भारत और विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक स्वास्थ्य एआई क्रांति के लिए एकजुट हुए: Global South में स्केलेबल एआई उपयोग मामलों का आह्वान

भारत और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मिलकर वैश्विक स्वास्थ्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है। इस “Global Call for Scalable AI Use Cases” के तहत WHO Global Initiative on Digital Health (GIDH) और IndiaAI मिलकर ऐसे अभिनव समाधान खोज रहे हैं जो स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ, तेज़ और किफायती बना सकें — विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों के लिए। यह पहल स्वास्थ्य प्रणाली को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने, डेटा-सुरक्षा और समावेशी डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। भारत की नेतृत्वकारी भूमिका न केवल देश की तकनीकी क्षमताओं को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे “AI for All” की भावना अब वैश्विक स्वास्थ्य-नीति का केंद्र बनती जा रही है।

LATEST NEWSMEDICAL NEWS

ASHISH PRADHAN

10/21/20252 min read

India and WHO collaboration on Global Health AI revolution with digital innovation visuals
India and WHO collaboration on Global Health AI revolution with digital innovation visuals

भारत और World Health Organization ने हेल्थ के क्षेत्र में AI प्रयोगों के लिए वैश्विक आह्वान जारी किया।
परिचय

विश्व स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय लिखा जा रहा है — और इस बार केंद्र में है भारत की IndiaAI Mission। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत संचालित यह मिशन अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ मिलकर वैश्विक स्वास्थ्य-प्रणालियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को नई दिशा दे रहा है।

अक्टूबर 2025 में जारी इस “Global Call for Scalable AI Health Use Cases” का उद्देश्य उन वास्तविक और दोहराए जा सकने वाले एआई मॉडलों को पहचानना है, जिन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, तेज़ और कुशल बनाया है — खासकर Global South यानी विकासशील देशों के लिए। इस पहल के तहत WHO Global Initiative on Digital Health (GIDH) और IndiaAI मिलकर एक ‘Casebook on AI Health Use Cases Across the Global South’ तैयार करेंगे, जिसे India-AI Impact Summit 2026 में प्रस्तुत किया जाएगा।

शोधकर्ता, नवाचारक और संस्थाएँ 31 अक्टूबर 2025 तक अपने सार प्रस्तुत कर सकते हैं, और चयनित प्रतिभागियों को पूर्ण अध्याय योगदान के लिए आमंत्रित किया जाएगा। यह पहल केवल एक तकनीकी सहयोग नहीं, बल्कि एक वैश्विक स्वास्थ्य-क्रांति की नींव है — जहाँ भारत एक नीति-निर्माता, नवप्रवर्तक और साझेदार के रूप में नेतृत्व कर रहा है।

यह साझेदारी यह संदेश देती है कि “AI for Health” केवल तकनीक नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक नया अवसर है — बेहतर उपचार, सटीक निदान और समान स्वास्थ्य-सुलभता की दिशा में।

पृष्ठभूमि और प्रसंग
वैश्विक स्वास्थ्य और एआई: क्यों यह ज़रूरी है?

आज स्वास्थ्य प्रणालियों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है — बढ़ती जीवन शैली-रोग (लाइफस्टाइल-डिजीज) जैसे कि डायबिटीज (मधुमेह), मोटापा (obesity), और इनके परिणामस्वरूप उभरते कॉमॉर्बिडिटीज (comorbidities) का बोझ विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देश-विहीन संसाधनों वाले वर्गों में बढ़ रहा है। इन रोगों के प्रभावी प्रबंधन, प्रारंभिक पहचान, रोग-समय की निगरानी (monitoring) और स्वास्थ्य-सेवाओं की पहुँच (access) सुनिश्चित करना आज के दौर में बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है।

उदाहरण के तौर पर, मोटापा (obesity) और मधुमेह (diabetes) दोनों ही स्वास्थ्य-प्रणाली पर गंभीर दबाव डालते हैं: मोटापे के कारण अनेक बार इंसुलिन-प्रतिरोध (insulin resistance) उत्पन्न होता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज़ का जोखिम बढ़ता है। इसके अतिरिक्त, मोटापे से हृदय-रोग, स्ट्रोक, कुछ प्रकार के कैंसर और अन्य जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

