भारत के हेल्थ-केयर सेक्टर में निवेश की लहर: Q3 2025 में $3.5 बिलियन की डील्स दर्ज

2025 की तीसरी तिमाही में, भारत के फार्मा और स्वास्थ्य सेवा उद्योगों में 72 प्रमुख सौदों के ज़रिए 3.5 अरब डॉलर के निवेश की लहर देखी गई। यह पिछली तिमाही की तुलना में सौदों के मूल्य में 166% की वृद्धि दर्शाता है - जो भारत की बढ़ती स्वास्थ्य अर्थव्यवस्था में निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। अस्पताल नेटवर्क और मोटापे की दवाओं से लेकर मधुमेह के इलाज और डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफ़ॉर्म तक, यह क्षेत्र एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गति नवाचार, विनिर्माण और स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच में भारत के बढ़ते नेतृत्व को दर्शाती है, जिससे देश भर में मज़बूत चिकित्सा और स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

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ASHISH PRADHAN

10/29/20251 min read

भारत के फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में Q3 2025 में हुए $3.5 बिलियन निवेश को दर्शाता थंबनेल
भारत के फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में Q3 2025 में हुए $3.5 बिलियन निवेश को दर्शाता थंबनेल

भारत में अब बेहतर दवाएँ और हेल्थ-सेवाएं: Q3 2025 में $3.5 बिलियन निवेश दर्ज

परिचय

तृतीय तिमाही यानी जुलाई से सितंबर 2025 के दौरान भारत के फार्मा और स्वास्थ्य-सेवा (हेल्थकेयर) उद्योग में लगभग 72 सौदे हुए, जिनकी कुल कीमत लगभग यूएस $ 3.5 बिलियन रही। इस अवधि में निजी स्तर पर (मर्जर-अधिग्रहण, निजी इक्विटी निवेश) करीब $3 बिलियन का निवेश हुआ, क्योंकि सार्वजनिक बाजार गतिविधियों को निकालकर देखा गया तो 68 सौदों ने यह राशि जुटाई। इस आंकड़े ने संकेत दिया है कि इस क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा फिर बढ़ रहा है और फार्मा-वित्त तथा स्वास्थ्य-सेवा मॉडल में तेजी आ रही है।

यह परिणाम इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले तिमाही की तुलना में सौदों की संख्या में करीब 28 % की बढ़ोतरी और सौदे-मूल्यों में लगभग 166 % की उछाल देखी गई है।

इस लेख में हम सरल भाषा में यह समझने का प्रयास करेंगे कि यह वृद्धि क्यों हुई, इसके पीछे कौन-कौन से कारक काम कर रहे हैं, भारत में स्वास्थ्य-चुनौतियाँ क्या हैं, और इस सबका आम नागरिक या मरीज पर क्या असर होगा।

पृष्ठभूमि: क्यों ध्यान दे रहे हैं फार्मा-हेल्थ सेक्टर को?

भारत में स्वास्थ्य-चुनौतियाँ

भारत में नॉन-संक्रामक रोगों (Non-communicable Diseases – NCDs) का बोझ लगातार बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, मधुमेह (diabetes) और मोटापा (obesity) तेजी से बढ़ते जोखिम-कारक बन गए हैं। ऐसे रोगों के कारण जीवनशैली परिवर्तन, अधिक मात्रा में ऊर्जा-युक्त भोजन, कम शारीरिक सक्रियता आदि शामिल हैं।

जब ये रोग बढ़ते हैं, तब उन्हें नियंत्रित करने के लिए “diabetes treatment” की मांग बढ़ती है, साथ ही “obesity drug” और “weight loss injection” जैसे विकल्पों की भूख भी पैदा होती है। इससे फार्मा कंपनियों और हेल्थ-सेवा प्रदाताओं के लिए अवसर बढ़ते हैं।

फार्मा-हेल्थ सेक्टर का बदलाव

परंपरागत तौर पर भारत में फार्मा कंपनियाँ ज्यादातर जेनेरिक दवाओं (generic drugs) और एपीआई (Active Pharmaceutical Ingredients) पर केंद्रित थीं। लेकिन अब बदलाव हो रहा है:

  • दवाओं का फोकस सरल प्रतियों (copies) से ज्यादा अनुसंधान-आधारित (research-led) फार्मुलेशनों और सीडीएमओ (Contract Drug Manufacturing Organisation) मॉडल की ओर बढ़ रहा है।

  • अस्पताल नेटवर्क, विशेष देखभाल (specialty-care)-सेवाएँ, हेल्थ-टेक एवं डिजिटल-हेल्थ प्लेटफार्म का प्रचलन बढ़ रहा है।

  • वैश्विक निवेशकों की नजर भारत की स्वास्थ्य-उद्योग क्षमता, अनुसंधान-क्षमता और विनिर्माण (manufacturing) क्षमताओं पर पड़ी है।

इस बदलाव के माहौल में जब सौदे हो रहे हैं, तो उनका अर्थ सिर्फ पैसा नहीं है — यह संकेत है कि भारत में स्वास्थ्य-सेवा मॉडल और दवा-उद्योग दोनों में ‘मजबूती’ और ‘विकास-संभावना’ देखी जा रही है।

क्या हुआ और कैसे हुआ?

