45 साल से कम उम्र में अचानक मौतें क्यों बढ़ रहीं? AIIMS अध्ययन ने हृदय रोग को बताया सबसे बड़ा कारण

AIIMS के अध्ययन में सामने आया कि 45 वर्ष से कम उम्र में अचानक मौतों के 40–45% मामले हृदय रोग से जुड़े हैं। विशेषज्ञों ने जीवनशैली और समय पर जांच को बताया अहम।

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ASHISH PRADHAN

12/17/20251 min read

Editorial medical image of human heart with ECG line illustrating AIIMS study on young age deaths.
Editorial medical image of human heart with ECG line illustrating AIIMS study on young age deaths.

45 वर्ष से कम उम्र में अचानक मौतें: हृदय रोग बना सबसे बड़ा कारण, AIIMS अध्ययन ने खोली चौंकाने वाली सच्चाई

नई दिल्ली। देश की प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्था अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) द्वारा किए गए एक हालिया शोध अध्ययन ने भारत में 45 वर्ष से कम आयु के लोगों में अचानक मृत्यु के मामलों को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसमें यह पाया गया है कि हृदय संबंधी रोग इस आयु वर्ग में असमय मौत का सबसे प्रमुख कारण बन चुके हैं।

यह अध्ययन विशेष रूप से उन युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोगों पर केंद्रित था, जिनकी मृत्यु अचानक और अप्रत्याशित परिस्थितियों में हुई, और इसके परिणामों ने न केवल चिकित्सा जगत बल्कि सामाजिक स्तर पर भी गहरी चिंता उत्पन्न की है। इस व्यापक शोध में पाया गया कि जीवनशैली में आए बदलाव, तनाव, खानपान की गलत आदतें, व्यायाम की कमी और धूम्रपान जैसे कारक इस समस्या को और भी विकराल बना रहे हैं, जो भारतीय समाज के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती के रूप में सामने आ रहा है।

क्या है AIIMS के अध्ययन का मुख्य निष्कर्ष और इसकी पृष्ठभूमि?

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने कई वर्षों के डेटा का विश्लेषण करते हुए यह पाया कि 45 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों में अचानक मृत्यु के मामलों में हृदय रोग लगभग 40 से 45 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है, जो पहले की तुलना में काफी अधिक है। यह अध्ययन विभिन्न अस्पतालों, फॉरेंसिक विभागों और आपातकालीन चिकित्सा केंद्रों से एकत्रित आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया था, जिसमें हजारों मामलों का गहन विश्लेषण शामिल था।

शोधकर्ताओं ने बताया कि अचानक हृदय की मृत्यु (Sudden Cardiac Death) के अधिकांश मामले कोरोनरी धमनी रोग (Coronary Artery Disease), कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy), मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (Myocardial Infarction) और अन्य संरचनात्मक हृदय विकारों से जुड़े हुए थे।

परंपरागत रूप से यह माना जाता था कि हृदय रोग मुख्य रूप से बुजुर्गों की समस्या है, लेकिन पिछले दो दशकों में भारत में युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में इन रोगों की व्यापकता तेजी से बढ़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में हृदय रोगों से होने वाली मौतों की दर वैश्विक औसत से काफी अधिक है, और यह स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।

AIIMS के अध्ययन ने इस बात को पुष्ट किया है कि युवा भारतीयों में हृदय रोग एक महामारी का रूप ले चुका है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

किन कारणों से युवाओं में बढ़ रहा है हृदय रोग का खतरा?

