सर्दियों में सेहत पर भारी पड़ सकती है लापरवाही: दिसंबर में क्यों बढ़ते हैं हार्ट, डायबिटीज़ और फेफड़ों के खतरे?

ठंड, प्रदूषण और सुस्त दिनचर्या से दिसंबर में हार्ट अटैक, डायबिटीज़ और सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ता है। जानिए मेडिकल साइंस क्या कहती है।

HEALTH TIPS

ASHISH PRADHAN

12/26/20251 min read

Winter season health risks in India showing increased heart disease, and respiratory problem.
Winter season health risks in India showing increased heart disease, and respiratory problem.

सर्दियों में सेहत की अनदेखी पड़ सकती है भारी: दिसंबर में बढ़ते हार्ट, डायबिटीज़ और फेफड़ों के खतरे पर क्या कहती है मेडिकल साइंस?

परिचय

दिसंबर के अंतिम सप्ताह से देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान तेजी से गिरने लगता है। इसी अवधि में वायु प्रदूषण उच्च स्तर पर पहुंच जाता है और ठंड के कारण लोगों की दैनिक शारीरिक गतिविधियां सीमित हो जाती हैं। इन परिस्थितियों का संयुक्त प्रभाव यह होता है कि भारत में हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, श्वसन संक्रमण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है।

कौन सबसे अधिक प्रभावित होता है?
इस दौरान बुजुर्ग, मधुमेह और उच्च रक्तचाप से ग्रस्त मरीज, मोटापे से जूझ रहे लोग, छोटे बच्चे तथा अस्थमा या COPD के मरीज विशेष रूप से जोखिम में रहते हैं।

समस्या की जड़ क्या है?
ठंड के मौसम में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता, मेटाबॉलिज़्म और रक्त संचार की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे पुरानी बीमारियों के बिगड़ने और नई स्वास्थ्य समस्याओं के उभरने की आशंका बढ़ जाती है।

कब और कहां जोखिम अधिक होता है?
यह जोखिम दिसंबर से जनवरी के बीच सबसे अधिक रहता है, विशेषकर उत्तर और मध्य भारत के शहरी एवं औद्योगिक क्षेत्रों में, जहां ठंड के साथ प्रदूषण भी गंभीर स्तर पर होता है।

इसके पीछे कारण क्या हैं?
तापमान में गिरावट, वायु प्रदूषण, असंतुलित खान-पान और शारीरिक गतिविधि की कमी इस समस्या को और गंभीर बना देती है।

बचाव कैसे संभव है?
वैज्ञानिक शोध और डॉक्टरों द्वारा सुझाए गए स्वास्थ्य उपायों को अपनाकर इन मौसमी जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यह लेख विस्तार से बताएगा कि सर्दियों में शरीर में कौन-से जैविक परिवर्तन होते हैं और किन छोटे लेकिन जरूरी जीवनशैली बदलावों से गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।

सर्दियों में हार्ट अटैक और BP क्यों बढ़ जाते हैं?

मेडिकल रिसर्च के अनुसार ठंड के मौसम में रक्त वाहिकाएं संकुचित (vasoconstriction) हो जाती हैं, जिससे हृदय को रक्त पंप करने में अधिक दबाव लगाना पड़ता है। यही कारण है कि सर्दियों में ब्लड प्रेशर बढ़ने और हार्ट अटैक के मामलों में वृद्धि दर्ज की जाती है।

डॉक्टरों की सलाह:

  • सुबह-सुबह ठंड में अचानक बाहर निकलने से बचें

  • BP मरीज नियमित रूप से घर पर BP मॉनिटरिंग करें

  • अत्यधिक नमक, तली-भुनी चीज़ें और शराब से दूरी रखें

  • रोज़ हल्की वॉक या योग अवश्य करें

चेतावनी संकेत:
सीने में जकड़न, बाएं हाथ में दर्द, सांस फूलना, अचानक पसीना – इन लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ न करें।

डायबिटीज़ मरीजों के लिए सर्दियां क्यों हैं चुनौतीपूर्ण?