इन रोगों के समय पर सही निदान (diagnosis), निगरानी (monitoring), एवं उपचार (intervention) करने में स्वास्थ्य-प्रणालियों को अनेक बाधाएँ झेलनी पड़ रही हैं — जैसे कि पर्याप्त डॉक्टर-संख्या का अभाव, दूरदराज़-इलाकों में पहुँच की समस्या, महँगे डायग्नोस्टिक उपकरण, नागरिकों के स्वास्थ्य-साक्षरता (health-literacy) की कमी आदि।

इसी संदर्भ में, एआई (Artificial Intelligence) एक महत्व-पूरक उपकरण बनकर उभरी है — जो बड़े डेटासेट (large datasets) का विश्लेषण कर सकती है, पैटर्न पहचान सकती है, पूर्वानुमान (predictive analytics) कर सकती है, और स्वास्थ्य-प्रणालियों को ‘प्रोएक्टिव’ (proactive) और ‘प्रिडिक्टिव’ (predictive) मोड में ले जा सकती है।

उदाहरणस्वरूप, एआई-मॉडल रोग-प्रवृत्तियों (disease trends) का पूर्वानुमान कर सकते हैं, चिकित्सा छँटनी (triage) को प्राथमिक स्तर पर स्वचालित (automated) कर सकते हैं, डिजिटल हेल्थ रिकार्ड्स (EHRs) में छिपे डेटा से इनसाइट्स निकाल सकते हैं, और सीमित संसाधनों वाले स्वास्थ्य-संसाधानों में सेवाओं की पहुँच (access & equity) सुधार सकते हैं।

भारत का स्वास्थ्य-दृष्टिकोण और नीति पृष्ठभूमि

भारत में स्वास्थ्य-सेवाओं को डिजिटाइजेशन (digitisation) और डिजिटल स्वास्थ्य समाधान (digital health solutions) की ओर बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, डिजिटल स्वास्थ्य मिशन, और देश भर में इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकार्ड्स (EHRs) की ओर प्रयास इसी दिशा में हैं। इस वक़्त जब भारत ‘डिजिटल भारत’ के अंतर्गत अनेक कार्यक्रम चला रहा है, वहाँ स्वास्थ्य एआई का समावेश (integration) स्वास्थ्य-प्रणाली में एक महत्वपूर्ण छलांग साबित हो सकता है।

उसी विज़न को आगे बढ़ाते हुए, भारतीय सरकार ने NITI Aayog द्वारा प्रकाशित ‘राष्ट्रीय एआई रणनीति’ आदि दस्तावेजों में एआई-हेल्थ-समाधानों (AI-health solutions) को प्राथमिकता दी है। इस नए आह्वान द्वारा भारत यह संकेत दे रहा है कि वह न सिर्फ घरेलू स्वास्थ्य-नवोन्मेष (health-innovation) को बढ़ावा देगा बल्कि वैश्विक दृष्टिकोण (global perspective) से भी स्वास्थ्य-एआई (AI-for-health) के क्षेत्र में उदार भूमिका निभाना चाहता है।

‘वैश्विक दक्षिण’ (Global South) क्यों?

“Global South” से आशय उन विकसित या विकासशील देशों से है जो सामान्यतः संसाधन-संकुचित (resource-constrained) ढांचों में काम कर रहे हैं — चाहे वह एशिया, अफ्रीका या लैटिन अमेरिका हो। इन देशों के स्वास्थ्य-संकट (health crises) अक्सर पश्चिमी देशों से अलग चुनौती देते हैं: जनसंख्या घनत्व, पहुँच-विक्षेप (access inequality), बुनियादी स्वास्थ्य-इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी और डेटा-प्रबंधन सीमाएँ। इसलिए, ऐसे संदर्भों में सफल, स्केलेबल (scalable) और लागत-प्रभावी (cost-effective) एआई-उपयोग-मामले (AI use cases) बहुत मूल्यवान होते हैं।

इस आह्वान के माध्यम से भारत और WHO इस दिशा में अनुभव-साझा (knowledge-sharing) को प्रोत्साहित करना चाहते हैं, ताकि इन देशों में स्वास्थ्य-एआई समाधान तेजी से स्वीकार एवं विकसित हो सकें।

आह्वान की मुख्य बिंदु
कौन शामिल हो सकते हैं?