AIIMS के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में कई प्रमुख कारणों की पहचान की है, जो युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में हृदय रोग के बढ़ते जोखिम के लिए जिम्मेदार हैं। सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कारण आधुनिक जीवनशैली में आया व्यापक परिवर्तन है, जिसमें शारीरिक गतिविधियों की कमी, लंबे समय तक बैठे रहने वाली नौकरियां, और व्यायाम के प्रति उदासीनता शामिल है।

देश के महानगरों और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले युवा लोग अपनी व्यस्त दिनचर्या में इतने व्यस्त हो गए हैं कि वे अपने स्वास्थ्य की देखभाल के लिए समय नहीं निकाल पाते, जिसका सीधा असर उनके हृदय स्वास्थ्य पर पड़ता है।

दूसरा प्रमुख कारण खानपान की बदलती आदतें हैं, जिसमें फास्ट फूड, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ, अत्यधिक तेल और नमक युक्त भोजन का सेवन शामिल है। ये खाद्य पदार्थ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाते हैं, रक्तचाप को प्रभावित करते हैं और मोटापे को बढ़ावा देते हैं, जो सभी हृदय रोग के प्रमुख जोखिम कारक हैं।

AIIMS के अध्ययन में यह भी पाया गया कि धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों का सेवन युवा भारतीयों में तेजी से बढ़ रहा है, जो धमनियों को संकुचित करता है और रक्त प्रवाह को बाधित करता है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

तीसरा महत्वपूर्ण कारक मानसिक तनाव और चिंता है, जो आधुनिक कामकाजी जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। कार्यस्थल पर लगातार दबाव, प्रतिस्पर्धा, नौकरी की असुरक्षा, वित्तीय चिंताएं और सामाजिक अपेक्षाएं युवाओं में क्रोनिक स्ट्रेस (दीर्घकालिक तनाव) को जन्म देती हैं, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।

शोध बताते हैं कि लगातार तनाव में रहने से कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो रक्तचाप को बढ़ाता है और हृदय की धड़कन को अनियमित बना देता है।

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इसके अलावा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियां भी युवा भारतीयों में तेजी से बढ़ रही हैं, जो हृदय रोग के लिए प्रमुख जोखिम कारक हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि पारिवारिक इतिहास और आनुवंशिक कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, खासकर उन परिवारों में जहां हृदय रोग की पृष्ठभूमि रही हो।

चिकित्सा विशेषज्ञों का क्या कहना है इस गंभीर समस्या पर?

AIIMS के हृदय रोग विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने इस अध्ययन के परिणामों को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि युवा भारतीयों में हृदय रोग की बढ़ती दर एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति बन रही है। देश के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञों ने बताया कि अचानक हृदय की मृत्यु के अधिकांश मामलों में पीड़ितों को पहले से कोई लक्षण या चेतावनी नहीं मिलती, जो इस समस्या को और भी खतरनाक बना देती है।

कई बार युवा लोग सीने में हल्का दर्द, सांस लेने में तकलीफ, या थकान जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, और जब तक वे चिकित्सा सहायता लेने का निर्णय लेते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि नियमित स्वास्थ्य जांच, विशेष रूप से 30 वर्ष की आयु के बाद, अत्यंत महत्वपूर्ण है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट, ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG), इकोकार्डियोग्राम और अन्य हृदय संबंधी परीक्षण समय रहते हुए किसी भी गंभीर समस्या का पता लगाने में मदद कर सकते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा हो, उन्हें और भी सतर्क रहने की आवश्यकता है और उन्हें नियमित रूप से अपने हृदय स्वास्थ्य की निगरानी करनी चाहिए।

जीवनशैली में बदलाव: रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका

AIIMS के अध्ययन में सबसे महत्वपूर्ण सुझाव यह दिया गया है कि हृदय रोग की रोकथाम के लिए जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाना सबसे प्रभावी उपाय है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित व्यायाम, जैसे कि प्रतिदिन कम से कम 30 से 45 मिनट की तीव्र शारीरिक गतिविधि, हृदय को मजबूत बनाती है और रक्त परिसंचरण को सुधारती है। इसमें तेज चलना, दौड़ना, तैरना, साइकिल चलाना, योग और अन्य एरोबिक व्यायाम शामिल हैं।

संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दाल, फलियां, नट्स और बीज जैसे खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना चाहिए, जबकि प्रोसेस्ड फूड, अत्यधिक तेल, चीनी और नमक युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम करना चाहिए। भूमध्यसागरीय आहार (Mediterranean Diet) को हृदय स्वास्थ्य के लिए सबसे लाभकारी माना जाता है, जिसमें जैतून का तेल, मछली, साबुत अनाज और ताजी सब्जियां प्रमुख रूप से शामिल होती हैं।

धूम्रपान और शराब का सेवन पूरी तरह से बंद करना या कम से कम करना भी अत्यंत आवश्यक है। धूम्रपान हृदय रोग के लिए सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है, और इसे छोड़ने से हृदय स्वास्थ्य में तुरंत सुधार देखा जा सकता है। तनाव प्रबंधन के लिए ध्यान (मेडिटेशन), गहरी सांस लेने के व्यायाम, योग, और पर्याप्त नींद लेना भी बेहद महत्वपूर्ण है। वयस्कों को प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेनी चाहिए, क्योंकि नींद की कमी भी हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाती है।

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सरकारी पहल और जागरूकता अभियान की आवश्यकता

AIIMS के अध्ययन के परिणामों के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं और नीतिगत उपाय किए जाएं। देश के विभिन्न राज्यों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने, नियमित स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन करने, और लोगों को हृदय रोग के जोखिम कारकों के बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि स्कूलों और कॉलेजों में स्वास्थ्य शिक्षा को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी को शुरू से ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके। कार्यस्थलों पर भी कर्मचारियों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी, व्यायाम सुविधाओं की व्यवस्था, और तनाव प्रबंधन कार्यक्रमों को लागू करना आवश्यक है।

सरकार को तंबाकू और शराब जैसे हानिकारक उत्पादों पर सख्त नियंत्रण लगाने, उनके विज्ञापन और प्रचार पर रोक लगाने, और लोगों को इनके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। साथ ही, स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को अधिक व्यापक और सुलभ बनाना भी आवश्यक है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग भी गुणवत्तापूर्ण हृदय चिकित्सा प्राप्त कर सकें।

निष्कर्ष: समय रहते सतर्कता और सक्रियता जरूरी

AIIMS के इस महत्वपूर्ण अध्ययन ने एक बार फिर इस बात को रेखांकित किया है कि युवा भारतीयों में हृदय रोग एक गंभीर और बढ़ती हुई समस्या है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। यह केवल एक चिकित्सा समस्या नहीं है, बल्कि एक सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौती है जो देश के युवा कार्यबल को प्रभावित कर रही है। इस समस्या से निपटने के लिए व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और सरकारी स्तर पर सामूहिक प्रयास करने होंगे।

हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनना होगा, स्वस्थ जीवनशैली अपनानी होगी, और नियमित स्वास्थ्य जांच को प्राथमिकता देनी होगी। परिवार के सदस्यों को भी एक-दूसरे के स्वास्थ्य की देखभाल करनी चाहिए और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सही कदम उठाए जाएं, तो युवाओं में हृदय रोग से होने वाली असमय मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

यह अध्ययन हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि हमें अपनी व्यस्त और तनावपूर्ण जीवनशैली में अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जीवन में सफलता, धन और पद प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सब तभी अर्थपूर्ण है जब हम स्वस्थ रहें और अपने जीवन का आनंद ले सकें। आइए, हम सभी मिलकर संकल्प लें कि हम अपने हृदय स्वास्थ्य को प्राथमिकता देंगे और एक स्वस्थ भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।

स्रोत:

यह लेख अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली द्वारा हाल ही में प्रकाशित शोध अध्ययन पर आधारित है, जिसमें 45 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों में अचानक मृत्यु के कारणों का विश्लेषण किया गया था। अतिरिक्त जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), भारतीय हृदय रोग विशेषज्ञ संघ, और विभिन्न चिकित्सा पत्रिकाओं से प्राप्त की गई है वे किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

Disclaimer:

यह लेख उपलब्ध शोध, विशेषज्ञ राय और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। यह चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है। कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या, जांच या उपचार से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।

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