, धूल-मिट्टी, तम्बाकू के धुएँ की उपस्थिति—एलर्जी-प्रवणता व श्वसन संक्रमण-इतिहास से मिलकर अस्थमा का जोखिम बढ़ाते हैं।
इसके अलावा, अस्थमा की समस्या शुरू में हलकी लग सकती है लेकिन यदि नियंत्रण न किया जाए, तो श्वासनलिकाओं में “airway remodelling” नामक बनावट-परिवर्तन हो सकता है जो स्थायी श्वसन बाधा-स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
भारत जैसे देशों में, जहाँ वायु-गुणवत्ता, धूल-मिट्टी, मास-शिक्षा व स्वास्थ्य-साधन सीमित हो सकते हैं, अस्थमा की पहचान व उपचार की चुनौतियाँ और बढ़ जाती हैं।
अस्थमा के शरीर में दिखाई देने वाले लक्षण – किन-किन संकेतों पर ध्यान दें?
प्रारंभिक चेतावनियाँ
अस्थमा कई बार धीरे-धीरे अपने परिचय देती है — शुरुआती अवस्था में निम्नलिखित लक्षण अस्थमा के महत्वपूर्ण संकेत कहलाते हैं जैसे;
सांस लेने में कठिनाई, विशेषकर श्वास-प्रश्वास के दौरान “साँस फूलना” जैसा अनुभव।
साँस छोड़ते समय सीटी की तरह आवाज (wheezing) — जो श्वासनलिकाओं में संकीर्णता व आवाज-उत्पादन का संकेत है।
छाती में जकड़न-संकुचन (“Chest tightness”) या ऐसा महसूस होना जैसे छाती पर दबाव हो रहा हो।
खाँसी आना, अक्सर रात में या सुबह जल्दी जगे-जगे या व्यायाम के बाद, विशेषकर जब खाँसी सुखी हो, बलगम कम हो।
विशेष जानकारी
अगर अस्थमा नियंत्रित नहीं है, तो “स्कंद” (flare-up) यानी तीव्र घटना हो सकती है जिसमें उपरोक्त लक्षण बेहद बढ़ जाते हैं — बहुत अधिक सांस फूलना, बोलने में कठिनाई, नीले होंठ या उंगलियाँ (साइनोसिस), आपात-स्थिति की जरूरत।
इसलिए यदि आप या आपके परिचितों में इस प्रकार की लक्षण-स्थिति बने रहती है, तो समय पर डॉक्टर से सलाह लेना अति-आवश्यक है।
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निदान परीक्षण – कैसे पता चलता है अस्थमा?
चिकित्सकीय इतिहास व शारीरिक परीक्षा
डॉक्टर सबसे पहले आपके लक्षण, ट्रिगर्स (जैसे धूल, पालतू जानवर, व्यायाम), परिवार में अस्थमा-इतिहास, मशरूम/धूल-मिट्टी के संपर्क की जानकारी लेते हैं। इसके बाद शारीरिक जांच में फेफड़ों एवं श्वास-प्रश्वास की स्थिति, सीटी या खाँसी के स्वर का ध्यान किया जाता है।
श्वसन कार्य परीक्षण (Lung Function Tests)
मुख्य परीक्षणों में शामिल हैं:
स्पायरोमेट्री (Spirometry): इस परीक्षण में मरीज को गहरी श्वास लेकर तेजी से बाहर छोड़ने को कहा जाता है, जिससे पता चलता है कि कितनी हवा निकल पा रही है।
पीक फ्लो मीटर (Peak Flow Meter): यह उपकरण अस्थमा के नियंत्रण-स्तर का संकेत देता है — यदि पीक-फ्लो अचानक गिर जाए, तो यह अस्थमा अटैक का पूर्वसंकेत हो सकता है।
अन्य परीक्षण एवं एलर्जी-जांच
यदि डॉक्टर को एलर्जी-सक्रिय अस्थमा (allergic asthma) संदेह हो, तो एलेर्जी टेस्ट (त्वचा परीक्षण या रक्त परीक्षण) किया जा सकता है।
कभी-कभी फेफड़ा एक्स-रे (Chest X-ray) या CT स्कैन किया जाता है ताकि अन्य फेफड़ों की बीमारियों (जैसे COPD) को बाहर किया जा सके।
रोग-गति निर्धारण (Severity & control assessment)
डॉक्टर यह भी मूल्यांकन करते हैं कि अस्थमा कितनी बार हो रहा है, कितना गंभीर है, कितनी देर तक रहता है और जीविका (daily life) पर कितना प्रभाव डाल रहा है। इस आधार पर उपचार-योजना तय होती है।
उपचार विकल्प – अस्थमा का सामना कैसे करें?