इस आह्वान में निम्नलिखित प्रकार के प्रतिभागियों को आमंत्रित किया गया है: शोधकर्ता (researchers), नवोन्मेषी (innovators), अस्पताल एवं स्वास्थ्य-प्रणाली संचालक (health systems / institutions) और अन्य हितधारक (stakeholders) जो वास्तविक दुनिया में एआई-हेल्थ प्रयोगों (AI-health deployments) के अनुभव रखते हों।


बहु-संख्या में यह उन संस्थाओं के लिए खुला है जिन्होंने मापनीय परिणाम (measurable impact), स्केलेबिलिटी (scalability), और प्रत्याशित पुनरुत्पादन (replicability) दिखाए हों।

क्या भेजना है (Submission Guidelines)
  • सार (Abstract) – अधिकतम 250 शब्द का संक्षिप्त प्रस्तुति जिसमें समस्या-स्थिति (problem statement), सेटिंग, समाधान के प्रयोग (use case), डेटा स्रोत, एआई मॉडल/योजना, मापनीय परिणाम, स्केलेबिलिटी और सामाजिक/नैतिक (ethical) पहलुओं का वर्णन हो।

  • पूरी रिपोर्ट (Chapter) – जिन एब्स्ट्रैक्ट्स का चयन होगा, उन्हें लगभग 2,500-3,000 शब्दों का पूर्ण अध्याय तैयार करना होगा जिसमें समाधान-रणनीति (deployment strategy), कार्यान्वयन (implementation), नैतिक एवं गवर्नेंस (governance) पहल, परिणाम-मापक (metrics), चुनौतियाँ (challenges), और सीख-बोख (lessons learned) शामिल होंगी।

समयसीमा (Timeline)
  • अभिज्ञापन की समयसीमा (Abstract Submission Deadline): 31 अक्टूबर 2025.

  • अध्याय/रिपोर्ट की समयसीमा (Chapter Submission Deadline): 15 दिसंबर 2025.

  • Casebook लॉन्च और समिट: यह Casebook फरवरी 2026 में नई दिल्ली में होने वाले India-AI Impact Summit 2026 में सार्वजनिक किया जाएगा।

उद्देश्य और अपेक्षित प्रभाव

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह है — दुनिया भर, विशेष रूप से विकासशील और संसाधन-सीमित देश-परिस्थितियों में स्वास्थ्य प्रणालियों में एआई-उपयोगों को पहचानना, उनका दस्तावेजीकरण करना, उनकी सफलता-कथाओं (success stories) को साझा करना और उन्हें बड़ी संख्या में अपनाने (scale up) योग्य बनाना।


इसके अतिरिक्त, यह प्रयास जिम्मेदार एआई (responsible AI) के सिद्धांतों को अक्षरशः स्वास्थ्य-सेवा क्षेत्र में उतारने का प्रयास है — अर्थात् डेटा-सुरक्षा, गोपनीयता (privacy), पूर्वाग्रह-रहित मॉडल (bias-free models), पारदर्शिता (transparency) और समावेशी (inclusive) दृष्टिकोण।

सवाल: “यह स्वास्थ्य-प्रणाली में कैसे बदलाव ला सकता है?”
वास्तविक प्रयोग-केसेस (Use Cases) का महत्व

जब स्वास्थ्य प्रणाली में एआई वास्तव में लागू की जाती है — उदाहरणस्वरूप निदान, रोग-प्रवृत्ति पैटर्न पहचान, रोग-नियंत्रण उपायों का पूर्वानुमान, चिकित्सा छँटनी या चिकित्सकीय सुझाव (clinical decision support) — तब यह केवल तकनीकी नवोन्मेष नहीं रह जाती, बल्कि पूरी प्रणाली का स्वरूप बदल सकती है।

उदाहरण के तौर पर, अगर एक अस्पताल-परिसर (hospital-ecosystem) में एआई-मॉडल समय-समय पर रोगी-डेटा को मॉनिटर करता है और जोखिम-ग्रस्त रोगियों की पहचान करता है, तो चिकित्सक पूर्व-चिंतनात्मक (pre-emptive) हस्तक्षेप कर सकते हैं। इससे रोग की जटिलताएं (complications) कम हो सकती हैं, अस्पताल में भर्ती (hospitalisation) की आवृत्ति गिर सकती है, और स्वास्थ्य-व्यय (healthcare costs) में कमी आ सकती है।