लेन-देन की बड़ी तस्वीर
  • तिमाही Q3 2025 में कुल 72 सौदे दर्ज हुए, जिनकी कुल राशि लगभग $3.5 बिलियन रही।

  • निजी सौदों (Private deals) की संख्या 68 रही और इनकी कुल राशि लगभग $3 बिलियन रही।

  • मर्जर-अधिग्रहण (M&A) में विशेष तेजी आई: इस तिमाही में 36 सौदों की कुल राशि लगभग $2.5 बिलियन और यह पिछले तिमाही की तुलना में करीब 57 % बढ़ गया।

  • सबसे बड़ी एक सौदा थी: Torrent Pharma द्वारा JB Chemicals & Pharmaceuticals में 46 % हिस्सेदारी का अधिग्रहण, जिसकी रकम लगभग $1.4 बिलियन रही।

किन-किन क्षेत्रों में ज़्यादा निवेश हुआ?
  • फार्मा और बायोटेक्नोलॉजी (pharma & biotech) सेक्टर ने सौदों की संख्या में 29 % हिस्सेदारी ली।

  • निवेश अब मुख्य रूप से उस ओर जा रहा है जहाँ फॉर्मुलेशन, सीडीएमओ, अनुसंधान-आधारित प्लेटफार्म हैं, न कि सिर्फ कच्चे पदार्थ (API) तक सीमित।

  • अस्पताल-नेटवर्क (hospital-networks), विशेष देखभाल (single-specialty formats) जैसे डायलिसिस, ऑन्कोलॉजी, महिला-और-बाल स्वास्थ्य, हेल्थ-टेक व वेलनेस प्लेटफार्म में निवेश बढ़ा है।

क्यों बढ़ा निवेश और सौदेबाजी?

कुछ प्रमुख कारण निम्न-लिखित हैं:

  • भारतीय स्वास्थ्य-इकॉनमी में लंबे-समय के विकास-संकेत दिख रहे हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। उदाहरण के लिए, ऊपर का आंकड़ा कि सौदों में इतनी तेजी आई है, यही भरोसे का संकेत है।

  • कंपनियाँ प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए नवाचार (innovation), क्षमता-विस्तार (scale) और समेकन (consolidation) की ओर बढ़ रही हैं।

  • वैश्विक आपूर्ति-शृंखलाओं (supply chains) में बदलाव और भारत की विनिर्माण-क्षमता (manufacturing capability) में सुधार ने भारत को आकर्षक बनाया है।

  • स्वास्थ्य-सेवा मॉडल में बदलाव: अब सिर्फ दवाई देना नहीं, बल्कि रोग-प्रबंधन (disease management), डिजिटल-हेल्थ, मरीज-केन्द्रित (patient-centric) मॉडल की ओर रुझान बढ़ा है।

क्या इसका आम आदमी या मरीज से संबंध है?

स्वास्थ्य-सेवा के विकल्प बढ़ेंगे

जब कंपनियाँ और अस्पताल नेटवर्क निवेश बढ़ा रहे हैं, तो यह आम मरीज पर असर दिखने लगता है: बेहतर-उपचार विकल्प, अधिक अस्पताल-विस्तार, बेहतर दवा-उपलब्धता और आकर्षक हेल्थ-टेक समाधान। उदाहरण के लिए, “diabetes treatment” विकल्पों में सुधार हो सकता है, “obesity drug” और “weight loss injection” जैसी आधुनिक दवाओं का भारत में होना आसान हो सकता है।

चीन या अन्य देशों में हो रहा विकल्पों का विस्तार

दुनिया भर में मोटापा और मधुमेह जैसे रोगों की संख्या बढ़ रही है। भारत में भी यह समस्या बड़ी है। इसलिए इन तरह की दवाओं तथा सेवाओं की मांग बढ़ रही है। इससे फार्मा-सेक्टर में निवेश बढ़ाना समझ आता है।

चुनौतियाँ भी हैं

हालाँकि यह सब सकारात्मक है, लेकिन कुछ बातें ध्यान देने योग्य हैं:

  • बेहतर-उपचार विकल्प समय-सापेक्ष आने चाहिए ताकि आम व्यक्ति उन्हें सही-समय पर उपयोग कर सके।

  • खर्च और पहुँच का मसला: आधुनिक दवाएँ और सेवाएँ महँगी हो सकती हैं। यदि ग्रामीण-अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक पहुँच न बनी, तो लाभ सीमित रहेगा।

  • अस्पताल-और-दवा-उपकरण-मॉडल में निवेश हुआ है पर इसका लाभ तभी दिखेगा जब गुणवत्ता, नियमितता और सही व्यवस्था बनी हो।

  • रोग-उपचार मॉडल (treatment model) बदलने में समय लगता है—मोटापा और मधुमेह जैसे रोगों में सिर्फ दवा नहीं, जीवनशैली-बदलाव और नियमित देखभाल भी जरूरी है।

भारत में आगे की राह

क्या योजना है?

