छत्तीसगढ़ में मेडिकल क्रांति: NMC की बड़ी सौगात, 61 नई MD/MS सीटों की मंजूरी से बढ़ेगी विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या
छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव आया है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 61 नई MD/MS सीटों को मंजूरी दी है, जिससे अब कुल संख्या 377 हो गई है। यह फैसला ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी को दूर करने में मदद करेगा। सरकार का लक्ष्य अगले तीन साल में 500 से अधिक पोस्टग्रेजुएट सीटें शुरू करने का है।
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छत्तीसगढ़ में मेडिकल क्रांति: NMC ने 61 नई MD/MS सीटें दीं मंजूर, अब राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी होगी खत्म”
परिचय:
छत्तीसगढ़ के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में हाल ही में एक ऐसा निर्णय सामने आया है जिसने पूरे स्वास्थ्य जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। नेशनल मेडिकल कमीशन (National Medical Commission - NMC) ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 61 नई एमडी/एमएस (MD/MS) सीटों को मंजूरी दी है, जिससे अब कुल सीटों की संख्या 316 से बढ़कर 377 हो गई है। यह कदम न केवल राज्य में उच्च चिकित्सा शिक्षा (medical education expansion) की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने की दिशा में भी इसे एक निर्णायक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
यह मंजूरी अक्टूबर 2025 के मध्य में जारी अधिसूचना के बाद आई, जब NMC की निरीक्षण टीमों ने राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों की इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी की उपलब्धता, अस्पताल सेवाओं की गुणवत्ता, और शोध कार्यों का गहन मूल्यांकन किया। इन रिपोर्टों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि अब छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा के स्तर को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विस्तार दिया जा सकता है।
कब और क्यों:
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न राज्यों में चिकित्सा संसाधनों की भारी कमी महसूस की जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार, भारत में प्रति हजार जनसंख्या पर कम से कम एक डॉक्टर की आवश्यकता है, जबकि कई राज्यों में यह अनुपात अभी भी 0.6 के आसपास है। छत्तीसगढ़ जैसे उभरते राज्यों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण थी। ऐसे में, इन नई सीटों की स्वीकृति से न केवल राज्य में चिकित्सा शिक्षा को नई गति मिलेगी, बल्कि विशेषज्ञ चिकित्सकों (specialist doctors) की कमी को भी दूर किया जा सकेगा।
पृष्ठभूमि: छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा की स्थिति और चुनौतियाँ
छत्तीसगढ़, जिसे 2000 में मध्यप्रदेश से अलग कर एक स्वतंत्र राज्य के रूप में गठित किया गया, शुरुआत में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य संसाधनों के मामले में काफी पीछे था। राज्य में 2005 तक केवल एक ही प्रमुख मेडिकल कॉलेज—पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (रायपुर)—सक्रिय था। इसके बाद धीरे-धीरे बिलासपुर, जगदलपुर, कोरबा, राजनांदगांव और रायगढ़ जैसे जिलों में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए।
लेकिन चुनौती यह थी कि डॉक्टर बनने के बाद बड़ी संख्या में युवा चिकित्सक पोस्ट-ग्रेजुएट शिक्षा (MD/MS) के लिए राज्य से बाहर चले जाते थे। इससे न केवल प्रतिभा पलायन (brain drain) होता था, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञों की उपलब्धता भी घट जाती थी।
2024 तक राज्य में केवल 316 एमडी/एमएस सीटें थीं, जो सीमित विषयों तक सिमटी थीं — जैसे जनरल मेडिसिन, एनाटॉमी, पैथोलॉजी, और गायनेकोलॉजी। लेकिन अब 61 नई सीटों की स्वीकृति के साथ कई महत्वपूर्ण विषयों जैसे कार्डियोलॉजी, रेडियोलॉजी, डर्मेटोलॉजी, एनेस्थीसिया, और पीडियाट्रिक्स में भी सीटें बढ़ाई गई हैं।
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया —
“यह निर्णय हमारे मेडिकल छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है। अब उन्हें पोस्टग्रेजुएट शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही, यह राज्य के अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं को भी बढ़ाएगा।”
NMC का निर्णय कैसे हुआ — मूल्यांकन प्रक्रिया और मानक
NMC की यह मंजूरी एक विस्तृत मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद दी गई। निरीक्षण टीमों ने प्रत्येक कॉलेज की निम्नलिखित बातों की जांच की —
शैक्षणिक ढांचा: क्या प्रत्येक विभाग में प्रशिक्षित और योग्य शिक्षकों की पर्याप्त संख्या मौजूद है।
अस्पताल सेवाएं: क्या मरीजों की संख्या, ओपीडी और आईपीडी की क्षमता पोस्टग्रेजुएट प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त है।
प्रयोगशाला और अनुसंधान सुविधाएं: क्या लैब और उपकरण विश्वसनीय हैं और रिसर्च को प्रोत्साहन मिल रहा है।
शिक्षा का डिजिटल रूपांतरण: क्या कॉलेजों ने डिजिटल क्लासरूम, वर्चुअल डिसेक्शन टेबल और AI आधारित मेडिकल सिमुलेशन को अपनाया है।