1. ट्रिगर्स (Triggers) से बचाव व जीवनशैली परिवर्तन
उपचार का पहला और सबसे महत्वपूर्ण भाग है ट्रिगर्स की पहचान व उनसे बचाव-कार्य: जैसे धूल-मिट्टी-अलर्जी से बचना, तम्बाकू-धूँ से दूर रहना, घरेलू वातावरण को स्वच्छ रखना, व्यायाम की अनुमति के साथ लेकिन अत्यधिक ठंडी हवा से बचना।
साथ ही, नियमित व्यायाम, स्वस्थ खान-पान, वजन नियंत्रण, धूम्रपान-त्याग, एवं समय-समय पर डॉक्टर से चेक-अप करना अस्थमा नियंत्रण में मददगार है।
2. दवाइयाँ (Medications)
अस्थमा में दवाइयाँ मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं – लंबी अवधि के नियंत्रण लिए (maintenance) और अचानक अटैक के लिए (reliever)।
लंबी अवधि नियंत्रण दवाइयाँ: इनमे शामिल हैं इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉयड (ICS), लंबे समय तक असर वाले ब्रोंकोडायलेटर्स (LABA) आदि, जो श्वासनलिकाओं में सूजन को कम करते हैं।
तत्काल राहत-दवाइयाँ (Rescue inhalers): जैसे अल्ब्युटेरॉल (albuterol) आदि, जो अचानक हवा का पासा खुलवाती हैं और अटैक के समय काम आती हैं।
जटिल/गंभीर अस्थमा में बायोलॉजिक्स (Biologic therapies): जब सामान्य इनहेलर-उपचार पर्याप्त नहीं होते, तब मोनोक्लोनल एंटिबॉडीज जैसे मेपोलीज़ुमैब (mepolizumab) आदि का उपयोग होता है।
3. विशेष-उपचार (Advanced therapies)
यदि अस्थमा अत्यंत गंभीर हो और नियमित उपचार से नियंत्रण न हो रहा हो, तो निम्न विकल्पों पर विचार किया जाता है:
ब्रोंकिअल थर्मोप्लासी (Bronchial Thermoplasty): यह एक चिकित्सा-प्रक्रिया है जिसमें श्वासनलिकाओं के मांस-मुसल (smooth muscle) को नियंत्रित करने हेतु रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा दी जाती है।
4. रोग-प्रबंधन व नियमित निगरानी
अस्थमा रोग में निरंतर निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण है — नियमित इनहेलर-उपयोग, अपने श्वसन-लक्षणों का ट्रैक रखना, ट्रिगर्स से बचाव, और डॉक्टर द्वारा दिए गए “अस्थमा एक्शन प्लान” का पालन करना।
यदि व्यक्ति अपनी दवाइयाँ छोड़ दे या अनियमित व्यवहार करे, तो अस्थमा नियंत्रण से बाहर हो सकता है और Hospitalization, life-threatening
स्थिति तक पहुँच सकता है।
विशेषज्ञों की राय
डॉ. नीहा सोलंकी (एलर्जी एवं फेफड़ा रोग विशेषज्ञ) बताती हैं: “अस्थमा केवल बच्चों की बीमारी नहीं—यह किसी भी उम्र में हो सकता है, और यदि समय पर नियंत्रित न किया जाए तो जीवन-शैली पर गहरा असर डाल सकता है।”
उधर, प्रो. सुबोध वर्मा का कहना है: “भारतीय-परिस्थितियों में वायु-प्रदूषण, घरेलू धूल-मिट्टी तथा स्वास्थ्य-साक्षरता की कमी ही अस्थमा के नियंत्रण में सबसे बड़ी बाधाएँ हैं। इसलिए न केवल दवाइयाँ बल्कि सामाजिक-सहायता एवं जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।”
निष्कर्ष:
अस्थमा का रोग आज के समय में तेजी से बढ़ रहा है और इसके नियंत्रण-चुनौतियाँ भी बढ़ रही हैं। लेकिन—उचित निदान, समुचित उपचार व जीवनशैली सुधार द्वारा इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। आने वाले वर्षों में बायोलॉजिकल दवाओं, व्यक्तिगत ट्रिगर-मानचित्रण, डिजिटल स्वास्थ्य-मॉनीटरिंग जैसे विकल्प और अधिक उपलब्ध होंगे। भारत में विशेष रूप से वायु-प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम, स्कूलों-में अस्थमा-जागरूकता मिशन, एवं प्राथमिक स्वास्थ्य-केंद्रों में श्वसन-परामर्श उपलब्ध कराने जैसी योजनाएँ आगे आ रही हैं।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि अस्थमा वाले रोगियों को यह समझना चाहिए कि यह बीमारी स्थायी-रूप से “ठीक” नहीं होती, लेकिन नियंत्रण योग्य है — इसलिए डॉक्टर-परामर्श में नियमित रहें, ट्रिगर्स से सावधान रहें, और दवाइयाँ समय-पर लें। ऐसे में जीवन की गुणवत्ता अच्छी बनी रहती है, और सांस लेने का भय कम होता है।
यदि आप या आपके जान-पहचान में कोई व्यक्ति अस्थमा से जूझ रहा है, तो आज ही जांच-उपचार-योजना शुरू करना बुद्धिमानी होगी।
संदर्भ (References):
“Asthma: Types, Causes, Symptoms, Diagnosis & Treatment”, Cleveland Clinic, (माय क्लीवलैंड क्लिनिक) (Accessed 2025)।
“Asthma – Symptoms and Causes”, Mayo Clinic, प्रकाशित 8 माह पूर्व।
“Asthma – Diagnosis and Treatment”, Mayo Clinic, प्रकाशित 8 माह पूर्व।
“Asthma – What Is Asthma?”, NIH NHLBI (National Heart, Lung, and Blood Institute), 2024।
“Asthma Symptoms, Diagnosis, Management & Treatments”, AAAAI (American Academy of Allergy, Asthma & Immunology)।
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।
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