इस सौदेबाजी और निवेश-रुझान का मतलब यह है कि आने वाले समय में:

  • भारत में नया-नया दवा-मॉडल आएंगे, जिनमें “diabetes treatment” में आधुनिक विकल्प, “obesity drug” तथा “weight loss injection” जैसे समाधान मौजूद हो सकते हैं।

  • अस्पताल-नेटवर्क का विस्तार होगा, विशेष-देखभाल (डायलिसिस, कैंसर, महिला-और-बाल स्वास्थ्य) की सुविधा बेहतर होगी।

  • हेल्थ-टेक और डिजिटल-हेल्थ प्लेटफार्म का विकास होगा, जिससे मोबाइल-एप, ऑनलाइन कंसल्टेशन, स्वास्थ्य-मॉनिटरिंग आदि साधारण हो सकते हैं।

  • भारत वैश्विक निवेशकों के लिए स्वास्थ्य-सेवा और फार्मा का हब बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

Bhanu Prakash Kalmath S J (Partner & Healthcare Industry Leader, Grant Thornton Bharat) ने कहा है:

“Q3 ने मर्जर-अधिग्रहण गतिविधि में पुनरुत्थान दिखाया है, जिसमें स्केल, क्षमता और नवोन्मेष-उन्मुख निवेश शामिल थे। भारत की लाइफ-साइंसेज क्षमता में बढ़ती विश्वास को यह संकेत दे रहा है।”


इससे यह स्पष्ट है कि उद्योग के विशेषज्ञ इस बढ़ोतरी को केवल एक आकड़ों की वृद्धि नहीं बल्कि दिशा-परिवर्तन के रूप में देख रहे हैं।

आम व्यक्ति के लिए सुझाव
  • यदि आपकी या आपके परिवार में मधुमेह या मोटापा जैसी समस्या है, तो उपचार-विकल्पों पर सतर्क रहिये—नए दवाओं और सेवाओं के आने का अवसर बढ़ रहा है।

  • साथ ही, सिर्फ दवा-उपचार पर भरोसा न करें—जीवनशैली-बदलाव, नियमित स्वास्थ्य-जांच और सही खान-पान भी बेहद महत्वपूर्ण है।

  • अस्पताल, क्लीनिक और स्वास्थ्य-सेवा प्रदाताओं की पहुँच-विस्तार पर ध्यान दें—यहाँ निवेश बढ़ रहा है, यानी बेहतर सुविधा मिलने की संभावना है।

  • निवेश-रुझान से यह संकेत मिलता है कि स्वास्थ्य-उपचार की दिशा में देश में बदलाव आ रहा है—इसका लाभ उठाना आपके लिए सही रहेगा।

निष्कर्ष

भारत के फार्मा-और-हेल्थ-सेवा उद्योग ने Q3 2025 में $3.5 बिलियन से अधिक के सौदे दर्ज कर संकेत दिया है कि यह सेक्टर अब सिर्फ बढ़ने की राह पर है, बल्कि बदलने की राह पर है। औसतन-दृष्टि से देखें तो यह सिर्फ निवेश-राशि का मामला नहीं है; यह उस बदलाव का प्रमाण है जहाँ दवाओं-उपचार, अस्पताल-सेवाएँ, हेल्थ-टेक और रोग-प्रबंधन मॉडल सब मिलकर आगे बढ़ रहे हैं।

हालाँकि चुनौतियाँ मौजूद हैं—जैसे लागत, पहुँच, ग्रामीण-शहरी विभाजन—लेकिन यदि इनका सही तरह से समाधान हुआ तो यह आम नागरिक यानी “आप और मैं” के स्वास्थ्य-विकल्पों को बेहतर बना सकता है। मधुमेह और मोटापा जैसे स्वास्थ्य-चुनौतियों के समय में यह एक सकारात्मक संकेत है कि भारत की स्वास्थ्य-उद्योग क्षमता तेजी से विकसित हो रही है।

आगे-देखें तो यह संभावना है कि भविष्य में बेहतर दवाएँ, बढ़ी-हुई देखभाल-सेवाएँ, और नए-मॉडल्स सामने आएँगे जिनसे स्वास्थ्य-सेवा सिर्फ बेहतर नहीं बल्कि अधिक सुलभ और व्यावहारिक बनेगी।

स्रोत (References)
  1. Indian pharma & healthcare sector saw $3.5 bn deals in Q3 2025: Grant Thornton Bharat”, Economic Times/ IANS, 28 Oct 2025.

  2. Business Standard: “Pharma, healthcare sector deals hit $3.5 billion in Sep quarter: Report.”

  3. PharmaBiz: “India’s healthcare and pharma deals surge in Q3 2025 …”

  4. India Tribune: “Indian pharma and healthcare sector witnessed $3.5 billion deals in Q3 2025: Report.

Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। किसी भी चिकित्सा निर्णय के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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