स्केलेबिलिटी की चुनौती

लेकिन सिर्फ प्रयोग करने से बात नहीं बनती — स्वास्थ्य-एआई समाधान को “स्केल” करना, अर्थात् बड़े स्तर पर लागू करना, लागत-प्रभावी बनाना, अनेक स्वास्थ्य-केंद्रों या विभिन्न भौगोलिक (geographic) और सामाजिक (social) सेटिंग्स में उतारना (deploy) आसान नहीं है। यह तभी संभव होगा जब समाधान सरल हो, स्थानीय संसाधनों के अनुरूप हो, डेटा-संग्रह और विश्लेषण सुगम हो, तथा स्वास्थ्य-कर्मी (health workers) उसे अपनाने के लिए सक्षम हों। इस आह्वान का उद्देश्य इन्हीं चुनौतियों को सामने लाना है और ऐसे उदाहरण खोजने का है जिन्हें अन्य देश-परिस्थितियों में दोहराया जा सके।

भारतीय स्वास्थ्य-मंच पर संभावनाएँ

भारत जैसे देश में, जहाँ स्वास्थ्य-सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता में असमानता (inequality) है, ग्रामीण-अर्बन बीच का अंतर (urban-rural divide) है, और संसाधनों की कमी अक्सर बाधा बन जाती है — वहाँ एआई-हेल्थ समाधान विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए, दूरदराज के इलाकों में चिकित्सकीय विशेषज्ञ की अनुपस्थिति में एआई-सहायता चिकित्सा टीमों को सशक्त बना सकती है। डेटा-आधारित पूर्वानुमान (predictive analytics) स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य-प्रबंधन (health management) को दस्तावेजित कर सकती है। और स्वास्थ्य-रिकार्ड्स को डिजिटल रूप से प्रबंधन करके नीति-निर्माताओं को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

जिम्मेदारी-और-नैतिकता (Ethics & Governance) का सवाल

जब स्वास्थ्य-सेवा में एआई शामिल हो रही है, तो डेटा-सुरक्षा (data security), गोपनीयता (privacy), पूर्वाग्रह-मुक्त एल्गोरिदम (bias-free algorithms), प्रभाव-मापन (impact measurement) और जवाबदेही (accountability) जैसे प्रश्न सामने आते हैं। इसीलिए इस आह्वान में इन पहलुओं को भी विचार में लेने का आग्रह किया गया है। उन एआई समाधान-मॉडलों को प्राथमिकता मिलेगी जिन्होंने इन जिम्मेदारियों को ध्यान में रखकर कार्य किया हो।

भारत में स्वास्थ्य-एआई (AI in Health) की चुनौतियाँ और अवसर
अवसर
  1. डिजिटलीकरण और डेटा-उपलब्धता – भारत में स्वास्थ्य-डेटा प्लेटफॉर्म, डिजिटल स्वास्थ्य पहल, ईएचआर (EHR) पहल, और मोबाइल हेल्थ (mHealth) सेवाओं में वृद्धि हो रही है। इस प्रवृत्ति से एआई-प्लेटफॉर्म्स को पर्याप्त इनपुट मिलने की संभावना है।

  2. मोटापा-और-डायबिटीज़ जैसे जीवनशैली-रोगों का बढ़ता बोझ – स्वास्थ्य-समस्या जैसे “diabetes treatment”, “obesity drug” आदि, नीति-निर्माताओं एवं चिकित्सकों के लिए बड़े प्रश्न बने हुए हैं। एआई-सहायता से समय-पर पहचान, निगरानी और हस्तक्षेप में सहूलियत हो सकती है।

  3. स्केल-अप क्षमता – बड़े जनसंख्या वाले देश में यदि सफल मॉडल विकसित हो जाएँ, तो उन्हें व्यापक रूप से अपनाया जा सकता है एवं अन्य देशों के लिए आदर्श बन सकते हैं।

चुनौतियाँ
  1. डेटा-गुणवत्ता (Data Quality) और समरूपता (Heterogeneity) – अनेक स्वास्थ्य-केंद्रों में डेटा संग्रह मानकीकृत नहीं है, डिजिटल रिकॉर्डिंग कम है, और स्थानीय सेटिंग्स में डेटा-गैप्स हैं।

  2. इन्फ्रास्ट्रक्चर और संसाधन – एआई-प्रयोग के लिए आवश्यक तकनीकी प्लेटफॉर्म, नेटवर्किंग, हार्डवेयर, प्रशिक्षित मानव संसाधन नहीं हमेशा उपलब्ध हैं।