इन सभी मानदंडों को पूरा करने के बाद NMC ने राज्य सरकार को मंजूरी दी। सबसे बड़ी वृद्धि बिलासपुर (21 नई सीटें) और कोरबा (13 नई सीटें) में दर्ज की गई है।
राज्य सरकार की प्रतिक्रिया: “यह हमारे लिए मेडिकल क्रांति की शुरुआत है”
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री ने इस फैसले पर कहा —
“हमारी सरकार लगातार प्रयास कर रही थी कि राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर किया जाए। अब यह संभव होगा कि हर जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद रहें। ये नई सीटें सिर्फ शिक्षा नहीं, बल्कि चिकित्सा सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में भी एक क्रांतिकारी बदलाव हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले तीन वर्षों में सरकार का लक्ष्य 500 से अधिक पोस्टग्रेजुएट सीटों तक पहुँचने का है। साथ ही, मेडिकल कॉलेजों को “टीचिंग हॉस्पिटल्स” के साथ “रिसर्च हब” के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि राज्य के भीतर ही नैदानिक अनुसंधान (clinical research) को बढ़ावा मिल सके।
यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में अभी भी डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात असमान है। दिल्ली, महाराष्ट्र, और तमिलनाडु जैसे राज्यों में जहाँ यह अनुपात 1:700 के करीब है, वहीं छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में यह 1:2500 से भी अधिक है। ग्रामीण अंचलों में यह अंतर और गहरा है।
नई सीटों की स्वीकृति से निम्नलिखित लाभ अपेक्षित हैं —
विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी:
कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, और एनेस्थेटिस्ट जैसे विशेषज्ञ अब राज्य के भीतर प्रशिक्षित होंगे।ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार:
मेडिकल छात्रों को ग्रामीण सेवा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे गांवों में भी उच्च गुणवत्ता की सेवाएं पहुँचेगी।मेडिकल रिसर्च को प्रोत्साहन:
नई सीटों के साथ रिसर्च प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ेगी। यह राज्य की मेडिकल यूनिवर्सिटी को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार:
नई सीटों के लिए कॉलेजों को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रयोगशालाओं और हॉस्टलों का विस्तार करना होगा, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
स्वास्थ्य नीति के दृष्टिकोण से क्या होगा प्रभाव?
नई MD/MS सीटों की मंजूरी सिर्फ शिक्षा का विस्तार नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य नीति के दृष्टिकोण से भी एक बड़ा संकेत है कि राज्य अब चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर है।
2023 में हुई “राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति समीक्षा बैठक” में यह पाया गया था कि राज्य में प्रत्येक 10 लाख जनसंख्या पर केवल 64 विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं, जबकि WHO मानक 100 से ऊपर का है। इन नई सीटों से यह अंतर कम करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि वह “Public-Private Collaboration Model” पर भी काम करेगी, जिसमें निजी मेडिकल कॉलेजों के साथ साझेदारी के जरिए सुपर-स्पेशलिटी ट्रेनिंग को भी बढ़ाया जाएगा।
भविष्य की दिशा — शोध, डिजिटल शिक्षा और वैश्विक सहयोग
छत्तीसगढ़ सरकार अब अगले चरण में मेडिकल शिक्षा को डिजिटल और रिसर्च-आधारित मॉडल पर ले जाने की योजना बना रही है।
AI-संचालित शिक्षा मॉडल:
मेडिकल छात्रों के लिए “AI-driven diagnosis training” मॉड्यूल लागू किए जा रहे हैं ताकि छात्र क्लिनिकल निर्णय लेने में दक्ष बन सकें।रिसर्च-इंसेटिव स्कीम:
जो छात्र शोध परियोजनाओं में भाग लेंगे, उन्हें विशेष ग्रांट और फेलोशिप दी जाएगी।अंतरराष्ट्रीय सहयोग:
सरकार “World Health Organization (WHO)” और “Johns Hopkins University” जैसे संस्थानों के साथ सहयोग करने की दिशा में कदम उठा रही है ताकि रिसर्च एक्सचेंज प्रोग्राम को मजबूत किया जा सके।
निष्कर्ष (Conclusion): एक नई चिकित्सा क्रांति की शुरुआत
छत्तीसगढ़ में 61 नई MD/MS सीटों की मंजूरी सिर्फ एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह एक स्वास्थ्य सुधार क्रांति की शुरुआत है। आने वाले वर्षों में जब इन सीटों से निकले विशेषज्ञ डॉक्टर राज्य के विभिन्न जिलों और ग्रामीण अंचलों में सेवा देंगे, तो न केवल चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि आम जनता का विश्वास भी चिकित्सा संस्थानों में गहरा होगा।
यह पहल राज्य को “स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता” (Health Self-Reliance) की दिशा में ले जाने वाली ठोस नींव बन सकती है।
संदर्भ (References):
National Medical Commission (NMC) — Notification on PG Medical Seat Approval, October 2025
Times of India (Raipur Edition) — Approval of 61 new MD/MS seats in Chhattisgarh, 19 October 2025
Interview: Dr. Archana Singh, Prof. of Medicine, Pt. JLN Medical College, Raipur
State Health Department Report 2025 – Postgraduate Medical Expansion
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।
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