सर्दियों में पसीना कम निकलने के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन का एहसास नहीं होता, जिससे ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित हो सकता है। साथ ही त्योहारों और ठंड के कारण मीठे व हाई-कार्ब फूड का सेवन बढ़ जाता है।

सुरक्षित रहने के उपाय:

  • रोज़ाना 8–10 गिलास पानी ज़रूर पिएं

  • सुबह खाली पेट और रात को ब्लड शुगर चेक करें

  • बाजरा, जौ, ओट्स, सब्ज़ियाँ और दालें आहार में शामिल करें

  • बिना डॉक्टर की सलाह दवा या डोज़ में बदलाव न करें

ध्यान रखें:
डायबिटीज़ कंट्रोल में रखने से किडनी, आंखों और हार्ट की जटिलताओं से बचा जा सकता है।

सर्दियों में बढ़ता मोटापा: एक साइलेंट खतरा

ठंड के मौसम में शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और कैलोरी-रिच भोजन बढ़ जाता है, जिससे वजन तेज़ी से बढ़ सकता है। मोटापा केवल दिखने की समस्या नहीं, बल्कि डायबिटीज़, हार्ट डिज़ीज़ और जोड़ों के दर्द की जड़ है।

हेल्दी वेट मैनेजमेंट टिप्स:

  • रात का खाना सोने से कम से कम 3 घंटे पहले लें

  • घी, मक्खन और फ्राइड फूड सीमित रखें

  • रोज़ 20 मिनट योग, स्ट्रेचिंग या स्ट्रेंथ एक्सरसाइज़ करें

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प्रदूषण + ठंड = फेफड़ों पर डबल अटैक

दिसंबर में AQI खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है, जिससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और COPD मरीजों को सबसे अधिक परेशानी होती है।

फेफड़ों को सुरक्षित रखने के उपाय:

  • सुबह-शाम खुले में एक्सरसाइज़ करने से बचें

  • डॉक्टर द्वारा दिए गए इनहेलर नियमित रूप से लें

  • घर में धूप और वेंटिलेशन बनाए रखें

  • धुएं और धूल से यथासंभव दूरी रखें

इम्युनिटी बढ़ाना क्यों है ज़रूरी?

ठंड के मौसम में वायरल संक्रमण, फ्लू और सांस की बीमारियां तेजी से फैलती हैं। मजबूत इम्युनिटी ही सबसे बड़ा बचाव है।

प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर:

  • विटामिन C: आंवला, नींबू, संतरा

  • ज़िंक: कद्दू के बीज, मूंगफली, दालें

  • हल्दी वाला गुनगुना दूध

  • 7–8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद

सर्दियों में मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी न करें

कम धूप और ठंड के कारण Seasonal Depression और तनाव बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर हार्ट और शुगर कंट्रोल पर पड़ता है।

मेंटल हेल्थ के लिए सुझाव:

  • सुबह धूप में 10–15 मिनट बैठें

  • सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करें

  • रोज़ 5 मिनट गहरी सांस (Deep Breathing) लें

  • परिवार और दोस्तों से संवाद बनाए रखें

निष्कर्ष (Conclusion)

सर्दी का मौसम केवल ठंड से बचने का नहीं, बल्कि अपनी सेहत को समझदारी से संभालने का समय है। हार्ट, डायबिटीज़, मोटापा, फेफड़े और मानसिक स्वास्थ्य—ये सभी आपस में जुड़े हुए हैं, और थोड़ी-सी लापरवाही गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है।
अगर समय रहते सही खान-पान, नियमित जांच और डॉक्टर-प्रमाणित सलाह को अपनाया जाए, तो सर्दियां बीमारियों का नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन की शुरुआत बन सकती हैं।

Disclaimer:

यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी बीमारी, दवा या उपचार से संबंधित निर्णय लेने से पहले कृपया योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

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