  3. स्वीकार्यता (Acceptance) और स्किल्ड वर्कफोर्स – चिकित्सकीय और स्वास्थ्य-कर्मियों को नए उपकरणों पर विश्वास और प्रशिक्षण देना एक चुनौती है।

  4. नियम-और-नीति-चिन्ताएँ (Regulation & Policy) – स्वास्थ्य-एआई के लिए नैतिक, कानूनी और नियामक (regulatory) रूपरेखा अभी विकसित हो रही है; जोखिम-मूल्यांकन, मरीज-सुरक्षा, जवाबदेही आदि पर विचार आवश्यक है।

आगे की राह: नीति-निर्माण, निवेश और नवोन्मेष
नीति-निर्माण (Policy & Governance)

इस आह्वान द्वारा नीति-निर्माताओं (policymakers) को प्रेरणा मिलेगी कि वे स्वास्थ्य-एआई को नीति-सहायक (policy-enabler) के रूप में देखें। उदाहरणस्वरूप, यदि सफल एआई-प्रयोग मॉडल दस्तावेजीकृत हो जाएँ, तो अन्य राज्यों या देशों में उन्हें अपनाना आसान होगा। इसके लिए निम्नलिखित कदम आवश्यक हैं:

  • नैतिक और गोपनीयता-सुरक्षा (ethical & privacy-safe) फ्रेमवर्क का निर्माण

  • स्वास्थ्य-एआई उपकरणों के लिए गुणवत्ता-मान (quality standards) तथा जवाबदेही (accountability) चेक-पॉइंट्स का निर्धारण

  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (public-private partnerships) को प्रोत्साहन देना जहाँ तकनीकी नवोन्मेषक, स्वास्थ्य-संस्थाएँ, और सरकारी नीति-प्राधिकरण मिलकर काम करें

  • डेटा-साझेदारी (data sharing) और इन्फ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) को मजबूत करना

निवेश और नवोन्मेष (Investment & Innovation)

स्वास्थ्य-एआई को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए निवेश आवश्यक है — न सिर्फ हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर में बल्कि मानव संसाधन, प्रशिक्षण, निरंतर निगरानी (monitoring & evaluation) और स्केल-अप में। इसके अलावा, नवोन्मेष (innovation) को प्रोत्साहित करना भी महत्वपूर्ण है, ताकि समाधान स्थानीय स्तर की चुनौतियों (local-context challenges) को ध्यान में रखते हुए हों।

स्वास्थ्य-उपयोग-मामले (Health Use Cases) के चयन-मानदंड

इस आह्वान में यह अपेक्षा की गई है कि प्रस्तुत किए गए उपयोग-मामले (use cases) निम्नलिखित मापदंडों से गुजरें:

  • प्रभाव-मापन (Impact Measurement) — उदाहरण के लिए, रोगी-परिणाम (patient-outcomes), अस्पताल में भर्ती-दर (hospitalisation rates), लागत-घटाव (cost reduction) आदि।

  • स्केलेबिलिटी (Scalability) — प्रयोग केवल एक केंद्र/हस्पताल में न रहकर अन्य केंद्रों में भी लागू हो सके।

  • डेटा-सोर्स और एआई-मॉडल की पारदर्शिता (Transparency) — मॉडल का विवरण, डेटा-स्रोत, स्वास्थ्य-प्रणाली में उसकी समायोजन (integration) स्पष्ट हो।

  • नैतिक और सामाजिक-समावेशी (Ethical & Inclusive) पहल — चाहे वह भाषा-भेद (language barrier), ग्रामीण-शहरी भेद, लिंग-भेद आदि हों।

भारत-विशेष संदर्भ: स्वास्थ्य-एआई से क्या बदल सकता है?
मधुमेह (Diabetes)- और मोटापा (Obesity)-सम्बंधित चुनौतियाँ

भारत में मधुमेह (diabetes) और मोटापा (obesity) तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य-चुनौतियाँ बन चुके हैं। उदाहरण के लिए, मोटापे के कारण इंसुलिन-प्रतिरोध बढ़ता है जिससे टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा उत्पन्न होता है। उपचार (treatment) में समस्या यह है कि जोखिम-ग्रस्त लोगों की पहचान देर से होती है, नियमित निगरानी अनुपलब्ध होती है और मरीज-प्रेरणा (patient engagement) कम होती है। इसी तरह, “diabetes treatment” में मरीजों को जीवनशैली-परिवर्तन (lifestyle modification), नियमित परीक्षण, समय-पर दवा-लेना एवं चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है, लेकिन संसाधन-अभाव और स्वास्थ्य-साक्षरता की कमी समस्या बन जाती है।

इसी स्थिति में “obesity drug”, “weight loss injection” जैसे उपचार विकल्प उभरते हैं, लेकिन वे मात्र दवा-निर्भर समाधान नहीं हैं — जीवनशैली-परिवर्तन, रुचि-प्रेरणा, सामाजिक-समर्थन (social support) आदि भी महत्वपूर्ण हैं। इस परिप्रेक्ष्य में, एआई-सहायता द्वारा निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं:

  • प्रारंभिक पहचान (early identification) — एआई-मॉडल विविध डेटा-स्रोत (जैसे मोबाइल-स्वास्थ्य, फिटनेस-बैंड्स, इलेक्ट्रॉनिक-रोग-रिकॉर्ड) से जोखिम-ग्रस्त व्यक्तियों की पहचान कर सकते हैं।

  • नियमित निगरानी (continuous monitoring) — एआई-सिस्टम रियल-टाइम डेटा (blood glucose levels, BMI, गतिविधि-डेटा) को मॉनिटर कर सकते हैं एवं चिकित्सक/मरीज को समय-समय पर संकेत (alerts) भेज सकते हैं।

  • रोग-प्रबंधन सुझाव (decision-support) — चिकित्सक या मरीज को जीवनशैली-प्रस्ताव, दवा-समायोजन (medication adjustment) आदि में एआई-सहायता मिल सकती है।

  • व्यय-घटाव (cost reduction) — अस्पताल में भर्ती या जटिलताओं में कमी आने से स्वास्थ्य-व्यय कम हो सकता है।

स्वास्थ्य-एआई का भारत में विशेष अवसर

भारत में एआई-सहायता स्वास्थ्य-प्रणाली के कई मोर्चों पर काम कर सकती है:

  • गाँव-कस्बों में चिकित्सकीय विशेषज्ञता की कमी को दूर करना — उदाहरण के लिए, टेली-मेडिसिन + एआई-सहायता मॉडल

  • बड़े जनसंख्या-डाटा (big population data) का विश्लेषण कर स्वास्थ्य-नीति-निर्माण (health policy) को सुदृढ़ करना

  • इलाज-निर्धारण (treatment pathway) में सुधार लाना — विशेष रूप से जीवनशैली-रोगों (lifestyle diseases) में अंतर देखना

  • स्वास्थ्य-शिक्षा (health education) और रोग-प्रेरणा (patient motivation) में डिजिटल उपकरणों का प्रयोग

संभावित प्रभाव और चुनौतियाँ: यदि सफल हुआ तो क्या बदल सकता है?
सकारात्मक प्रभाव
  • स्वास्थ्य-सेवाओं की पहुँच (accessibility) और गुणवत्ता (quality) बेहतर हो सकती है, विशेषकर ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों में।

  • रोग-पहचान (diagnosis) और चिकित्सकीय निर्णय-प्रक्रिया (clinical decision-making) में तेजी और सटीकता आ सकती है।

  • जीवनशैली-रोगों (जैसे diabetes, obesity) के प्रबंधन में सुधार हो सकता है — जिससे चिकित्सकीय जटिलताओं (complications), अस्पताल-भर्ती (hospitalisation), एवं स्वास्थ्य-व्यय (health-expenditure) में कमी संभव है।

  • नीति-निर्माताओं और स्वास्थ्य-प्रणाली संचालकों (health system operators) के पास वास्तविक-दुनिया (real-world) की सफल एआई-उपयोग-कहानियाँ (use-case stories) आ सकती हैं, जिससे वे बेहतर निर्णय ले सकें।

  • भारत वैश्विक स्वास्थ्य-एआई-नवोन्मेष (global health AI innovation) में अग्रणी भूमिका निभा सकता है, और अन्य विकासशील देशों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है।

चुनौतियाँ एवं जोखिम-मूलक बिंदु
  • यदि एआई मॉडल स्थानीय संदर्भ (local context) से मेल नहीं खाते, तो उनका प्रभाव सीमित होगा।

  • डेटा-सुरक्षा एवं गोपनीयता (data privacy) की चूक स्वास्थ्य-विश्वास (trust) को प्रभावित कर सकती है।

  • तकनीकी उपकरण तो विकसित हो सकते हैं, लेकिन उनका स्वास्थ्य-कर्मी और रोगी के बीच स्वीकार (acceptance) होना जरूरी है।

  • अगर स्केल-अप योजना नहीं बनी हो, तो सफल पायलट (pilot) भी विफल हो सकती है।

  • नीति-निर्माण, वित्त-प्रबंधन (funding), और दीर्घ-कालीन निगरानी (long-term monitoring) की कमी बड़ी बाधा बन सकती है।

निष्कर्ष: भारत के लिए आगे की योजना और आशाएँ

इस वैश्विक आह्वान के माध्यम से, भारत ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वह स्वास्थ्य-एआई (AI in health) को सिर्फ एक तकनीकी विकल्प नहीं बल्कि एक रणनीतिक स्वास्थ्य-उपाय (strategic health intervention) के रूप में देख रहा है। जिस तरह यह पहल “Global South” के संदर्भ में सफल मॉडल्स को खोजने, दस्तावेजीकरण करने और उन्हें साझा करने का प्रयास है, उसी तरह भारत में भी यह संभावना है कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य-एआई समाधान बड़े स्तर पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित (implement) हों

विशेष रूप से, भारत-विस्तारित स्वास्थ्य-प्रणाली में यदि यह मॉडल सफल हुआ — जैसे कि जीवनशैली-रोगों (lifestyle diseases) का बेहतर नियंत्रण, अस्पताल में भर्ती-दर में कमी, ग्रामीण इलाकों में बेहतर पहुँच और डिजिटल स्वास्थ्य-साक्षरता में वृद्धि — तो इससे न सिर्फ रोगियों को लाभ होगा बल्कि स्वास्थ्य-व्यवस्था (healthcare system) पर पड़ने वाला बोझ भी कम होगा।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि:

“स्वास्थ्य-एआई के सफल उपयोग-मामले (use cases) तभी प्रभावी होंगे जब उन्हें स्थानीय संदर्भ, स्वास्थ्य-कर्मियों की क्षमताएँ, और रोगी-समूह की विशेषताओं के अनुरूप तैयार किया जाए।”

भारत में चिकित्सकीय संस्थाएँ, सरकार-एजेंसियाँ, नवोन्मेषक (innovators) और शोधकर्ता (researchers) मिलकर इस दिशा में सहयोग करें — ताकि यह पहल “कागज़ों पर न रह जाए” बल्कि स्वास्थ्य-प्रणाली में वास्तविक बदलाव ला सके।

आगे देखते हुए, यदि भारत ने इस आह्वान के माध्यम से सलेक्ट किए गए उपयोग-मामलों को समय-पर आगे बढ़ाया, उनका निगरानी-तंत्र (monitoring framework) विकसित किया, उन्हें देश की विभिन्न स्वास्थ्य-सेटिंग्स में उतारा और उनकी सफलता-कहानियाँ साझा कीं, तो यह सिर्फ भारत के लिए एक स्वास्थ्य-विजय (health victory) नहीं बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य-समाज (global health community) के लिए प्रेरणादायी कदम होगा।

सरल शब्दों में कहें तो — यह आह्वान एक स्वास्थ्य-एआई क्रांति की शुरुआत है, जहाँ तकनीक, नीति, नवोन्मेष और सामाजिक-समावेशन (social inclusion) एक साथ मिलकर स्वास्थ्य-सेवा को अगले स्तर पर ले जाने का अवसर प्रस्तुत कर रहे हैं।

संदर्भ
  1. “IndiaAI, WHO announce global call for abstracts on scalable AI solutions in healthcare.” The Economic Times (ET Government). प्रकाशित 19 अक्टूबर 2025.

  2. “MEIT and WHO Launch Global Call for AI in Health Abstracts.” News On AIR. प्रकाशित (दिनांक उपलब्ध) 2025.

  3. “India and WHO Partner to Scale AI Health Solutions Across the Global South.” Policy Edge. प्रकाशित 18 अक्टूबर 2025.

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

Subscribe to our newsletter

Get the latest Health news in your box.

Recent Posts

Stay Connected Follow Us

Related Stories

More Stories

Trending Tips